हरियाणा के 4 शहरों में कचरे से बनेगी बिजली, सीएम नायब सैनी की मौजूदगी में MoU साइन

स्टार सवेरा। हरियाणा को कचरा मुक्त बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नई इबारत लिखने के मकसद से राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। नूंह में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की गरिमामयी मौजूदगी में हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग और भारत सरकार के उपक्रम ‘ऑयल इंडिया लिमिटेड’ की सहायक कंपनी ‘ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड’ के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस दूरगामी समझौते के तहत प्रदेश के चार प्रमुख नगर निगमों—अंबाला, हिसार, फरीदाबाद और गुरुग्राम में अत्याधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से ऊर्जा बनाने वाले) प्लांट स्थापित किए जाएंगे। एमओयू पर चारों नगर निगमों के आयुक्तों और ऑयल इंडिया के प्रबंध निदेशक समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। सभी संबंधित विभागों को इस प्रोजेक्ट को अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह चालू करने की समयसीमा दी गई है।

5,000 टन कचरे का होगा वैज्ञानिक निस्तारण, बनेगी 50 मेगावाट बिजली

इन चार बड़े प्लांट्स के चालू होने से हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में वर्षों से जारी कूड़े-कचरे के ढेर की समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा। योजना के अनुसार, इन संयंत्रों में रोजाना लगभग 5,000 टन ठोस कचरे का वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों के अनुरूप निस्तारण किया जाएगा। इससे रोजाना कम से कम 50 मेगावाट बिजली पैदा होगी, जिसे सीधे राज्य के बिजली वितरण निगमों को बेचा जाएगा।

प्रोजेक्ट के वित्तीय ढांचे की बात करें तो इसकी कुल पूंजीगत लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा निवेश किया जाएगा। वहीं, 25 प्रतिशत राशि भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से मिलेगी और शेष 25 प्रतिशत वित्तीय योगदान हरियाणा सरकार तथा संबंधित नगर निगम मिलकर उठाएंगे।

कचरे से बनेगी बायोगैस और बिजली: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत काम

यह पूरी महत्वाकांक्षी परियोजना ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत विकसित की जा रही है। प्लांट्स में पहुंचने वाले कचरे का पहले वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकरण (छंटाई) किया जाएगा। कचरे में शामिल गीले अपशिष्ट का उपयोग कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट में बायोगैस बनाने के लिए होगा, जबकि रिसाइकल न होने वाले सूखे कचरे को वेस्ट-टू-एनर्जी यूनिट में प्रोसेस करके बिजली बनाई जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस पहल को राज्य के पर्यावरण के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कचरे को एक ‘समस्या से समाधान’ और ‘बोझ से संसाधन’ के रूप में बदलने के विजन पर काम कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि इन आधुनिक प्लांट्स से न केवल शहर स्वच्छ और सुंदर बनेंगे, बल्कि ग्रीन एनर्जी के उत्पादन से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण तैयार होगा।