BRICS समिट की तैयारियां तेज, कई जगह पोस्टर-पेंटिग्स से सजावट:कोर्ट-सरकारी ऑफिस 3 दिन बंद; ट्रैफिक के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट

नई दिल्ली में BRICS समिट से पहले दिल्ली को पोस्टर और रोशनी वाली सजावट से सजाया गया है। राजधानी के कई हिस्से त्योहार जैसे नजर आ रहे हैं।

BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला है। इस साल की आधिकारिक थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने समिट के लिए ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। VIP काफिलों की आवाजाही के दौरान 22 डायवर्जन पॉइंट और 35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक को नियंत्रित या डायवर्ट किया जाएगा।

इधर, सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली हाईकोर्ट और सभी जिला अदालतें 11 सितंबर को बंद रहेंगी। ट्रायल कोर्ट में 12 सितंबर को भी अवकाश रहेगा।

इस तरह दिल्ली की सभी निचली अदालतों में 11, 12 और 13 सितंबर यानी शुक्रवार से रविवार तक लगातार 3 दिन कामकाज नहीं होगा।

एमसीडी और केंद्र सरकार के सभी ऑफिस भी 11 सितंबर को बंद रहेंगे। केवल अस्पताल, सफाई और आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।

समिट में शामिल होंगे विदेशी नेता और प्रतिनिधि

समिट में राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और दूसरे बड़े अधिकारी शामिल होंगे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि विदेशी प्रतिनिधियों की आवाजाही आसान रखने और आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जा रही है।

ट्रैफिक व्यवस्था पर एडिशनल CP (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता ने बताया कि VIP मोटरकेड गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोका भी जा सकता है।

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड का ऑपरेशन ‘ब्रिक्स कवच’

NSG का ऑपरेशन ‘कवच BRICS’ अहम है क्योंकि भारत समिट की मेजबानी करेगा। इस समिट में BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच इनवाइटीज भी शामिल होंगे।

इसके लिए मंगलवार को करीब 100 NSG कमांडो ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया। चारों जगहों पर अलग-अलग समय में ड्रिल की गई।

मकसद था, अगर कोई आतंकी खतरा पैदा होता है, तो NSG, दिल्ली पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां बिना समय गंवाए एक साथ कार्रवाई कर सकें।

नौ होटलों से भारत मंडपम तक रिहर्सल

गुप्ता ने बताया कि विदेशी प्रतिनिधि नौ होटलों में ठहरेंगे। इन होटलों से भारत मंडपम तक जाने वाले रास्तों की पहचान कर ली गई है।

उन्होंने कहा कि तय रूट पर कारकेड की रिहर्सल की जा रही है और पुलिसकर्मियों को पूरी व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है। गुप्ता ने कहा, “वे नौ होटलों में ठहरेंगे। वहां से भारत मंडपम तक के रास्तों की पहचान की गई है। हम इन रास्तों पर कारकेड रिहर्सल कर रहे हैं। हमारे स्टाफ को सही तरीके से ब्रीफिंग दी जा रही है।”

BRIC से BRICS तक ऐसे बढ़ा समूह

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के BRIC गठबंधन के तौर पर हुई थी। इन देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी।

इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में BRIC का पहला शिखर सम्मेलन हुआ। दक्षिण अफ्रीका के 2011 में शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE को पूर्ण सदस्य बनाया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बना।

अब BRICS में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। इसके साथ साझेदार देशों की संख्या भी बढ़ रही है। यह समूह वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है।

11 सदस्य देशों का डेटा आपस में जोड़ने की तैयारी

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अंतरिक्ष सहयोग के लिए स्थायी संस्थागत ढांचा बनाने पर चर्चा हो सकती है। सदस्य देशों के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नेटवर्क का विस्तार और ब्रिक्स स्पेस काउंसिल के गठन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनने की संभावना है।

ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की शुरुआती बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है। योजना है कि सदस्य देशों के मौजूदा भू-अवलोकन उपग्रहों और उनसे मिलने वाले डेटा को साझा कर बड़ा निगरानी नेटवर्क खड़ा किया जाए।

ब्रिक्स में रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कांस्टिलेशन के सहयोग का ढांचा पहले से है। नए सदस्यों को भी इसमें जोड़ने की तैयारी है। इससे एक देश का उपग्रह डेटा जरूरत पड़ने पर दूसरे सदस्य देश के काम आ सकेगा।

मसलन, भारत में बाढ़ या चक्रवात के दौरान दूसरे देशों के डेटा से प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग और राहत कार्यों में मदद मिल सकती है।

अभी ब्रिक्स का अंतरिक्ष सहयोग अलग-अलग बैठकों और समितियों के जरिए आगे बढ़ता है। प्रस्तावित स्पेस काउंसिल को अगर समिट में राजनीतिक मंजूरी मिलती है तो इसे परमानेंट ऑर्गनाइजेशनल आधार मिल सकता है।

भारतीय कंपनियों को मिल सकता है नया बाजार

इसरो के साथ भारत का निजी स्पेस-टेक सेक्टर भी ब्रिक्स सहयोग से लाभ उठा सकता है। भारतीय कंपनियां प्रक्षेपण सेवाएं, छोटे उपग्रह, सैटेलाइट इमेजरी, भू-अवलोकन, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, कृषि मैपिंग और आपदा प्रबंधन एप्लीकेशन जैसे क्षेत्रों में सदस्य देशों के साथ साझेदारी कर सकती हैं।

जॉइंट साझा डेटा नेटवर्क और स्पेस काउंसिल का ढांचा आगे बढ़ने पर भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिक्स देशों में तकनीक, सेवाओं और अनुप्रयोगों का नया बाजार खुल सकता है