कोलकाता हादसाः ‘मेरा बच्चा मर जाएगा, कोई तो निकालो’:ये थे भगदड़ में जान गंवाने वाले अभिषेक के आखिरी शब्द, पत्नी बोली-मेरी तो दुनिया उजड़ गई

‘मेरा बच्चा मर जाएगा, कोई तो निकालो, मेरा बेटा मर जाएगा, कोई तो निकाल दो। ये आखिरी शब्द अभिषेक कुमार श्रीवास्तव के थे। कोलकाता के चोरबागान में दुर्गा पूजा पंडाल के अंदर मची भगदड़ के दौरान वह अपने 8 साल के बेटे आयुष को बचाने के लिए चीख रहे थे।

उनकी पत्नी निभा कुमारी ने बताया कि यह पति के आखिरी शब्द थे, जो वह सुन पाईं। उनके सामने ही भीड़ का दबाव बढ़ता गया। वह खुद, पति और बेटा को संभलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन न आगे जाने की जगह थी और न पीछे लौटने का रास्ता। इसी अफरा-तफरी में वह गिर गईं। पति और बेटे की चीख सुनाई देती रही। फिर दोनों को बचाया नहीं जा सका।

कोलकाता हादसे में परिवार की खुशियां छीन ली

17 अक्टूबर, शनिवार की रात कोलकाता के चोरबागान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हादसे ने मुजफ्फरपुर के एक परिवार की खुशियां छीन ली। इस हादसे में अभिषेक और उनके 8साल के बेटे आयुष की मौत हो गई, जबकि पत्नी निभा घायल हो गईं। सोमवार को जब दोनों के शव मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र के साकेतपुरी स्थित घर पहुंचे, तो पूरे मोहल्ले में मातम पसर गया।

जिस घर से कुछ दिन पहले परिवार घूमने की खुशी लेकर निकला था, वहां एक साथ पिता और बेटे के शव पहुंचे। पत्नी बार-बार पति और बच्चे को देखकर बेहोश हो रही थीं। पिता बिंदेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। परिवार के लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि एक साथ दो अपनों को खोने का यह दुख कैसे सहे।

पंडाल में पहले आगे बढ़े, फिर पीछे से धक्का लगने लगा

निभा कुमारी ने हादसे का मंजर बताते हुए कहा कि परिवार पंडाल के अंदर गया था। वहां तारामंडल जैसी संरचना बनाई गई थी, जहां घूमते हुए आगे बढ़ना था। एक चक्कर घूमने के बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें बाहर निकाल दिया। इसके बाद वे एक गली जैसी जगह पर पहुंचे, जहां उन्हें कोई सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। परिवार के लोग थोड़ा आगे बढ़े ही थे कि अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

निभा के मुताबिक, उस समय आगे जाने के लिए जगह नहीं थी और पीछे लौटने का रास्ता भी नहीं मिल रहा था। पीछे से लगातार धक्का दिया जा रहा था। उनके पीछे पति अभिषेक थे, बीच में बेटा आयुष था और सबसे आगे वह खुद थी। उनके पीछे उनकी दीदी और जीजा भी थे। वे लोग वीडियो बना रहे थे, इसलिए कुछ पीछे रह गए थे और निभा अपने पति-बेटे के साथ आगे निकल आई थी।

उन्होंने बताया कि धक्का-मुक्की शुरू होने पर वे लोग खुद को संभालने की कोशिश करने लगे। भीड़ के दबाव में वे घूम गए और सामने की तरफ देखते हुए गिर पड़े। इसी दौरान उन्हें पति की आवाज सुनाई देने लगी। अभिषेक लगातार बेटे को बचाने के लिए चिल्ला रहे थे।

एक फोन आया और परिवार को मिली हादसे की खबर

अभिषेक के छोटे भाई अंकित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वह असम में रहते हैं। फोन के जरिए जानकारी मिली कि बड़े भाई जिस पंडाल में गए थे, वहां हादसा हो गया है। इसके बाद परिवार में अफरातफरी मच गई। कुछ देर पहले तक घूमने गए भाई और भतीजे के लौटने का इंतजार था, लेकिन खबर उनकी मौत की मिली।

अंकित ने बताया कि उनके परिवार पर पहले से ही दुखों का पहाड़ टूटा हुआ था। 2 सितंबर को उनकी मां का निधन हो गया था। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अक्टूबर में यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि भैया अभिषेक मुजफ्फरपुर से ही घूमने के लिए निकले थे।

घर से निकलने से पहले आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। भैया ने कहा था कि घूमने जा रहे हैं और दो दिनों तक बात नहीं हो पाएगी। उन्होंने अष्टमी की छुट्टी होने की बात भी बताई थी। इसके बाद उनसे कोई बातचीत नहीं हुई और सीधे उनकी मौत की खबर मिली। परिवार में एक बड़ी बहन हैं, उनसे छोटे अभिषेक थे और सबसे छोटे वह खुद हैं।

अभिषेक ने साथ चलने के लिए कहा था, टिकट कराने की भी बात की थी

चचेरे भाई निरंजन श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें पहले से जानकारी थी कि अभिषेक घूमने के लिए कोलकाता जा रहे हैं। 16 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे तक उनसे बातचीत हुई थी। पूरी तैयारी के साथ घूमने निकलने वाले थे। उन्होंने मुझे भी साथ चलने के लिए कहा था और टिकट कराने की बात की थी, लेकिन उनके साथ नहीं जा सका।

निरंजन ने बताया कि उन्हें मेले में भगदड़ होने की जानकारी मिली, तो चिंता बढ़ गई। हादसे के बाद अभिषेक से दोबारा बात नहीं हो पाई। रात करीब 11 बजे वह मुजफ्फरपुर से पटना के लिए निकले। वहां से ट्रेन पकड़कर हावड़ा पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि किसी तरह परिवार के लोगों के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी, लेकिन हादसे की खबर ने सबकुछ बदल दिया।

अभिषेक अपनी दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) का काम करते थे। छुट्टी होने के कारण उन्होंने परिवार के साथ घूमने का प्लान बनाया था।

मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव थे अभिषेक, परिवार के साथ घूमने निकले थे

अभिषेक कुमार श्रीवास्तव दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम करते थे। परिवार के साथ समय बिताने और घूमने के लिए उन्होंने छुट्टी का मौका चुना था। उनके साथ पत्नी निभा और 8 साल का बेटा आयुष भी था। परिवार के लिए यह यात्रा सामान्य घूमने-फिरने का कार्यक्रम थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर ऐसी त्रासदी में बदल जाएगा।

घर से निकलते समय अभिषेक ने भाई को बताया था कि अष्टमी की छुट्टी है और वह घूमने जा रहे हैं। उन्होंने दो दिनों तक बातचीत नहीं होने की बात कही थी। परिवार को लगा था कि वह घूमकर लौटेंगे और फिर सामान्य दिनचर्या शुरू हो जाएगी। लेकिन दो दिनों तक फोन पर बात नहीं होने की बात कहने वाले अभिषेक अब कभी फोन नहीं करेंगे। बेटे आयुष के साथ उनकी मौत ने परिवार को ऐसा खालीपन दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

साहेबगंज के पिपरा राघो का रहने वाला था परिवार

अभिषेक मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड के पिपरा राघो गांव के रहने वाले थे। फिलहाल परिवार सदर थाना क्षेत्र के साकेतपुरी में रहता था। हादसे के बाद गांव और शहर में रहने वाले रिश्तेदारों व परिचितों को जैसे ही जानकारी मिली, लोग परिवार के पास पहुंचने लगे। सोमवार को शव पहुंचने के बाद घर पर लोगों की भीड़ जुटी रही। हर कोई परिवार को सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पिता-पुत्र की एक साथ मौत के सामने शब्द कम पड़ रहे थे।

अभिषेक के पिता बिंदेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव अपने बेटे और पोते के शव देखकर टूट गए। रोते हुए उन्होंने कहा कि जवान बेटा और पोता दोनों चले गए। अभी एक महीने पहले ही पत्नी की मौत हुई थी और अब इतना बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। इतना कहते-कहते उनकी आंखों में आंसू भर आए और वह आगे कुछ नहीं बोल सके। उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि परिवार को सहारा कौन देगा और वह इस दुख के साथ आगे कैसे जिएंगे।

बंगाल पुलिस के एस्कॉर्ट में पहुंचे शव, भाई ने दी मुखाग्नि

सोमवार को अभिषेक और आयुष के शव एंबुलेंस से मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र स्थित साकेतपुरी पहुंचे। शवों के साथ बंगाल पुलिस की टीम एस्कॉर्ट में थी। घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। परिजनों का लगातार आना जारी रहा। घर के अंदर और बाहर मातम पसरा रहा। पत्नी निभा बार-बार पति और बेटे की ओर देखती और फिर बेहोश हो जाती। पिता बिंदेश्वर प्रसाद की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अपने जवान बेटे और पोते को खोने का दुख उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था।

बंगाल पुलिस ने सदर थाना पुलिस को दोनों शव सौंपे और फिर लौट गई। इसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। एक ही परिवार के दो सदस्यों की एक साथ अर्थी उठने से माहौल और गमगीन हो गया। परिवार के लोगों के लिए यह विश्वास करना भी मुश्किल था कि कुछ दिन पहले घूमने निकले अभिषेक और आयुष अब उनके बीच नहीं हैं। अभिषेक और आयुष को मुखाग्नि अभिषेक के छोटे भाई अंकित कुमार श्रीवास्तव ने दी। अंतिम विदाई के समय परिवार के लोगों की आंखें नम थीं। एक महीने पहले मां को खो चुका परिवार अब बेटे और पोते की मौत के गहरे सदमे में डूब गया है।