15 मौतों के बाद 50 लाख का कारोबार ठप:ग्वालियर के शीतला माता मेले से लौटे व्यापारी, बोले- कोरोना के बाद भी नहीं थे ऐसे हालात

ग्वालियर के सातऊ गांव स्थित शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते थे। मेले में खिलौने, प्रसाद, झूले और गृहस्थी के सामान की दुकानों पर खूब खरीदारी होती थी, लेकिन इस बार सन्नाटा पसरा है। 17 अक्टूर की रात हुए ट्रक हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम हो गई है। इसका असर कारोबार पर भी पड़ा है।

व्यापारियों के मुताबिक, दो दिन में 50 लाख रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है। हालात ऐसे हैं कि नवमी से पहले ही करीब 80% दुकानें बंद हो गईं। दूसरे जिलों और राज्यों से आए व्यापारी सामान समेटकर लौट रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड महामारी के बाद भी मेले में ऐसे हालात नहीं बने थे।

सोमवार को दुर्गा नवमी पर दैनिक भास्कर की टीम मेला ग्राउंड पहुंची तो ज्यादातर दुकानें बंद थीं। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, वहां दुकानदार सामान समेटते नजर आए। कई व्यापारियों के लिए दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया।

1.50 लाख की जगह गिने-चुने श्रद्धालु पहुंचे

हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी उम्मीद में छोटे-बड़े व्यापारी 9 दिन तक दुकानें लगाते हैं, लेकिन इस बार हादसे के बाद भीड़ काफी कम रही। नुकसान से परेशान कई दुकानदारों ने नवमी की रात तक रुकने के बजाय पहले ही लौटने का फैसला किया।

‘लोग मेले में आए ही नहीं’

छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पांच साल से मंदिर में खिलौनों की दुकान लगा रही हैं। वह 9 दिन के मेले में अच्छी कमाई की उम्मीद लेकर आती हैं, लेकिन इस बार ग्राहकी नहीं होने से निराश हैं।

‘पहली बार दुकान लगाई, सारा कारोबार चौपट’

दतिया से आईं दामिनी पहली बार मेले में दुकान लगाने पहुंची थीं। उन्हें अच्छे कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन हादसे के बाद ग्राहकी नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग दुकानदारों से रुपए मांगते हैं और पैसे नहीं देने पर मारपीट करते हैं।

दामिनी के मुताबिक, बिजली के लिए रोजाना 200 रुपए और दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपए अलग से देने पड़ते हैं। उन्होंने इसे लेकर भी नाराजगी जताई।

‘एक लाख का सामान नहीं बिका’

ग्वालियर की मंजिता देवी ने हादसे के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक नहीं निकलने दी जाती तो ट्रक वहां कैसे पहुंच गया? उनके मुताबिक, करीब एक लाख रुपए का सामान नहीं बिक सका। इसलिए वह नवमी की सुबह ही दुकान समेटकर लौट रही थीं।

80 साल की कस्तूरी देवी पर 50 हजार का कर्ज

भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य सोमवार को भी यहां इस बार से ज्यादा भीड़ रहती है। हादसे के बाद कारोबार ठप होने से उन्हें नुकसान हुआ है।

कस्तूरी देवी के मुताबिक, उन पर 50 हजार रुपए का कर्ज है। अब उन्हें चिंता है कि इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

‘सैकड़ों साल में ऐसा कभी नहीं हुआ’

शीतला माता मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने कहा कि हादसे से सभी दुखी हैं। माता के दरबार के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नवमी पर सामान्य तौर पर जितनी भीड़ रहती है। इस बार उसके 10% लोग भी नहीं पहुंचे।

महंत के मुताबिक, मंदिर का दरवाजा काफी मजबूत है। पहले भी कई लोगों की जान बचा चुका है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर व्यवस्था की मांग करेगा।

दुकानदारों ने लगाए वसूली के आरोप

कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर धमकाने, मारपीट करने और रुपए मांगने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिजली के लिए रोजाना 200 रुपए और दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपए देने पड़ते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।