ऑस्ट्रेलिया में एक्सीडेंट में करनाल के युवक की मौत:15 लाख खर्च कर स्टडी वीजा पर गया, ट्रक ड्राइवर बना, पिता ने जमीन बेचकर भेजा

उज्जवल भविष्य और पैसा कमाने के लिए करनाल से ऑस्ट्रेलिया गए एक युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई। शुक्रवार को दो ट्रकों की टक्कर में उसकी जान चली गई। इस खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पिता ने अपनी जमा-पूंजी और पशुबाड़ा बेचकर बेटे को विदेश भेजा था। बेटे के घर लौटने पर परिवार ने शादी की तैयारियों के सपने संजो रखे थे। घर में नया मकान बन रहा था और जनवरी 2027 में बेटे के लौटने की उम्मीद थी।

करनाल जिले के ब्याना गांव निवासी 24 वर्षीय तुषार कांबोज करीब चार साल पहले ऑस्ट्रेलिया गया था।

पशुबाड़ा बेचकर और कर्ज लेकर भेजा था विदेश

मृतक तुषार के पिता राकेश कुमार पेशे से टेलर हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेटे का भविष्य बनाने के लिए उन्होंने पशुबाड़ा बेच दिया था। इसके अलावा कर्ज भी लिया। करीब 15 लाख रुपए खर्च करके 1 जनवरी 2022 को तुषार को स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया भेजा था।

तुषार ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। विदेश में पढ़ाई के साथ वह ट्रक चलाने का काम भी करने लगा था। पिता को उम्मीद थी कि बेटा मेहनत करके परिवार की आर्थिक हालत सुधारेगा।

एक दिन पहले ही नए मकान को लेकर हुई थी बात

परिवार के लिए सबसे ज्यादा तकलीफ देने वाली बात यह है कि हादसे से एक दिन पहले 29 अक्टूबर को ही तुषार की घर पर फोन पर बात हुई थी। परिवार में बन रहे नए मकान को लेकर चर्चा हुई।

परिजनों ने उसके वापस आने के बारे में पूछा तो उसने बताया था कि जनवरी 2027 में मकान का काम पूरा होने के बाद वह घर लौट आएगा। परिवार ने उसके आने के बाद शादी करने की बात भी सोच रखी थी। घर पर उसकी मां, छोटा भाई, दादी और चाचा हैं।

ह्यूम हाईवे पर दो ट्रकों की हुई टक्कर

राकेश कुमार के अनुसार, 30 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे न्यू साउथ वेल्स के ह्यूम हाईवे पर गनिंग के पास हादसा हुआ। तुषार ट्रक चला रहा था।

इसी दौरान उसका ट्रक दूसरे ट्रक से टकरा गया और उसकी मौत हो गई। परिवार को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 5 बजे हादसे की सूचना मिली। बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार के पैरों तले की जमीन खिसक गई।

10 दिन में शव पहुंचने की उम्मीद

अब परिवार को तुषार के पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार है। पिता ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में तुषार के साथी शव भारत लाने की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं। करीब 10 दिन में पार्थिव शरीर पहुंचने की उम्मीद है।

राकेश कुमार ने सरकार से भी बेटे का शव भारत लाने में मदद करने की गुहार लगाई है। जिस घर में बेटे की वापसी और शादी की खुशियां मनाने की तैयारी थी, वहां अब हर किसी की आंखें नम हैं।