अमेरिका ने बुधवार को ईरान के तेल कारोबार में मदद करने के आरोप में चंडीगढ़ के एक कारोबारी दंपती समेत 4 भारतीयों और उनसे जुड़ी 9 कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इन लोगों पर ईरान के गुप्त तेल जहाजों (शैडो फ्लीट) को दूसरे देशों के झंडे और फर्जी कागजात दिलाने का आरोप है।
इस नेटवर्क की मदद से ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों की असली पहचान छिपाई जाती थी, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों से बच सकें।
दूसरे देश के झंडे के साथ समुद्र में चलते थे जहाज
प्रतिबंधों की सूची में चंडीगढ़ के रहने वाले सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद, अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह के नाम शामिल हैं। इनके अलावा भारत में पंजीकृत 8 और सिंगापुर में पंजीकृत एक कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी फर्जी वेबसाइटों और संस्थाओं के जरिए जहाजों को दूसरे देशों का रजिस्ट्रेशन दिलाने का काम करते थे। आरोप है कि वे बिना संबंधित देशों की सरकारी मंजूरी के गुयाना और मोजाम्बिक जैसे देशों के नाम पर जहाजों का पंजीकरण कराते थे।
इस फर्जी रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों की असली पहचान छिपाने के लिए किया जाता था। जहाज किसी दूसरे देश के झंडे के साथ समुद्र में चलते थे, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो जाता था कि उनका असली मालिक कौन है और वे किस देश से जुड़े हैं। इससे उन पर नजर रखना और उन्हें पकड़ना भी मुश्किल हो जाता था।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि यह नेटवर्क 2014 से सक्रिय था। शुरुआत में इसने कैरेबियाई देश डोमिनिका की जहाज रजिस्ट्रेशन एजेंसी बनकर काम करने की कोशिश की। इसके बाद नेटवर्क ने गुयाना, मोजाम्बिक, माली, मलावी और अरूबा समेत कई देशों के नाम पर फर्जी वेबसाइटें बनाईं। इनके जरिए जहाजों को उन देशों का रजिस्ट्रेशन दिलाने का दिखावा किया जाता था।
अमेरिका में इनकी संपत्तियां फ्रीज
प्रतिबंध लगने के बाद अमेरिका में इन लोगों और कंपनियों की संपत्तियां फ्रीज कर दी गई हैं। अमेरिकी नागरिक और कंपनियां अब इनके साथ किसी तरह का कारोबार या पैसों का लेनदेन नहीं कर सकेंगी।
इसके अलावा, ईरानी एयरलाइंस को मदद देने के आरोप में तुर्किये की एक कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
‘फ्लैग ऑफ कन्वीनिएंस’ (FOC) क्या है?
जब किसी जहाज का मालिक अपने देश के बजाय किसी दूसरे देश में जहाज का रजिस्ट्रेशन कराता है, तो इसे ‘फ्लैग ऑफ कन्वीनिएंस’ कहते हैं। इसके बाद जहाज उस देश का झंडा लगाकर चलता है और उस पर उसी देश के समुद्री कानून और नियम लागू होते हैं।
आमतौर पर जहाज मालिक ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि कुछ देशों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान होती है और नियम भी कम सख्त होते हैं। लेकिन इस मामले में अमेरिका का आरोप है कि इस व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करके ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों की असली पहचान छिपाई गई।