लोकसभा में संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयकों पर चर्चा के दौरान नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है और महिला वर्ग को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना उनकी विचारधारा का मूल है, लेकिन वे ऐसे मनमाने परिसीमन के सख्त खिलाफ हैं जो दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और मुस्लिम समाज के हितों को चोट पहुंचाता हो।
सांसद ने डॉ. भीमराव अंबेडकर और दलित नेता कांशीराम के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिसकी जितनी संख्या भारी है, उसे उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन का उदाहरण देते हुए विधेयकों की मंशा पर प्रश्न उठाए और कहा कि बिना व्यापक चर्चा और जन-सहमति के किए जा रहे ये संवैधानिक बदलाव देश की मूल भावना के विपरीत हैं।
बेनीवाल ने कहा कि लोकतंत्र केवल संख्या का खेल नहीं बल्कि विश्वास का नाम है, जिसे वर्तमान सरकार कमजोर कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जातिगत जनगणना के बाद ठोस कदम उठाने के बजाय बिना राज्यों और दलों से संवाद किए इन विधेयकों को जल्दबाजी में प्रस्तुत किया है।
राजस्थान का पक्ष रखते हुए सांसद ने आंकड़ों के साथ बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में 48 लोकसभा सीटें होनी चाहिए, लेकिन सरकार के प्रस्तावों से राज्य को 10 सीटों का नुकसान होने की आशंका है।
उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों और संघीय ढांचे की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की। सांसद ने अंत में कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के समय यह विधेयक लाना केवल दिखावे की राजनीति है और यदि सरकार वास्तव में गंभीर होती तो जातिगत जनगणना के आधार पर ओबीसी वर्ग को आरक्षण और एससी-एसटी सीटों में वृद्धि करती।