टोंक में देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में भगतसिंह सेना सुप्रीमो नरेश मीणा गुरुवार (6 अगस्त) को नगरफोर्ट थाने में सरेंडर करेंगे। इस मामले में हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत को टोंक एससी/एसटी कोर्ट ने जुलाई में रद्द कर दिया था। झालावाड़ में प्रदर्शन के दौरान दोबारा गिरफ्तारी को जमानत की शर्तों का उल्लंघन माना था। इससे पहले करीब 9 महीने तक वे जमानत पर बाहर थे।
वहीं, कोर्ट के आदेश पर नगरफोर्ट थाना पुलिस उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड भी जुटा रही है। इसके लिए 20 जून को ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता (जिला बारां) के सरपंच को पत्र भेजकर संपत्ति का ब्योरा मांगा गया था, जिसे न्यायालय में पेश किया जाना है।
समर्थकों ने नरेश मीणा के जयपुर से नगरफोर्ट पहुंचने का कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके अनुसार वे गुरुवार सुबह 9 बजे जयपुर से रवाना होंगे और टोंक होते हुए करीब 11 बजे नगरफोर्ट पहुंचकर थाने में सरेंडर करेंगे।
SDM को थप्पड़ मारने के मामले में गिरफ्तार हुए थे नरेश मीणा
यह मामला 13 नवंबर को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के मतदान के दौरान शुरू हुआ था। समरावता गांव के लोगों ने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे।
आरोप है कि जबरन तीन लोगों से मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। अगले दिन 14 नवंबर को पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया और 15 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। इस मामले में 60 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। नरेश मीणा को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। करीब 9 महीने बाद हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत पर रिहा किया था।
झालावाड़ प्रदर्शन के बाद रद्द हुई जमानत
25 जुलाई को झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा एसआरजी हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद नगरफोर्ट थाना पुलिस ने इसे हाईकोर्ट की जमानत शर्तों के उल्लंघन का आधार बनाते हुए एससी-एसटी कोर्ट में उनकी जमानत रद्द करने की अर्जी लगाई।
कोर्ट ने 13 जुलाई को उनकी जमानत रद्द कर दी। जज आरती माहेश्वरी ने माना कि हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी थी, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने उन शर्तों का पालन नहीं किया।
कोर्ट के आदेश पर सरपंच से मांगी संपत्ति की जानकारी
नगरफोर्ट थानाधिकारी राजेंद्र ताड़ा ने बताया – एससी/एसटी कोर्ट के आदेश की पालना में नरेश मीणा की चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा गया है। 20 जून को ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता, तहसील मोठपुर (जिला बारां) के सरपंच (प्रशासक) को पत्र भेजा गया था। पत्र में नगरफोर्ट थाने में दर्ज मुकदमे का हवाला देते हुए जल्द संपत्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि उसे न्यायालय में पेश किया जा सके।
समर्थकों का आरोप- सरकार लोकप्रियता से घबराई हुई है
नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला समेत अन्य समर्थकों का कहना है कि सरकार अहंकार में है और नरेश मीणा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराई हुई है। उनका आरोप है कि पंचायत राज चुनाव से पहले उन्हें जेल में रखकर गरीबों, किसानों, मजदूरों और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि पहले स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त कर जमानत रद्द कराई गई।
शांतिपूर्ण धरने को बनाया जमानत रद्द करने का आधार
समर्थकों का कहना है कि पुलिस ने कोर्ट में जमानत रद्द करने के लिए झालावाड़ जिले में करीब एक साल पहले स्कूल हादसे में मारे गए सात बच्चों को न्याय दिलाने की मांग को आधार बनाया। उनका दावा है कि उस दौरान नरेश मीणा हॉस्पिटल परिसर में एक तरफ शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे, लेकिन इसे जमानत की शर्तों का उल्लंघन मान लिया गया। उनका कहना है कि अगर लोगों को न्याय दिलाने के लिए शांतिपूर्ण धरना देना भी अपराध माना जाएगा तो संविधान में मिले अधिकारों का क्या महत्व रह जाएगा।