श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर अब 6 दिसंबर को होगी कारसेवा:मथुरा में साधु-संतों ने बैठककर किया ऐलान; आज केवल शिला पूजन हुआ

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर प्रस्तावित कारसेवा स्थगित कर दी गई है। अब 6 दिसंबर को कारसेवा की जाएगी। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने शनिवार शाम को कारसेवा स्थगित किए जाने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा-

कांवड़ यात्रा और सावन महीने को देखते हुए कारसेवा फिलहाल स्थगित की गई है। कारसेवा से सावन के पवित्र महीने का माहौल बिगड़ सकता है।

हालांकि, रविवार सुबह करीब 10 बजे से चित्रगुप्त पीठ आश्रम में मंदिर निर्माण के लिए शिलाओं का हवन-पूजन शुरू हुआ। गुलाबी पत्थर की ये शिलाएं राजस्थान से लाई गई हैं। दोपहर करीब 12 बजे साधु-संतों ने बैठक कर कारसेवा की नई तारीख पर मंथन किया।

दरअसल, 4 जुलाई को चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए 9 अगस्त को कारसेवा का ऐलान किया था।

उधर, कारसेवा के आह्वान के बाद शाही ईदगाह मस्जिद की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। जलाभिषेक के लिए मस्जिद परिसर में जा रहीं अखिल भारत हिंदू महासभा की आगरा जिला अध्यक्ष मीरा ठाकुर सहित चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि कांवड़ यात्रा और सावन महीने को देखते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर होने वाली कारसेवा की तारीख को आगे बढ़ाई गई है। जब तक सावन चल रहा है और कांवड़ यात्री यात्रा कर रहे हैं, तब तक ऐसा कोई काम नहीं किया जाएगा, जिससे माहौल खराब हो या कोई बड़ी समस्या खड़ी हो।

कारसेवा रद्द नहीं हुई है और न ही संगठन पीछे हटा है। अखाड़ा परिषद के फैसले के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया है। सभी संत अखाड़ा परिषद के अधीन काम करते हैं और वहीं से उन्हें निर्देश मिलते हैं। परिषद ने फैसला लिया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि जाने का कारसेवा कार्यक्रम अभी स्थगित रखा जाए।

अब 6 दिसंबर को श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा

चित्रगुप्त पीठ में रविवार को ब्रज क्षेत्र के साधु-संतों की बैठक पीठाधीश्वर सच्चिदानंद महाराज की अध्यक्षता में हुई। बैठक के बाद संत अधिकारी महाराज ने बताया कि आज की बैठक का मुख्य उद्देश्य भगवान योगेश्वर कृष्ण का भव्य और दिव्य मंदिर बनाना और उसमें भगवान को विराजमान कराना था। बैठक में तय किया गया है कि 6 दिसंबर, रविवार से कारसेवा शुरू की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कारसेवा का मकसद किसी को मारना, किसी का विरोध करना या तोड़फोड़ करना नहीं है। वेद हमें अहिंसा का रास्ता दिखाते हैं और हम हिंसा का रास्ता कभी नहीं अपनाएंगे। यह सेवा भव्य और दिव्य तरीके से अहिंसा के रास्ते पर की जाएगी।

अधिकारी महाराज ने कहा कि राम मंदिर का काम शुरू होने से करीब 30 साल पहले ही यह काम शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन राजनीति के कारण अब तक यह पूरा नहीं हो पाया। उन्होंने कहा, “देर आए, दुरुस्त आए।” अब उन्हें भरोसा है कि भगवान योगेश्वर कृष्ण के आशीर्वाद से 13 अखाड़ों, अखाड़ा परिषदों और अलग-अलग संस्थाओं के साधु-संत एकजुट होकर कारसेवा करेंगे।

4 जुलाई को किया था कारसेवा का ऐलान

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 4 जुलाई को “एक धक्का और दो” का नारा देते हुए 9 अगस्त को कारसेवा का ऐलान किया था। इसके समर्थन में उन्होंने 12 जुलाई को हरिद्वार के वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से भी मुलाकात की थी।

उन्होंने कहा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में न्यायालय समेत कई स्तरों पर प्रयास किए गए, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसलिए कारसेवा का फैसला लिया गया। कारसेवा के ऐलान के बाद पुलिस ने स्वामी सच्चिदानंद महाराज समेत ब्रज के कई संतों, साध्वियों और धर्माचार्यों को नोटिस जारी किए थे।

न्यायालय में केस को उलझाने का आरोप

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने आरोप लगाया कि न्यायालय में मुस्लिम पक्ष केस को उलझा रहा है। उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 (Places of Worship Act) का हवाला देकर सुनवाई में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस मामले की रोजाना सुनवाई की मांग की।

उनका दावा है कि 1968 के समझौते का हवाला दिया जा रहा है, जबकि जिन लोगों के साथ यह समझौता हुआ था, वे श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ उलझाया जा रहा है और इसी वजह से कारसेवा का ऐलान करना पड़ा।

सुलह हुई तो करेंगे स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विधिक सेवा प्राधिकरण में चल रही सुलह वार्ता को लेकर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि अगर सुलह होती है तो वे इसका स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा- हम उनका स्वागत करेंगे, उन्हें माला पहनाएंगे। जहां उनका स्थान बनेगा, वहां जाकर हम भी एक ईंट लगाएंगे। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष से श्रीकृष्ण जन्मस्थान छोड़ने की अपील की।

राजस्थान से पहुंची गुलाबी पत्थरों की पहली खेप

श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान के बंशीपुर गांव से गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार को चित्रगुप्त पीठ आश्रम पहुंची थी। रविवार सुबह इन शिलाओं का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन शुरू हुआ। आश्रम में हवन-यज्ञ भी किया जा रहा है।

स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि इन पत्थरों को ओडिशा के कारीगर तराशेंगे। इसके बाद इनका इस्तेमाल मंदिर निर्माण में किया जाएगा। पत्थरों पर ब्रज संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनकी बाल लीलाओं तक के प्रसंग उकेरे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए 50 हजार घन मीटर पत्थर का ऑर्डर दिया गया है। पहली खेप में 350 घन मीटर पत्थर पहुंच चुका है। आगे भी चरणबद्ध तरीके से पत्थरों की खेप पहुंचती रहेगी।

वृंदावन-राधाकुंड रोड पर बना है आश्रम

स्वामी सच्चिदानंद महाराज का चित्रगुप्त पीठ आश्रम वृंदावन-राधाकुंड रोड पर स्थित है। यह वृंदावन से करीब 20 किलोमीटर दूर जुलहैंडी गांव से कोन्हाई गांव जाने वाले रास्ते पर करीब एक किलोमीटर अंदर बना है। करीब 6 बीघा में बने आश्रम में दो गेट हैं। पहले गेट से अंदर जाने पर पूजा स्थल, संत का कमरा, रसोई और अन्य व्यवस्थाएं हैं।