फुकेत-दिल्ली फ्लाइट हादसा, पायलट ने 4 सेकेंड तक कंट्रोल खोया:हाइड्रोलिक सिस्टम बंद होने से विमान 300 फीट नीचे आ गया था, जांच में खुलासा

एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के करीब 300 फीट नीचे आने की घटना में नया खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में एयरबस की शुरुआती ब्लैक बॉक्स जांच के मुताबिक, विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ फेल हो गए थे। इस वजह से 4 सेकंड तक विमान पायलट के कंट्रोल से बाहर हो गया था।

हाइड्रोलिक सिस्टम विमान को चलाने में मदद करते हैं। जांच के मुताबिक, इसी दौरान फ्लाइट का ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया और विमान का कंट्रोल बिगड़ गया था।

इसके बाद विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया। इस दौरान यात्रियों और केबिन क्रू को झटके लगे थे। कई लोग विमान की छत से जा टकराए। 24 लोग पैसेंजर घायल हो गए। फ्लाइट में 137 पैसेंजर और 8 क्रू मेंबर सवार थे।

कुछ सेकंड बाद तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा काम करने लगे। इसके बाद विमान को कंट्रोल में लिया गया और फ्लाइट ने दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग की।

4 सेकेंड में क्या हुआ, एयरबस की रिपोर्ट से सिलसिलेवार समझें

1. तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेलः ग्रीन, ब्लू और यलो यानी तीनों सिस्टम में एक साथ खराबी आई। इससे विमान के कंट्रोल सिस्टम फेल हो गया।

2. एलिवेटर-एलेरॉन ने कमांड नहीं मानीः पायलट के इनपुट के बावजूद एलिवेटर और एलेरॉन ने रिस्पॉन्स नहीं किया। स्पॉइलर भी काम नहीं कर रहे थे।

3. ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हुआः फ्लाइट का ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया। कॉकपिट में स्टॉल की चेतावनी मिलने के बाद को-पायलट ने विमान की नोज नीचे करने के लिए कंट्रोल स्टिक आगे किया।

4. कंट्रोल इनपुट का असर नहीं हुआः हाइड्रोलिक पावर नहीं होने के कारण को-पायलट के कंट्रोल स्टिक आगे करने पर भी विमान की नोज तुरंत नीचे नहीं गई।

5. विमान तेजी से नीचे आया: तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा काम करने लगे तो विमान की नोज तेजी से नीचे गई। यात्रियों और क्रू को जोरदार झटका लगा।

6. विमान फिर कंट्रोल में आयाः सिस्टम के एक्टिव होने के बाद पायलट विमान को कंट्रोल में ले सके और फ्लाइट ने सुरक्षित लैंडिंग की।

एयरबस जांच में मदद क्यों कर रहा है एयरबस इस जांच में इसलिए शामिल है क्योंकि विमान उसी कंपनी ने बनाया है। भारत की जांच एजेंसी AAIB मामले की जांच कर रही है। एयरबस विमान के तकनीकी सिस्टम और ब्लैक बॉक्स के डेटा को समझने में मदद कर रहा है। शुरुआती जांच में एयरबस ने हाइड्रोलिक सिस्टम के प्रेशर सेंसर में खराबी की आशंका जताई है, लेकिन इसकी पक्की वजह अभी सामने नहीं आई है।

हाइड्रोलिक सिस्टम क्या होता है?

इसे विमान का पावर सिस्टम समझिए। पायलट जब विमान को ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं करना चाहता है, तो वह कंट्रोल चलाता है। लेकिन पायलट के हाथ से लगाया गया बल इतना नहीं होता कि विमान के बड़े हिस्सों को सीधे हिला सके। यहां हाइड्रोलिक सिस्टम काम आता है।

  • पायलट कंट्रोल स्टिक या पैडल चलाता है।
  • हाइड्रोलिक सिस्टम पायलट के इस छोटे से कमांड को बहुत ज्यादा ताकत में बदलता है।
  • इस ताकत से विमान के एलिवेटर, एलेरॉन और दूसरे कंट्रोल हिस्से हिलते हैं।
  • एलिवेटर विमान को ऊपर-नीचे करने में मदद करता है।
  • एलेरॉन विमान को दाएं-बाएं झुकाने में मदद करता है।

आसान उदाहरण से समझें: जैसे कार में ब्रेक लगाने के लिए पैर की ताकत को ब्रेक सिस्टम कई गुना बढ़ाकर पहियों तक पहुंचाता है, वैसे ही विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम पायलट के छोटे से कमांड को बड़ी ताकत में बदलकर विमान के कंट्रोल हिस्सों तक पहुंचाता है।

अगर हाइड्रोलिक सिस्टम काम न करे: तो पायलट का कमांड विमान के इन हिस्सों को सही तरीके से हिला नहीं पाएगा। इससे विमान को ऊपर-नीचे करना या दिशा बदलना मुश्किल हो सकता है।

एक पायलट का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आया था

जांच में सामने आया था कि फ्लाइट का एक पायलट नशे में था। पायलट (कैप्टन) के दो ड्रग्स टेस्ट हुए हैं। दोनों टेस्ट पॉजिटिव थे। दूसरे में गांजा पीने की पुष्टि हुई थी। फ्लाइट के पैसेंजर ने आरोप लगाया था कि पायलट नशे में था।

इसके बाद एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के सभी पायलटों की अब रोज जांच होगी कि उन्होंने प्रतिबंधित दवाओं या नशीले पदार्थों का नशा तो नहीं किया है।

न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। यह टेस्ट आज से अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों एयरलाइंस में 5 हजार से ज्यादा पायलट हैं।

एयरलाइंस ने कहा- भरोसा जीतने के लिए कदम

दोनों एयरलाइंस ने पायलटों से कहा है कि मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित सभी नशीले पदार्थों और दवाओं की जांच की जाएगी।

पायलटों का टेस्ट गुरुग्राम की अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान होगा। इसके अलावा फ्लाइट के बाद ब्रीफिंग सेंटर, एयरलाइंस के ऑफिस और संबंधित बेस पर भी टेस्ट किए जाएंगे

एयरलाइंस ने कहा कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और उनका भरोसा बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

AAIB की जांच शुरू भी शुरू

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (AAIB) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। AAIB ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई नतीजा नहीं निकाला जाना चाहिए। यह पता लगाने की कोशिश करेगा…

  • विमान की ऊंचाई अचानक क्यों बदली।
  • उस समय विमान के सिस्टम किस स्थिति में थे।
  • मौसम और टर्बुलेंस की क्या भूमिका थी।
  • पायलटों ने क्या एक्शन लिया।
  • विमान के मेन्टेनेंस रिकॉर्ड में क्या जानकारी है।
  • यात्रियों और क्रू को किस तरह की चोटें आईं।
  • फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में क्या दर्ज है।