शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को लेकर सख्त संदेश दिया। उन्होंने आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने की जरूरत बताई और कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। बिश्केक में आयोजित शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और एससीओ के अन्य नेताओं की मौजूदगी भी रही।
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- ‘दोस्तों, पिछली बैठक में मैंने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया था: एस – सिक्योरिटी, सी – कनेक्टिविटी और ओ – ऑपर्च्युनिटी। अब समय है कि इन तीनों स्तंभों को दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर ठोस नतीजों तक ले जाया जाए। और इसकी पहली आवश्यकता है – शांति और सुरक्षा।
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- आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम क्रिया-प्रतिक्रिया की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। हमें आतंकवाद के फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा।
- हमें एक स्वर में बोलना होगा कि इस गंभीर विषय पर दोहरे मापदंड के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगा कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
- शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है, और आगे भी देता रहेगा।गोलमेज चर्चा में कौन-कौन से नेता रहे मौजूद?
पीएम मोदी ने यह बात बैठक में हुई गोलमेज चर्चा के दौरान कही। इस बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन शामिल हुए।वैश्विक संघर्षों के दुनिया पर असर का पीएम मोदी ने किया जिक्र
क्षेत्र के सामने मौजूद व्यापक सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आपस में तेजी से जुड़ती दुनिया में सुरक्षा का दायरा और व्यापक हो गया है। उन्होंने कहा, “आज की आपस में जुड़ी दुनिया में सुरक्षा का दायरा और भी व्यापक हो गया है। पश्चिम एशिया के संकट ने दिखाया है कि एक क्षेत्र का संघर्ष केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता… इसका असर दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है।”पीएम मोदी ने युद्ध और तनाव खत्म करने के लिए दी क्या सलाह?
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे संघर्षों की सबसे बड़ी कीमत वैश्विक दक्षिण के देशों को चुकानी पड़ती है। उन्होंने एक बार फिर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वैश्विक दक्षिण के देशों को इसकी सबसे भारी कीमत चुकानी पड़ती है। यही वजह है कि भारत लगातार कहता रहा है कि सभी तनाव और युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।”