पटना में आज धूमधाम से गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। महाराष्ट्र मंडल की ओर से इस बार भी भव्य आयोजन किया गया है। इस बार मदुरई के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है।
यहां मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा की प्रतिमा स्थापित होगी, जो साढ़े 5 फीट ऊंची है। इसे मुंबई से मंगाया गया है। वहीं, भगवान गणेश को 55 लाख रुपये के हीरा, पन्ना और माणिक जड़ित सोने का मुकुट पहनाया जाएगा। सुबह 10:30 बजे से पूजा शुरू होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन भी शामिल होंगे।
10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा गणेशोत्सव
आचार्य राकेश झा ने बताया कि चौथ आज सुबह 7:28 बजे के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होने से कई श्रद्धालु गणेश चतुर्थी भी मनाएंगे। वहीं, उदयातिथि को मानने वाले कुछ लोग 15 सितंबर को गणेश पूजा करेंगे। गणेश उत्सव का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यानि पूरे 10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा।
गणपति प्रभु की उपासना से हर काम सिद्ध, ऐश्वर्य की प्राप्ति, जीवन से सारे अवरोध तथा विघ्न-बाधाओं को दूर कर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर मंत्रोच्चार से उनकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। उन्हें पीला वस्त्र, दुर्बा, सिंदूर, मोदक, लड्डू आदि अर्पित की जाएगी।
मिट्टी से निर्मित की प्रतिमा सबसे शुभ
ज्योतिषी झा के मुताबिक मिट्टी से निर्मित प्रतिमा सबसे शुभ और उत्तम होती है। इस प्रतिमा में सभी पंच तत्वों का समावेश होता है, जिसे शास्त्रों में पूजा हेतु सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। ऐसे मिट्टी युक्त प्रतिमा में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश इन पांचो तत्वों का सार मिला होता है। इसी से हमारा शरीर भी बना है। मिट्टी की प्रतिमाएं पानी में आसानी से घुल जाती है। इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलता है।
एक महीने से पंडाल बनाने में जुटे हैं 12 कारीगर
महाराष्ट्र मंडल के सचिव संजय भोंसले ने बताया कि मुंबई से 12 कारीगर मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार करने आए थे। पंडाल के अंदर की सजावट भी मंदिर के स्वरूप के अनुरूप की गई है। वहीं, गणेश प्रतिमा को साढ़ू मिट्टी से बनाया गया है।
सबसे पहले गणपति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। उसके बाद विघ्नहर्ता की आरती की जाएगी। राज्यपाल 12:15 में आएंगे। वहीं, शाम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आएंगे। पूजा खत्म होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन और प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी।
भगवान गणेश को 501 मोदक का लगेगा भोग
उन्होंने बताया कि गणपति स्थापना के लिए महाराष्ट्र के सांगली से प्रशांत जागीरदार के नेतृत्व में पांच पंडित पटना पहुंचेंगे। इन्हीं के द्वारा विधि-विधान से 14 सितंबर को गणपति की प्राण प्रतिष्ठा कराई जाएगी। पहले दिन भगवान को 501 मोदक का भोग लगाया जाएगा।
गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र मंडल में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 16 सितंबर को दिन में बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इनमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को मंडल की ओर से पुरस्कृत किया जाएगा।
18 सितंबर की शाम हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम होगा। इसमें महिलाएं गणेशजी को हल्दी-कुमकुम अर्पित करेंगी और एक-दूसरे की मांग सजाकर पारंपरिक उत्सव मनाएंगी।
कोलकाता की लाइटिंग और नासिक का झांझ पथक रहेगा आकर्षण
इस गणेशोत्सव में कोलकाता के चंदन नगर की लाइटिंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। वहीं, बंगाल के फूलों से सजावट की जाएगी। 20 सितंबर को सुबह 11 बजे से महाप्रसाद का आयोजन किया जाएगा।
इसके बाद गणपति विसर्जन जुलूस निकलेगा। जुलूस में नासिक से आने वाली 60 सदस्यीय झांझ पथक टीम शामिल होगी। इसमें 20 लड़कियां और 40 लड़के होंगे, जो पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ करतब प्रस्तुत करेंगे। इससे विसर्जन जुलूस में उत्साह और आकर्षण बढ़ेगा।