नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों में जनता ने केवल प्रत्याशियों की हार-जीत का फैसला ही नहीं सुनाया, बल्कि राजनीतिक दलों के सामने अपने कड़े तेवर भी साफ कर दिए हैं। 80 में से लगभग 65 वार्डों के परिणाम के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि 3,900 से अधिक मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को योग्य न मानते हुए नोटा (नन ऑफ द एबव) का बटन दबाया है।
वार्ड 42 में सबसे ज्यादा 106, वार्ड 35 में 103 और वार्ड 21 में 101 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना है। वार्ड 72 में 98, वार्ड 40 में 92, वार्ड 36 व 79 में 90-90 और वार्ड 50 में 87 मतदाताओं ने सभी उम्मीदवारों को नकार दिया। सबसे कम नोटा का प्रयोग वार्ड 31 में देखा गया, जहां केवल 13 मतदाताओं ने इसे चुना। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कई वार्डों में प्रत्याशियों के प्रति स्थानीय असंतोष और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की अनदेखी के चलते वोटर्स ने नोटा की राह चुनी।
वार्ड वार नोटा की स्थिति
हाई-नोटा जोन (80 से ऊपर वोट) : वार्ड 72 (98), वार्ड 40 (92), वार्ड 36 व 79 (90-90), वार्ड 50 (87), वार्ड 69 (85), वार्ड 45 (80) और वार्ड 48 (86) में मतदाताओं का असंतोष छलका।
लो-नोटा जोन (30 से कम वोट) : वार्ड 31 में सबसे कम 13 नोटा वोट पड़े। वार्ड 26 (20), वार्ड 60 (23), वार्ड 10 (26), वार्ड 02, 09 व 32 (29-29) में भी नोटा का ग्राफ कम रहा।
शतकीय प्रहार : वार्ड 42 (106), वार्ड 35 (103) और वार्ड 21 (101) ऐसे तीन प्रमुख क्षेत्र रहे जहां नोटा के वोट 100 के पार पहुंचे।
मायने क्या
औसत प्रति वार्ड 60 से अधिक वोटर्स का नोटा चुनना इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दलों को अब टिकट वितरण व स्थानीय मुद्दों को अधिक गंभीरता से लेना होगा।