रेवाड़ी में भ्रूण लिंग जांच पर रोक के लिए स्वास्थ्य विभाग की लगातार कार्रवाई के बावजूद इसका अवैध नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। सामने आए मामलों से संकेत मिलता है कि इस धंधे में शामिल लोग एक जिले तक सीमित रहने के बजाय दूसरे जिलों और राज्यों में मौजूद संपर्कों के जरिए अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
कार्रवाई का दबाव बढ़ने पर जांच कराने वाले गिरोह स्थान बदल लेते हैं और डिकाय मरीज को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर जांच कराने का प्रयास करते हैं। पिछले पांच वर्षों में रेवाड़ी में भ्रूण लिंग जांच से जुड़े पांच बड़े मामले सामने आए हैं। इनमें हर बार नेटवर्क में रेवाड़ी के बाहर के लोगों की भूमिका सामने आई।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में अब तक अलग-अलग मामलों में 10 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे साफ है कि यह गतिविधि किसी एक व्यक्ति या एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय नेटवर्क के जरिए संचालित होती रही है। हाल ही में सोनीपत और पानीपत की संयुक्त टीम की कार्रवाई में भी यही पैटर्न सामने आया।
अल्ट्रासाउंड सेंटर से दो दलालों को पकड़ा
टीम ने रेवाड़ी के मॉडल टाउन स्थित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर से दो दलालों को पकड़ा। दोनों पटौदी क्षेत्र के रहने वाले बताए गए। जांच के लिए सोनीपत की डिकाय मरीज से संपर्क करने के बाद उसे रेवाड़ी लाने की तैयारी की गई थी। सौदा 65 हजार रुपए में तय होने की बात सामने आई।
5 साल में सामने आए पांच नेटवर्क
वर्ष 2023: 60 हजार में जांच का सौदा
वर्ष 23 फरवरी 2023 को झज्जर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रेवाड़ी में कार्रवाई कर दो लोगों को पकड़ा था। दोनों पर 60 हजार रुपये में भ्रूण लिंग जांच कराने का सौदा तय करने का आरोप था। डिकाय मरीज के जरिए बावल निवासी वेदप्रकाश और तुलाराम विहार निवासी पवन से संपर्क किया गया था।
दोनों लैब टेक्नीशियन बताए गए और जांच के लिए कानोड गेट स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र जाने की तैयारी में थे।
वर्ष 2022: गुरुग्राम से राजस्थान तक ले गए
24 फरवरी 2022 को रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग ने दो लोगों को भ्रूण लिंग जांच कराने के आरोप में पकड़ा था। इस मामले में नेटवर्क का संपर्क गुरुग्राम से बताया गया। आरोपित पहले डिकाय मरीज को गुरुग्राम ले गए और वहां से धारूहेड़ा होते हुए राजस्थान के टपूकड़ा पहुंचाया। 45 हजार रुपये का सौदा होने के बाद अल्ट्रासाउंड केंद्र पहुंचते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्रवाई कर दी।
वर्ष 2020: दूसरे नेटवर्क तक पहुंचा मामला
एक अक्टूबर 2020 को रेवाड़ी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के लिए टीम ने रेवाड़ी के एक युवक के जरिए नेटवर्क तक पहुंच बनाई। सौदा तय होने के बाद दूसरे नेटवर्क के लोगों से संपर्क कराया गया। डिकाय मरीज को पहले गाजियाबाद बुलाया गया और इसके बाद दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया। अंत में उसे गुरुग्राम लाकर वैन में अल्ट्रासाउंड कराने का प्रयास किया गया। इसी दौरान टीम ने छापा मारकर चार लोगों को पकड़ लिया। आरोपितों में दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम के रहने वाले लोग भी शामिल थे।
वर्ष 2019: खेत में बने मकान को बनाया ठिकाना
28 मार्च 2019 को गुरुग्राम की टीम ने रेवाड़ी के खोल क्षेत्र में चल रहे इंटरस्टेट भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इस कार्रवाई में आठ लोग पकड़े गए थे। भ्रूण जांचने का काम गांव ढाणी कोलाना के खेत में ट्यूबवेल पर बने मकान में चलता था। गिरोह में शामिल दूसरे जिले के लोग अपने-अपने क्षेत्र से पेशेंट को यहां लाकर अल्ट्रासाउंड करते थे।
सोनीपत-पानीपत की टीम ने की कार्रवाई
रविवार को पानीपत-सोनीपत की संयुक्त टीम ने रेवाड़ी के माडल टाउन स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारकर दो दलालों को पकड़ा था। दोनों आरोपितों रामनिवास और राहुल गुरुग्राम के पटौदी के रहने वाले हैं। राहुल का सोनीपत एक गर्भवती से संपर्क हुआ था। उसने रेवाड़ी में नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति से संपर्क कर 65 हजार रुपये में सौदा कर लिया।
इसके बाद जब दोनों डिकाय पेशेंट को अल्ट्रासाउंड पर लेकर पहुंचे तो टीम ने दबोच लिया। पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. विद्या सागर ने बताया कि गिरोह में शामिल अलग-अलग जिलों और प्रदेश के लोग पकड़े जाते रहे हैं। इनका आपसी नेटवर्क होता है। हमारी टीमें हर समय इस प्रकार के मामलों को लेकर अलर्ट रहती है। सूचना मिलने पर हम भी दूसरे जिलों में जाकर छापेमारी करते हैं।