साथ आए किरण चौधरी व रणदीप सुरजेवाला, हरियाणा कांग्रेस में बन सकते हैं नए समीकरण

हरियाणा में लंबे समय से कई गुटों में बंटी कांग्रेस में अब नए सियासी समीकरण बनते दिख रहे हैं। दिल्ली दरबार में गहरी पैठ रखने वाले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व मंत्री एवं विधायक किरण चौधरी के बीच बढ़ती नजदीकियां कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में कोई बड़ा गुल खिला सकती हैं। पंचकूला में मंगलवार को प्रदेश अध्यक्षा कुमारी सैलजा और हरियाणा प्रभारी विवेक बंसल के साथ खड़े हुए किरण और सुरजेवाला बुधवार को फिर एक साथ हरियाणा कांग्रेस के मुख्यालय पहुंचे और भर्तियों में गोलमाल को लेकर गंभीर आरोप जड़े।

हरियाणा लोकसेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की भर्तियों में गोलमाल को लेकर रणदीप सिंह सुरजेवाला हमलावर हैं। वह लगातार दस्तावेजों के साथ पत्रकारों के बीच जाकर सरकार की घेराबंदी कर रहे हैं। वहीं, किरण चौधरी ने भी घोटाले को लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में काम रोको प्रस्ताव लगाया हुआ है। अभी तक अलग-अलग मंचों से यह मुद्दा उठाते रहे सुरजेवाला और किरण चौधरी ने पहली बार संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की जिसके बाद कांग्रेस की आंतरिक राजनीति गरमा गई है।

दोनों दिग्गजों के एक मंच पर आने को पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग उठा रहे 23 नेताओं के समूह (जी-23) में शामिल हुड्डा जहां शक्ति प्रदर्शन का कोई मौका नहीं चूकते, वहीं किरण और सुरजेवाला की दिल्ली दरबार से नजदीकियां किसी से छिपी नहीं। ऐसे में हुड्डा सरकार में मंत्री रहे इन दोनों नेताओं का एकसाथ आना कई चर्चाओं काे हवा दे रहा है। हालांकि सुरजेवाला से इस संबंध में सवाल दागा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए। सभी कांग्रेस का हिस्सा हैं और अपने-अपने तरीके से मुद्दों को उठा रहे हैं।

बीते रोज पंचकूला में हरियाणा लोक सेवा आयोग के घेराव में सैलजा और बंसल के साथ ही 14 विधायकों और अन्य कई बड़े नेताओं ने भागीदारी की। इससे साबित होता है कि हम सब एक हैं। हम सभी का लक्ष्य नौकरी की दलाली करने वालों पर शिकंजा कसना है।

सुरजेवाला ने आरोप जड़ा कि भर्ती घोटालों में शामिल सफेदपोश लोगों का राज खुलने के डर से अटैची कांड को दबाने की कोशिश की जा रही है। एचपीएससी के उपसचिव रहे अनिल नागर की बर्खास्तगी भी जांच को ठंडे बस्ते में डालने का एक और कदम है। जब आयोग ने खुद माना है कि भर्तियों का सारा रिकार्ड अनिल नागर की कस्टडी में था जिससे रिकार्ड की विश्वसनीयता नहीं रही तो फिर पिछले सात साल में हुईं तमाम भर्तियां रद क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार आने पर सभी 32 पेपर लीक घोटालों और अटैची कांड की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि सूत्रों के मुताबिक आरोपित ने एक वीडियो विजिलेंस को दिया है, जिसमें दो बड़े लोग ओएमआर सीट भरवाते दिखते हैं। मुख्यमंत्री सारी स्थिति को स्पष्ट करें।

किरण चौधरी ने कहा कि भर्तियों में गोलमाल को लेकर उन्होंने विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव दिया है। उन्होंने आरोप जड़ा कि रजिस्टरी घोटाला हो या शराब घोटाला या फिर अन्य घोटाले, तमाम मामलों में लीपापोती की जा रही है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। हैरानी की बात है कि मुख्य आरोपित अनिल नागर की बजाय जसबीर सिंह भल्लारा व उसके कर्मचारियों को बनाया गया है। दस्तावेजों की बरामदगी के लिए न आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी की गई और न उन्हें रिमांड पर लिया गया। इससे साफ है कि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है। एचसीएस, डेंटल सर्जन, स्टाफ नर्स, वीएलडीए और एएनएम सहित अन्य पदों पर हुई भर्तियों को तुरंत रद किया जाना चाहिए।