एसएसपी गाजियाबाद पवन कुमार निलंबित, ड्यूटी में लापरवाही व अपराध नियंत्रण में विफलता पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टालरेंस की नीति के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कड़ा कदम उठाया। सोनभद्र के जिलाधिकारी टीके शिबू के निलंबन के कुछ देर बाद अपराध नियंत्रण में नाकाम एसएसपी गाजियाबाद पवन कुमार को निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल आइजी रेंज मेरठ प्रवीण कुमार गाजियाबाद का भी सम्भालेंगे।

गाजियाबाद में लगातार हो रही लूट की संगीन घटनाएं पवन कुमार पर भारी पड़ीं। 2009 बैच के आइपीएस अधिकारी पवन कुमार को अगस्त, 2021 में एसएसपी गाजियाबाद के पद पर नियुक्त किया गया था। पवन कुमार पर ड्यूटी में लापरवाही और अपराध को नियंत्रित करने में विफलता के लिए निलंबित किया गया है। वह गाजियाबाद से पहले मुरादाबाद में एसएसपी थे।

गाजियाबाद में 28 मार्च को बाइक सवार बदमाशों ने पेट्रोलपंप कर्मियों से 25 लाख रुपये लूट लिये थे। विरोध पर बदमाश फायरिंग करते हुए भाग निकले थे। इस वारदात को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कानून-व्यवस्था पर सवाल भी उठाया था।

इससे पूर्व 23 मार्च को गाजियाबाद के इंदिरापुरम कोतवाली क्षेत्र में बदमाशों ने निजी कंपनी में घुसकर 10 लाख रुपये लूट लिये थे। इसी दिन शहर में बदमाशों ने असलहे के जोर पर एक महिला के जेवर भी लूटे थे। लगातार हो रही संगीन घटनाओं पर एसएसपी अंकुश लगाने में नाकाम रहे। 10 मार्च को मतगणना के दिन पवन कुमार का कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं से विवाद भी हुआ था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही व अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण न कर पाने के चलते पवन कुमार के निलंबन की कार्रवाई की गई है। नई सरकार के गठन के बाद किसी आइपीएस अधिकारी के विरुद्ध की गई यह पहली कार्रवाई है।

सीएम योगी के पिछले शासनकाल में भ्रष्टाचार व शासकीय दायित्वों में लापरवाही के चलते 17 आइपीएस अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई हुई थी। जिनमें महोबा में क्रशर कारोबारी की आत्महत्या के मामले में तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार निलंबन की कार्रवाई के बाद भाग निकले थे। बाद में उन्हें कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया था और वह अब तक फरार हैं।