-पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत के युवाओं को भारत में आगे आने वाले बड़े अवसरों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। इस नए दशक में, हम विश्व स्तर पर ब्रांड इंडिया को एक नई छवि देंगे। देश के नए क्षेत्रों में नए अनुभव लेकर निकल रहे मैंनेजमेंट एक्सपर्ट भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इस साल भारत ने कोविड संकट के बावजूद पिछले सालों की तुलना में ज्यादा यूनिकॉर्न दिए हैं।’ -पीएम मोदी ने कहा, बीते दशकों में एक ट्रेंड देश ने देखा, बाहर बने मल्टी नेशनल बड़ी संख्या में आए और इसी धरती में आगे भी बढ़े। ये दशक और ये सदी भारत में नए-नए मल्टीनेशसल्स के निर्माण का है। -पीएम- आज IIM कैंपस के शिलान्यास के साथ ही ओडिशा के युवा सामर्थ्य को मजबूती देने वाली एक नई शिला भी रखी गई है। IIM का ये स्थायी कैंपस ओडिशा के महान संस्कृति और संसाधनों की पहचान के साथ ओड़िशा को मैंनेजमेंट जगत में नई पहचान देने वाला है। -ओडिशा में शिक्षा में तेजी से बदलाव आ रहा है। मुझे खुशी है कि हमारा राज्य शिक्षा के क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए हुए है और पूर्वी भारत के एजुकेशन हब के रूप में उभरा है: ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक पीएम ने ट्वीट किया था, ‘2 जनवरी को सुबह 11 बजे, आईआईएम-संबलपुर के स्थायी परिसर का शिलान्यास करेंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष रूप से मेरे विद्यार्थी मित्रों और स्टार्ट-अप की दुनिया में आने वाले लोगों को बुलाया जाएगा। भारत राष्ट्रीय प्रगति के लिए IIM के समृद्ध योगदान पर गर्व करता है।’ ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल और राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, धर्मेंद्र प्रधान और प्रताप चंद्र सारंगी भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। समारोह में 5,000 से अधिक आमंत्रित हिस्सा लेंगे। बयान में कहा गया है, ‘समारोह में IIM संबलपुर के अधिकारियों, उद्योग के नेताओं, शिक्षाविदों और छात्रों, पूर्व छात्रों और संकायों सहित लगभग 5000 से अधिक आमंत्रित लोग शामिल होंगे।’ PMO के अनुसार, IIM संबलपुर ‘फ्लिप क्लासरूम’ के विचार को लागू करने वाला पहला IIM होगा। फ्लिप क्लासरूम वह जगह होती है जहां बुनियादी अवधारणाओं को डिजिटल मोड में सीखा जाता है और उद्योग से लाइव परियोजनाओं के माध्यम से कक्षा में अनुभवात्मक शिक्षा होती है। IIM संबलपुर लिंग विविधता के मामले में अन्य सभी IIM से आगे रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने शुक्रवार को कहा कि सरकार और किसान संघों के साथ चार जनवरी को होने वाली अगली बैठक में सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद है। हालांकि उन्‍होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि सातवें दौर की बातचीत अंतिम होगी या यह आगे भी जारी रहेगी। केंद्रीय कृषि कृषि मंत्री (Narendra Singh Tomar) से यह पूछे जाने पर कि क्या चार जनवरी को होने वाली बैठक आखिरी होगी… उन्‍होंने (Union Agriculture Minister) कहा कि एकदम तो अभी कुछ भी नहीं कह सकता हूं। मैं भविष्यवक्ता तो नहीं हूं लेकिन मुझे उम्‍मीद है कि जो भी फैसला होगा, देश के और किसान संगठनों के भले के लिए होगा। मालूम हो कि अब तक सरकार और किसान संगठनों के बीच छह दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन किसानों प्रदर्शन खत्‍म नहीं हो पाया है… मंत्री (Union Agriculture Minister) ने कहा, ‘मुझे उम्‍मीद है कि जो भी फैसला होगा देश और किसान के हित में होगा।’

उल्‍लेखनीय है कि बीते 30 दिसंबर को हुई बैठक में पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने (decriminalisation of stubble burning) और बिजली सब्सिडी जारी रखने की दो मांगों पर सहमति बन गई है। किसान संगठनों की दो अन्‍य मांगों पर अभी बात नहीं बन पाई है। इन मांगों में तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना और एमएसपी (Minimum Support Price, MSP) खरीद प्रणाली की कानूनन गारंटी प्रदान करना जैसे मसले शामिल हैं।

दिल्‍ली से लगी सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने कहा था कि चार मुख्‍य मुद्दों में से दो पर सहमति बनने के बाद गतिरोध का 50 फीसद समाधान हो गया है। बाकी बचे मुद्दों पर चार जनवरी को चर्चा होगी। केंद्रीय कृषि मंत्री (Narendra Singh Tomar) के ताजा बयान से जाहिर है कि सरकार किसानों के साथ गतिरोध के जल्‍द खत्‍म होने को लेकर आशान्वित है।
वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी किसानों ने अपनी मुख्य मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी का कहना है कि हमारी एक ही मांग है कि कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए। किसान नेताओं ने एक अलग बयान में कहा है कि उन्होंने जो मसले उठाए हैं सरकार के साथ बैठकों में उनमें से केवल पांच फीसद पर ही चर्चा हुई है। एक अन्य किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि यदि चार जनवरी को कोई ठोस निर्णय नहीं होता तो छह जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा।