शादियों में फोटोग्राफी करती थीं फातिमा:दंगल के ऑडिशन में इतना दौड़ाया कि उल्टियां होने लगीं, आज भी लोग हीरोइन टाइप नहीं मानते

1997 में आमिर खान स्टारर इश्क से अपने करियर की शुरुआत करने वालीं फातिमा सना शेख को असल पहचान 19 साल बाद 2016 में रिलीज हुई आमिर की ही फिल्म दंगल से मिली। हालांकि, इस ब्लॉकबस्टर फिल्म से पहले और इसके बाद भी फातिमा को खूब स्ट्रगल करना पड़ा।

अपने इस स्ट्रगल की स्टोरी खुद फातिमा ने मुझसे मिलकर शेयर की। जब मैं उनसे बात करने पहुंचा तो वे एक कार्यक्रम में जाने के लिए तैयार हो रही थीं। उन्होंने मुझे हॉल में इंतजार करने के लिए कहा और अंदर से बड़े ही प्यार से पूछा.. आप आ गए ? बस दो मिनट दीजिए..ठीक दो मिनट बाद ही वो मेरे सामने खड़ी थीं और मेरी तरफ हाथ बढ़ाकर खुद को इंट्रोड्यूज करते हुए उन्होंने कहा- ‘हाय, आई एम फातिमा..’ फातिमा के बारे में मैंने पहले ही सुन रखा था कि वो बहुत ही सादी-सिंपल हैं और उनके इस जेस्चर से यह कन्फर्म भी हो गया।

बहरहाल, सारा माहौल जमाने के बाद मैंने फातिमा से कहा कि वो अपने बचपन से जुड़ी यादों से ही अपनी कहानी की शुरुआत करें। बस, फिर क्या था? स्टोरी टेलिंग में एक्सपर्ट फातिमा ने अपनी स्ट्रगल स्टोरी शेयर करना शुरू की।

कमालिस्तान स्टूडियो के बगल में था घर, सेलेब्स के साथ खिंचवाते थे फोटोज
मेरे मम्मी-पापा मुंबई में ही रहते थे और मैं भी वहीं पैदा हुई। हमारा घर कमालिस्तान स्टूडियो के बगल में था। जैसे बहुत सारे लोग होते हैं जो आस-पास शूटिंग चल रही हो तो देखने पहुंच जाते हैं, हम भी उन्हीं में से थे। तो आज तक हमारे पास बचपन की वो फोटोज हैं जो हमने धर्मेंद्र और संजय दत्त के साथ खिंचवाए थे।

पहली बार ‘इश्क’ में फेस किया कैमरा
एक दिन वहां पर किसी ने मेरी मम्मी को बोला कि आप लोग भी अपने बच्चों को भेज दिया करो ना शूटिंग के लिए। उन्हें एक्टिंग में डाल दो। इसके बाद मेरी मम्मी मुझे ऑडिशन के लिए लेकर जाने लगीं। सबसे पहली बार मैंने आमिर खान और अजय देवगन स्टारर फिल्म ‘इश्क’ में कैमरा फेस किया। उसमें मेरा एक छोटा सा सीन था।

‘चाची 420’ के दौरान कमल जी ने बहुत ख्याल रखा
ऐसे ही ऑडिशन देते-देते एक दिन ‘चाची 420’ मिल गई। हालांकि, मुझे इस फिल्म की कोई खास याददाश्त नहीं है, क्योंकि तब मैं बहुत छोटी थी। बस इतना याद है कि बहुत मजा आया था, अच्छा खाना खाया था, बड़े होटल में रुके थे और कमल हासन जी ने मेरा बहुत ख्याल रखा था।

अब जब सोचती हूं तो लगता है कि वाह यार इतनी कम उम्र में ही मैंने कमल हासन जी और अमरीश पुरी जी के साथ काम कर लिया था, जो शायद अब करने का मौका ना मिले। और अब तो हम अमरीश पुरी जी को खो भी चुके हैं।

कमजोर फाइनेंशियल कंडीशन के चलते नहीं कर पाई फाइन आर्ट्स कोर्स
खैर, इसके बाद मैंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट कुछ और फिल्में कीं जिसमें सुनील शेट्‌टी के साथ ‘बड़े दिलवाला’ और शाहरुख खान के साथ ‘वन 2 का 4’ जैसी फिल्में शामिल थीं। पर फिर एक वक्त के बाद लगा कि नहीं अब फिल्मों में काम नहीं करना.. थोड़ा पढ़ाई पर ध्यान देना भी जरूरी है।

इसके बाद एक लंबा ब्रेक लिया। इस दौरान कॉलेज गई और मेरा इंट्रेस्ट फाइन आर्ट्स में था तो सोचा उसके लिए अप्लाय करती हूं पर घर की फाइनेंशियल कंडीशन उतनी अच्छी नहीं थी कि उसे करियर के तौर पर चूज का सकूं। यहां तक कि उसे सीखने का भी पैसा नहीं था।

रिजेक्शन की इतनी आदत हो गई कि कुछ फील ही नहीं होता था
इस दौरान मैंने कई ऑडिशन दिए और रिजेक्शन होती रही। कुछ वक्त बाद मुझे रिजेक्शन की इतनी आदत हो गई कि कुछ फील ही नहीं होता था। मुझे लगा कि कोई बात नहीं हाेता रहेगा.. चलता रहेगा.. पर मैंने कभी गिव अप नहीं किया; क्योंकि उम्मीद थी कि एक दिन कुछ बहुत अच्छा होगा.. हां ये उम्मीद नहीं थी कि ‘दंगल’ जैसा बड़ा कुछ मिलेगा, पर पता था कि कुछ ना कुछ मिलेगा। इस दौरान साइड में काम करना भी जरूरी था, क्योंकि सिर्फ ऑडिशन से पैसे नहीं आते.. काम से पैसे आते हैं, तो वो चलता रहा।