बिजनेसमैन ‘पेटपूजा’ के जरिए चोरी कर रहे करोड़ों का टैक्स:होटल-रेस्टोरेंट वालों ने बना रखे हैं अकाउंट, इनकम टैक्स अधिकारी भी चौंके

अजमेर में आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने शहर के पॉपुलर रेस्टोरेंट पर छापा मारा तो वे चौंक गए। टैक्स के चोरी के लिए मैंगो मसाला रेस्टारेंट एक एप के जरिए अपनी असली इनकम छुपा रहा था।

इस एप का इस्तेमाल अजमेर के कई होटल और रेस्टोरेंट करते हैं। अधिकारियों के अनुसार पेटपूजा एप का यूज तेजी से बढ़ा है।

उन्हें शक है कि राजस्थान में और भी कई बिजनेस इसको यूज कर रहे हैं। इसके इस्तेमाल से करोड़ों के टैक्स छुपाने की भी आशंका है।

15 करोड़ के टर्नओवर को छुपाया

दरअसल, इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने रविवार को अजमेर के इंडिया मोटर सर्किल चौराहे पर मैंगो मसाला रेस्टोरेंट पर छापेमारी की थी। सोमवार को भी सर्च जारी रही।

दो दिन की जांच में अब तक 15 करोड़ के टर्नओवर को छुपाने की जानकारी मिली है। विंग के डिप्टी डायरेक्टर ललितेश मीणा ने बताया कि रेस्तरां क्लाउड आधारित ‘पेटपूजा’ ऐप का इस्तेमाल कर अपनी वास्तविक आय छिपा रहा था।

शहर के दूसरे रेस्टोरेंट भी कर रहे है इस्तेमाल

डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि शहर के कई और रेस्टोरेंट और चाय- कॉफी हाउस भी आय छिपाने के लिए इसी ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसका डेटा आयकर विभाग के पास मौजूद है। मीणा ने बताया कि इससे पहले उदयपुर के 2, कोटा के 1, श्रीगंगानगर के 1 और जयपुर के 1 प्रमुख रेस्तरां पर भी कार्रवाई कर चुके हैं।

ऐप में रखा जा रहा दो तरह का रिकॉर्ड

सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट शैफाली सिंह के अनुसार पेटपूजा ऐप में दो तरह की बिक्री का रिकॉर्ड रखने की सुविधा होती है-एक औपचारिक सेल और दूसरी काली कमाई की सेल।

रेस्टोरेंट ज्यादातर उन बिलों को औपचारिक रिकॉर्ड से अलग रखते हैं जिनका भुगतान नकद में किया जाता है। इस फीचर का उपयोग करने पर उस बिक्री का रिकॉर्ड कंपनी के अंतिम लेजर में शामिल नहीं होता।

विशेष पासवर्ड से ही रिकवर हो सकती है जानकारी

छुपाए गए रिकॉर्ड को केवल एक विशेष पासवर्ड के जरिए ही निकाला जा सकता है। यह पासवर्ड प्लेटफॉर्म का लाइसेंस खरीदने वाले रेस्टोरेंट संचालक को दिया जाता है।

इसके लिए केवल एक लैपटॉप और इंटरनेट की जरूरत होती है। जिस रेस्टोरेंट में सर्वे की कार्रवाई की गई है, वहां भी इसी ऐप के उपयोग की जानकारी आयकर विभाग को मिली थी।

नोटिस भेजेगा विभाग

आयकर विभाग के अनुसार बड़े रेस्तरां और रेस्तरां-बार के साथ छोटे कैफे, प्रमुख टी-स्टॉल आदि भी ऐसे ऐप का इस्तेमाल कर टैक्स चोरी कर रहे हैं। पेटपूजा ऐप का उपयोग करने वाले व्यवसायियों का डेटा विभाग के पास है।

आयकर रिटर्न से उनकी बिक्री का क्रॉस चेक और वेरिफिकेशन किया जाएगा। विभाग ऐसे कारोबारियों को नोटिस भेजने की तैयारी में है।

कॉलेज के दोस्तों ने बनाई थी कंपनी

पेटपूजा की नींव साल 2011 में गुजरात के अहमदाबाद में रखी गई थी। इसके मुख्य मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर को कॉलेज के दोस्तों पार्थिव पटेल और अपूर्व पटेल ने बनाया था।

पार्थिव अब इसके सीईओ हैं जबकि अपूर्व पटेल सीएसओ हैं। दोनों ने महसूस किया कि भारतीय रेस्टोरेंट मालिक बिलिंग, चोरी और कच्चे माल की बर्बादी (Operational Loss) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

इसी समस्या का समाधान के लिए उन्होंने पेटपूजा की शुरुआत की थी।

137 करोड़ की फंडिंग जुटाई है

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार आज पेटपूजा में 1,300 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। हाल ही में इसने सीरीज सी फंडिंग के तहत ₹137 करोड़ जुटाए हैं।

कंपनी का दावा है उसके एक लाख से ज्यादा कस्‍टमर्स हैं। भारत, यूएई और साउथ अफ्रीका में बिजनेसमैन इस एप का इस्तेमाल करते हैं। करीब 60 लाख से ज्‍यादा बिल रोज पेटपूजा सॉफ्टवेयर से प्रोसेस होते हैं।