कर्नाटक सरकार ने 9वीं से 12वीं के छात्रों के डिजिटल इस्तेमाल को लेकर मंगलवार को ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें सिफारिश की गई है कि पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम रोजाना 1 घंटे तय किया जाए। शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने की भी सिफारिश की गई है।
ड्राफ्ट में कहा गया है कि छात्रों को सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रखा जाए। मोबाइल के लिए ‘चाइल्ड प्लान’ का सुझाव दिया गया है, जिसमें ऑडियो-ओनली विकल्प और तय समय के बाद इंटरनेट बंद करने की व्यवस्था होगी। उम्र के हिसाब से डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम डेवलप करने की भी बात कही गई है।
सरकार के मुताबिक, करीब 25% किशोरों में इंटरनेट की लत है, जिससे नींद की कमी, चिंता और ध्यान भटकने जैसी समस्याएं हो रही हैं। इसी को देखते हुए यह पॉलिसी लाई गई है।
डिजिटल यूज पर नई पॉलिसी के चार बड़ी बातें…
- स्कूलों में बदलाव होंगे- डिजिटल वेल-बीइंग और ऑनलाइन सुरक्षा पढ़ाई का हिस्सा बनेंगी। साइबर बुलिंग, प्राइवेसी और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार पढ़ाया जाएगा। हर स्कूल डिजिटल उपयोग नीति लागू करेगा। डिजिटल डिटॉक्स डे और टेक-फ्री पीरियड होंगे। छात्रों से संपर्क के लिए वॉट्सऐप की जगह डायरी अपनाई जाएगी।
- मेंटल हेल्थ पर फोकस होगा- स्कूलों में काउंसलिंग मजबूत होगी, शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे डिजिटल लत के संकेत पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर बच्चों को विशेषज्ञों तक पहुंचाया जा सके।
- शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका तय होगी- शिक्षक बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखेंगे और मार्गदर्शन देंगे। अभिभावक घर में स्क्रीन टाइम तय करेंगे, नो-फोन जोन बनाएंगे और खुद उदाहरण पेश करेंगे।
- AI के यूज पर गाइडलाइन बनेगी- स्कूल AI के उपयोग पर नियम तय करेंगे, होमवर्क में इसके इस्तेमाल को नियंत्रित करेंगे और नकल रोकने के लिए सिस्टम विकसित करेंगे।
कई संस्थानों के साथ मिलकर तैयार ड्राफ्ट
यह पॉलिसी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कर्नाटक स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी, निमहांस और शिक्षा विभाग ने मिलकर तैयार किया है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 6 मार्च को जारी बजट में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती के ऐलान से अलग है।
6 मार्च को कर्नाटक सरकार ने बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर बैन लगाया था
कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान किया था। कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।
सीएम सिद्धारमैया ने बजट भाषण के दौरान कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उन पर गलत असर पड़ रहा है।
उम्र का वैरिफिकेशन जरूरी होगी
16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव डेटा सुरक्षा कानून डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स 2025 से भी जुड़ा है।
इसके तहत बच्चों को अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति और उम्र का वैरिफिकेशन जरूरी होगा। इसके लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का उपयोग किया जा सकता है।
टीनएज में सोशल मीडिया के प्रति झुकाव ज्यादा
टीनएज में ‘सोशल वैलिडेशन’ बहुत मायने रखता है। वहीं सोशल मीडिया टीनएजर्स को एक ऐसा मंच देता है, जहां वे अपनी पहचान बना सकते हैं और अपनी पसंद की चीजों को दुनिया के साथ साझा कर सकते हैं। यह उनके लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक वर्चुअल दुनिया है, जहां वे अपने अस्तित्व को तलाशते हैं।
साथ ही यहां मिलने वाला इंस्टेंट रिएक्शन (लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज) उन्हें यह एहसास कराता है कि लोग उन्हें देख रहे हैं और ये मायने रखता है। टीनएजर्स के सोशल मीडिया के प्रति अट्रैक्शन के कई कारण हो सकते हैं।