डूंगरपुर के आर्थोपेडिक डॉक्टर अनिल बनवीर की मंगलवार को अमेरिका से मेक्सिको के बीच क्रूज पर मौत हो गई। वे अपनी डॉक्टर पत्नी के साथ घूमने के लिए गए थे। क्रूज से दोनों अमेरिका से मेक्सिको जा रहे थे।
अचानक हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने कईं सालों तक डूंगरपुर और सागवाड़ा के सरकारी अस्पताल में मरीजों की सेवाएं दी। रिटायरमेंट के बाद भी वे एक निजी अस्पताल में मरीजों को देखते थे। डॉ. बनवीर की मौत के बाद डूंगरपुर में शोक की लहर है।
समुद्र के बीच क्रूज पर हुई मौत
डूंगरपुर के जाने माने आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अनिल बनवीर (75) और उनकी पत्नी डॉ. निशा बनवीर दोनों ही 9 जुलाई से घूमने के लिए विदेश गए थे। मंगलवार को वे और उनकी पत्नी दोनों ही क्रूज से अमेरिका से मेक्सिको जा रहे थे। समुद्र के बीच में ही उनकी हृदय गति रुक गई। क्रूज पर डॉक्टरों ने जांच भी की, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थीं।
रिटायरमेंट के बाद भी निजी अस्पताल में दे रहे थे सेवाएं
ये खबर डूंगरपुर आई तो चिकित्सा महकमे के साथ ही उनसे इलाज ले रहे मरीजों और लोगों में शोक की लहर छा गई। उन्होंने कई सालों तक डूंगरपुर जिला अस्पताल और फिर सागवाड़ा अस्पताल में मरीजों का इलाज किया। वे प्रमुख चिकित्सा अधिकारी भी रहे। 13 साल पहले रिटायरमेंट के बाद भी वे निजी अस्पताल में मरीजों को देख रहे थे।
बेटा-बहू भी लंदन में है डॉक्टर
उनका बेटा डॉ. सौमित्र बनवीर और बहू डॉ. उपासना बनवीर भी लंदन में डॉक्टर है। जबकि बेटी शौकिता ठाकुर अपने पति कुणाल ठाकुर के साथ कनाडा में रहती है। बेटा और बेटी दोनों के ही विदेशों में होने से उनका अंतिम संस्कार कहा होगा ये अभी जानकारी नहीं मिल सकी है। डूंगरपुर जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कांतिलाल मेघवाल ने बताया कि उनकी मौत से चिकित्सा से जुड़े तमाम लोगों में शोक की लहर है। भारत विकास परिषद तिलक शाखा के अध्यक्ष मुकेश श्रीमाल ने भी डॉ. बनवीर के निधन पर शोक जताया है
20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए थे
डॉ. बनवीर ने पोलियो करेक्शन के 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन किए थे। इस कारण कई दिव्यांग फिर चलने फिरने लगे थे। वे आर्थोपेडिक डॉक्टर होने के साथ ही समाजसेवा के कामों में भी जुड़े रहे। वे नारायण सेवा संस्थान, महावीर इंटरनेशनल जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं से भी जुड़े थे। उन्होंने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सागवाड़ा और कई जगहों पर पोलियो करेक्शन के करीब 20 हजार से ज्यादा ऑपरेशन भी किए। इससे जन्मजात चलने फिरने की परेशानी से जूझ रहे लोग फिर से चलने लगे।