कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत इनोवेशन के रास्ते खोज रहा है तो पाकिस्तान घुसपैठ के रास्ते खोज रहा है। भारत शिप डिजाइन कर रहा है तो पाकिस्तान टेरर डिजाइन में लगा हुआ है। भारत स्टार्टअप इकोसिस्टम खड़ा कर रहा है तो पाकिस्तान टेरर इकोसिस्टम खड़ा कर रहा है। भारत सेमीकंडक्टर बना रहा है तो पाकिस्तान सुसाइड बॉम्बर्स तैयार कर रहा है।
साफ है कि हमारे रास्ते अलग-अलग हैं। ऐसे में पाकिस्तान अपने घटिया मंसूबे लेकर हमारी समृद्धि के रास्ते में रोड़े खड़े करता है तो उसे करारा जवाब देने के लिए हमारी सेनाएं तैयार बैठी हैं। इससे पहले रक्षा मंत्री ने लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
- भारत की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है। पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी। अगर बातचीत होगी भी, तो सिर्फ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर होगी, जो भारत का अभिन्न हिस्सा है और जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।
- कारगिल वॉर मेमोरियल में पूरा भारत दिखाई देता है। यहां शहीदों में हिमाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय, तमिलनाडु समेत देश के हर हिस्से के जवानों के नाम दर्ज हैं।
- शहीदों में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च जाने वाले सभी धर्मों के लोग शामिल हैं। जो लोग देश को बांटने का सपना देखते हैं, उन्हें इस स्मारक की दीवार को देखना चाहिए। यह दीवार ही भारत को बांटने की उनकी सोच का सबसे बड़ा जवाब है।
- कारगिल युद्ध केवल भारत की सैन्य और कूटनीतिक जीत नहीं था, बल्कि वह ऐतिहासिक क्षण था जब पूरी दुनिया ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और वीरता को देखा। भारतीय सैनिकों ने अपने शौर्य से ऐसा इतिहास रचा, जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।
- भारत अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेज रहा है तो पाकिस्तान आज भी आतंकवादियों को सीमा पार भेजने का काम कर रहा है। भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर दे रहा है तो पाकिस्तान दुनिया को स्लीपर सेल दे रहा है। भारत डेटा सेंटर बना रहा है तो पाकिस्तान रेडिकल सेंटर बना रहा है। भारत AI से दुनिया को जोड़ रहा है तो पाकिस्तान हवाला से आतंकवाद जोड़ रहा है।
- समाज की सीमाओं से ऊपर उठने की क्षमता ही सैनिकों की असली ताकत है और इसी ताकत के दम पर हम कारगिल जैसे युद्ध जीतते हैं।
रक्षा मंत्री शनिवार को द्रास पहुंचे थे
रक्षा मंत्री शनिवार को द्रास पहुंचे थे। यहां उन्होंने कारगिल वॉर मेमोरियल में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय समारोह का हिस्सा है।
सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। घुसपैठियों की नीयत नहीं बदली है। वे अब भी प्रॉक्सी वॉर और घुसपैठ जैसे हथकंडे अपनाते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय सेना ऐसी हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कारगिल युद्ध करीब 84 दिन तक चला था
5 मई 1999 को पाकिस्तान की घुसपैठ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल की पहाड़ी चोटियों पर जंग हुई थी। युद्ध करीब 84 दिनों तक चला। 26 जुलाई 1999 को भारत की जीत के साथ युद्ध आधिकारिक तौर पर खत्म हुआ। इसमें भारतीय सैनिकों के बलिदान और वीरता को याद करते हुए हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
भारत ने ऑपरेशन विजय चलाकर कारगिल जंग लड़ी थी
कारगिल की लड़ाई की शुरुआत तब हुई, जब पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर चुपचाप कब्जा कर अपने ठिकाने बना लिए थे। 8 मई 1999 को कारगिल की आजम चौकी पर पाकिस्तान के करीब 12 जवानों ने कब्जा कर लिया था।
शुरुआत में इसे घुसपैठियों द्वारा किया गया हमला बताया गया था, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि इसमें पाकिस्तानी सेना शामिल थी। इन पाकिस्तानी सैनिकों को एक भारतीय चरवाहे ने देख लिया था। इस चरवाहे ने भारतीय सेना के जवानों को पाकिस्तानी सैनिकों के घुसपैठ की सूचना दी। इस तरह भारत को पहली बार घुसपैठ की जानकारी मिली।
पहले भारत समझ रहा था कि थोड़े बहुत आतंकियों ने ही कश्मीर की घाटी पर कब्जा किया है, इसलिए भारत ने चंद सैनिकों को ही इन्हें खदेड़ने के लिए भेजा। जब भारतीय सेना पर अलग-अलग चोटियों से जवाबी हमले हुए तब पता चला कि ये एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।
तत्काल भारतीय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया। इसके बाद ऑपरेशन विजय लॉन्च किया गया। पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाड़ियों पर बैठे थे, इस वजह से भारतीय सैनिकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
भारतीय जवानों ने दुश्मन की नजर से बचने के लिए रात में मुश्किल चढ़ाई की। शुरुआत में भारतीय सेना को इसी वजह से खासा नुकसान उठाना पड़ा था।
भारत ने मिग-29 और मिराज-2000 से हमले किए थे
इस युद्ध में वायुसेना और नौसेना की भी बड़ी भूमिका रही। वायुसेना ने मिग-29 और मिराज- 2000 विमानों के जरिए पाक सैनिकों पर बम बरसाए। इस दौरान पाकिस्तान ने हमारे दो लड़ाकू विमान मार गिराए थे जबकि एक क्रैश हो गया था।
नौसेना ने ऑपरेशन तलवार चलाया। इसके तहत कराची समेत कई पाक बंदरगाहों के रास्ते रोक दिए गए ताकि वह कारगिल युद्ध के लिए जरूरी तेल और ईंधन की सप्लाई न कर सके। साथ ही भारत ने अरब सागर में अपने जहाजी बेड़े को लाकर पाकिस्तान के समुद्री व्यापार रास्ते को भी बंद कर दिया था।
इस युद्ध में एक निर्णायक मोड़ तब आया जब भारत ने बोफोर्स तोपों को भी युद्ध मैदान में उतारने का फैसला लिया। आसमान से वायुसेना का हमला और जमीन से बोफोर्स तोप के भारी-भरकम गोलों ने पाकिस्तानी सैनिकों को भागने पर मजबूर कर दिया।
करीब 2 महीने तक दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध चलता रहा। इस युद्ध में 527 भारतीय जवान शहीद हुए और पाकिस्तान के भी करीब 3000 सैनिक मारे गए। हालांकि, पाकिस्तान केवल 357 सैनिकों के मरने का ही दावा करता है। आखिरकार 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल की आखिरी चोटी पर भी कब्जा कर लिया।