बिहार के डेयरी ब्रांड सुधा में 100 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यह मामला बेगूसराय की बरौनी डेयरी से जुड़ा है। यहां 2023 से 27 फरवरी 2026 के बीच खरीदारी, टेंडर, नियुक्ति, बैंक से लिए गए कर्ज, दूध के हिसाब और डेयरी की संपत्तियों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच की गई।
विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर फुलवड़िया थाने में बरौनी डेयरी के पूर्व प्रभारी एमडी सह सहायक महाप्रबंधक रवींद्र प्रसाद और वर्तमान चेयरमैन विजय शंकर सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
जांच रिपोर्ट तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ और मुजफ्फरपुर डेयरी के एमडी फूल कुमार झा ने तैयार की है। उन्होंने 1 सितंबर 2026 को कॉम्फेड को रिपोर्ट सौंपी।जांच के दौरान टीम ने 1311 पन्नों की छह मुख्य फाइलें देखी, जिसमें खरीद में वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े कई मामले दिखे।
3 आईपैड खरीदने के लिए ट्रक का इस्तेमाल किया, जांच में ट्रेक्टर का नंबर निकला
सुधा को तीन Apple iPad खरीदने थे। जांच में सामने आया कि इन तीनों iPad की डिलीवरी ट्रक से दिखाकर की गई, जबकि तीन iPad जैसी छोटी चीज को लाने के लिए ट्रक की जरूरत नहीं थी। इसके बाद जांच में ट्रक से डिलीवरी दिखाने के पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल की गई।
डिलीवरी के लिए जिस ट्रक का नंबर रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था, उसकी भी जांच हुई। डेयरी के गेट रजिस्टर में BR01GA4412 नंबर दर्ज था। लेकिन जांच में यह नंबर ट्रक का नहीं, बल्कि ट्रैक्टर का पाया गया। इसी तरह का एक मामला टूर में गड़बड़ी का भी है। बरौनी डेयरी के अधिकारी टूर पर बनारस गए थे। जिसमें बरौनी से बनारस की दूरी 1100 किलोमीटर दिखाकर करीब 66 हजार किराया दर्ज किया गया है।
एक ही फर्म से कोटेशन मंगाया, पर्चेज ऑर्डर पहले ही जारी किया
अब दूसरी खरीदारी देखिए। वनस्पति तेल और गेहूं के आटे की सप्लाई के लिए सुधा ने मल्टी फर्म कोटेशन को नहीं देखा, बल्कि एक ही फर्म से कोटेशन मंगाया।
यहां गड़बड़ी ये हुई कि फर्म ने सुधा को 9 अगस्त 2024 को कोटेशन भेजा। लेकिन जांच रिपोर्ट के अनुसार इसे 8 अगस्त को ही स्वीकार कर लिया गया। इतना ही नहीं, 10 लाख 48 हजार 300 रुपए का परचेज ऑर्डर भी 8 अगस्त को जारी कर दिया गया।
सुधा के ठेकुआ में वनस्पति तेल का मामला
जांच रिपोर्ट में सुधा ब्रांड के ठेकुआ से जुड़ा मामला भी है। रिपोर्ट के अनुसार ठेकुआ बनाने में रिफाइंड/वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके लिए COMFED और FSSAI की जरूरी अनुमति नहीं होने की बात कही गई है।
पैकेट पर भी वनस्पति तेल के इस्तेमाल की जानकारी नहीं दी गई। इस मामले को लेकर FIR में BNS की धारा 274 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
डेयरी के पैसे से लैपटॉप खरीदा, इस्तेमाल किसी और का
डेयरी के पैसे से एक ऐपल लैपटॉप खरीदने का मामला भी जांच में आया। रिपोर्ट के अनुसार खरीद से पहले जरूरी मंजूरी का रिकॉर्ड नहीं मिला।
लैपटॉप की तकनीकी जांच में उसका लॉगिन किसी अधिकारी या कर्मचारी से जुड़ा नहीं मिला। रिपोर्ट में इसके किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए जाने की बात दर्ज है।
दूध के हिसाब में 14.30 करोड़ रुपए का अंतर
बरौनी डेयरी में दूध और दुग्ध उत्पादों के हिसाब की जांच में सबसे बड़ी रकम हैंडलिंग लॉस की सामने आई। MIS यानी डेयरी के हिसाब-किताब में 14.30 करोड़ रुपए से ज्यादा का हैंडलिंग लॉस दर्ज था। जांच में इस आंकड़े और वास्तविक नुकसान के बीच अंतर पाया गया।
सरल शब्दों में समझें तो डेयरी के रिकॉर्ड में दूध और उससे बने उत्पादों के काम के दौरान इतना नुकसान दिखाया गया, लेकिन जांच टीम को दर्ज आंकड़ों में अंतर मिला।
रिश्तेदारों के वाहन लगाए, बिना प्रक्रिया के नियुक्तियां
जांच के मुताबिक, चेयरमैन विजय शंकर सिंह के बेटे को बरौनी डेयरी के नियमों के खिलाफ सुधा उत्पादों की डिस्ट्रीब्यूटर एजेंसी दी गई। चेयरमैन और मार्केटिंग अधिकारी के रिश्तेदारों की निजी गाड़ियां भी बिना टेंडर के डेयरी में किराए पर लगाई गईं।
चेयरमैन पर डेयरी की सरकारी गाड़ियों को निजी और पारिवारिक काम में इस्तेमाल करने और उसका खर्च डेयरी से कराने का भी उल्लेख है।
जांच में अधिकारी रवींद्र प्रसाद की ओर से बिना बोर्ड की मंजूरी, विज्ञापन और चयन समिति के 9 नियुक्तियां करने की बात सामने आई। इनमें सुजीत कुमार को CRPS पद पर रखा गया, जबकि चयन समिति ने उनके नाम की सिफारिश नहीं की थी और वे वेटिंग लिस्ट में भी नहीं थे।
मृत्युंजय कुमार को पहले सुधामित्र के पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्हें ₹55 हजार महीने के वेतन पर कॉन्ट्रैक्ट पर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव बनाया गया। विकास कुमार को चालक रखा गया और मजदूरी में नियम के खिलाफ बदलाव कर ₹8,90,889 का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
110 करोड़ का कर्ज, दूध पाउडर सस्ते में बेचा
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बरौनी डेयरी ने निदेशक पर्षद की पहले से मंजूरी लिए बिना अलग-अलग बैंकों से 110 करोड़ रुपए से ज्यादा का ओवरड्राफ्ट लोन लिया।
बाद में इसे मंजूरी देने की कोशिश की गई। डेयरी ने कॉम्फेड की तय दर से काफी कम कीमत पर निजी पार्टियों को मिल्क पाउडर बेचा।
WMP की तय दर 338 रुपए किलो थी, लेकिन इसे 201 से 257 रुपए किलो में और SMP की 297 रुपए तय दर के मुकाबले 222 से 234 रुपए किलो में बेचा गया। 10 लाख रुपए से ज्यादा के सौदों में ई-टेंडर नहीं किया गया।
जांच में इससे 8.48 लाख रुपए के नुकसान का उल्लेख है। वहीं, मेसर्स आरएस फूड के पास डेयरी का 2.83 करोड़ रुपए का TS स्टॉक और 6.39 करोड़ रुपए का IUT स्टॉक बकाया रहने की बात भी सामने आई।
खरीद में टेंडर से लेकर कीमत तक सवाल
जांच में आरोप है कि 10 लाख रुपए से ज्यादा की खरीद को ई-टेंडर से बचाने के लिए बड़े ऑर्डर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया। सीमित टेंडर में सिर्फ 5 दिन का समय दिया गया।
कई सामान बिना मांग पत्र के खरीदे गए और कुछ सामान बाजार भाव से दोगुने से ज्यादा कीमत पर खरीदे जाने का उल्लेख है।
इनमें दीवार, मशीन, बिजली का सामान, फर्नीचर, दवाइयां, एसी, पानी के कूलर, खाद्य सामग्री और डेयरी में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजें शामिल हैं।
किसानों की संस्थाओं FPO लखीसराय से चावल और FPO बेगूसराय से मखाना खरीदने में भी खरीद नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात कही गई है।
डेयरी की पुरानी गाड़ियों और दूसरी संपत्तियों को बिना बोर्ड की मंजूरी और पारदर्शी टेंडर के बेचने का भी उल्लेख है।
कुछ भुगतान बिल, रसीद या वाउचर के बजाय सिर्फ पेमेंट स्लिप पर किए गए और एक लाख रुपए का कैश एडवांस भी बिना हिसाब के रहने की बात जांच में सामने आई।
बोर्ड की बैठक से लेकर दूध केंद्रों तक गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट में बोर्ड की बैठकों की कार्यवाही में बदलाव करने और प्रस्तावों व फैसलों में मनमाने तरीके से बदलाव किए जाने की बात कही गई है। बैठकों की जरूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध नहीं मिली।
डेयरी के बल्क मिल्क कूलिंग सेंटरों (BMC) की संचालन लागत ज्यादा दिखाने और वहां आने वाले दूध से बनने वाले कुल ठोस पदार्थ (TS) का रिकॉर्ड नहीं रखने का भी उल्लेख है। इससे दूध की मात्रा में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
निर्माण और प्रोजेक्ट के काम में बिना काम पूरा किए भुगतान, बिना पूरा अनुबंध किए एजेंसियों को पैसे देने और JICA की परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं की बात कही गई है।
ठेकेदारों की सिक्योरिटी राशि और डेयरी की जमीन के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी बताई गई है। पुराने ऑडिट में उठाई गई आपत्तियों पर भी जरूरी कार्रवाई नहीं किए जाने का उल्लेख है।
8 सुनवाई में नहीं पहुंचे, अब जांच में इन चीजों की होगी पड़ताल
जांच अधिकारी फूल कुमार झा ने 1 सितंबर 2026 को 16 पन्नों की रिपोर्ट दी। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी अधिकारी रवींद्र प्रसाद को अपना पक्ष रखने के लिए 10 बार बुलाया गया, लेकिन वे सिर्फ 2 बैठकों में पहुंचे और इनमें एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल हुए।
उनके भेजे गए तीन स्पष्टीकरण भी जांच अधिकारी ने तथ्यहीन बताए। 115 पन्नों के शुरुआती दस्तावेज और 1311 पन्नों की 6 फाइलों की जांच के बाद रिपोर्ट में खरीद और वित्तीय नियमों के लगातार उल्लंघन की बात कही गई है।
अब पुलिस 14.30 करोड़ रुपए के हैंडलिंग लॉस, 110 करोड़ के ओवरड्राफ्ट और फर्जी बिलिंग की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट कराएगी। लैपटॉप, आईपैड, कंप्यूटर, गेट रजिस्टर, CCTV और डिलीट वीडियो की भी फॉरेंसिक जांच होगी।
टेंडर पाने वाली फर्मों, कुछ कर्मचारियों और चेयरमैन के परिजनों से पूछताछ की जाएगी। जांच में BNS की अलग-अलग धाराओं के तहत टेंडर में गड़बड़ी, संपत्ति के गलत इस्तेमाल, दस्तावेजों में हेरफेर, फर्जी दस्तावेज और ठेकुआ में बिना अनुमति वनस्पति तेल इस्तेमाल करने जैसे आरोप भी दर्ज किए गए हैं।