नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी आज:कार्तिक आर्यन, यामी को दिया जाएगा, दिल्ली की जगह गुजरात में होने पर विवाद; जानिए इतिहास, विवाद और इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स

72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी आज गुजरात में आयोजित हो रही है। इतिहास में पहली बार नई दिल्ली के विज्ञान भवन की बजाय ये सेरेमनी गुजरात के केवडिया में यानी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास होगी, जिस पर विवाद हो रहा है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने इस फैसले की आलोचना की है। शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद संजय राउत ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है।

विवाद के बीच सेरेमनी की तैयारियां पूरी हो रही हैं। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुग’ के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है, जिसके लिए वह गुजरात पहुंच चुके हैं। बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड यामी गौतम को फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए मिलेगा, जबकि बेस्ट हिंदी फिल्म ‘श्रीकांत’ और बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड ‘आर्टिकल 370’ को दिया जाएगा। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को चुकी है। आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अवॉर्ड देंगी।

अभिनेता कार्तिक आर्यन कल ही केवडिया पहुंच गए थे, जहां होटल में ढोल-नगाड़ा और गरबा के साथ उनका स्वागत किया गया।

इसके अलावा, अभिनेता रणदीप हुड्डा अपनी पत्नी और बच्चे के साथ, ममूटी, धनुष और अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी भी रात में वडोदरा पहुंचे।

72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी से पहले जानिए, विजेताओं की लिस्ट, सेरेमनी पर विवाद, इतिहास, इससे जुड़े इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स और किस्से-

नई दिल्ली की जगह गुजरात में सेरेमनी होने पर विवाद-

नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी नई दिल्ली की जगह गुजरात में आयोजित होने पर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने कड़ी निंदा की। वहीं, शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है।

राज ठाकरे ने आपत्ति जताते हुए लिखा, ‘आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महत्व कम करने की कोशिश के बाद अब क्या देश की राजधानी दिल्ली की अहमियत भी धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश हो रही है?’

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि ये गुजरात से जुड़ा कोई प्रोग्राम नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कार है, तो इसकी लोकेशन गुजरात क्यों रखी गई। इसे राजधानी में ही रखना था, जैसा पिछले कई सालों से चला आ रहा है। उन्होंने अन्य सेलेब्स से इस इवेंट में न जाने और इसे बॉयकॉट करने की अपील की है।

पिछले साल शाहरुख खान-रानी मुखर्जी ने जीता नेशनल अवॉर्ड

शाहरुख खान ने 40 साल के करियर में पिछले साल फिल्म जवान के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड जीता। उनके साथ विक्रांत मैसी को भी 12वीं फेल के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। जबकि रानी मुखर्जी को मिसेस चटर्जी वर्सेस नॉर्वे के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया।

पिछले साल मोहनलाल को इस साल अनंत नाग को मिला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड

72वीं नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

4 सितंबर 1948 को जन्मे अनंत नाग (अनंत नागरकट्टे) कन्नड़ सिनेमा के सबसे सम्मानित और दिग्गज अभिनेताओं में से एक हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं।

कन्नड़ के अलावा अनंत नाग ने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है। कन्नड़ सुपरस्टार यश की ब्लॉकबस्टर फिल्म KGF के दोनों पार्ट में वह नजर आए थे।

ऑक्सीजन मास्क लगाकर अवॉर्ड लेने पहुंचे राज कपूर, राष्ट्रपति की एंबुलेंस दी गई

साल 1972 में पृथ्वीराज कपूर को मरणोपरांत दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2 मई 1988 को हुई अवॉर्ड सेरेमनी में उनकी जगह ये अवॉर्ड लेने उनके बेटे राज कपूर पहुंचे थे। राज कपूर इतने बीमार रहते थे कि वो ऑक्सीजन सिलेंडर लिए और मास्क लगाए सेरेमनी में बैठे थे। जिस समय पृथ्वीराज कपूर का नाम अनाउंस हुआ, तो राज कपूर की हालत इतनी बिगड़ गई कि वो कुर्सी से उठ नहीं सके। ऐसे में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने सेरेमनी का प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद उनकी कुर्सी तक जाकर अवॉर्ड दिया।

कुछ ही देर में राज कपूर को सेरेमनी में ही अस्थमा का अटैक पड़ा। राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए अपनी गाड़ी दी। राज कपूर को दिल्ली के AIIMS में भर्ती करवाया गया था। 2 महीने तक चले इलाज के बाद उनका 2 जून 1988 को निधन हो गया। ये किस्सा राज कपूर की बेटी रीमा ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में सुनाया था।

फिल्म ब्लैक के नेशनल अवॉर्ड जीतने पर हुई थी कंट्रोवर्सी

53वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में संजय लीला भंसाली की फिल्म ब्लैक को बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी) का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था, जो हॉलीवुड फिल्म द मिरेकल वर्क की कहानी से प्रेरित थी। नेशनल अवॉर्ड के नियमों के अनुसार, किसी भी एडेप्शन फिल्म को अवॉर्ड नहीं दिया जा सकता। ऐसे में ज्यूरी मेंबर में शामिल देब बनर्जी ने आरोप लगाए कि फिल्म को फेवरिज्म कर अवॉर्ड दिया गया है।

देब बनर्जी ने पिटीशन भी फाइल की थी, हालांकि कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिल्म ब्लैक ने 3 नेशनल अवॉर्ड जीते, जिमें बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी), बेस्ट एक्टर (अमिताभ बच्चन) और बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन (सब्यसाची मुखर्जी) शामिल हैं।

अवॉर्ड सेरेमनी पर लगे पक्षपात के आरोप

इसी साल फिल्म परजानिया के लिए राहुल ढोलकिया को बेस्ट डायेरक्टर, सारिका को बेस्ट एक्ट्रेस और फिल्म परिणीता के लिए प्रदीप सरकार को बेस्ट डायरेक्टर डेब्यू का अवॉर्ड दिए जाने पर भी विवाद रहा। कोलकाता बेस्ड क्रिटिक और ज्यूरी में शामिल देब बनर्जी ने इनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में पिटीशन फाइल की थी। उनका आरोप था कि पक्षपात के जरिए इन कैटेगरी में अवॉर्ड दिए गए हैं।

किरण खेर का नेशनल अवॉर्ड विवादों में रहा

बंगाली फिल्म बरीवाली के लिए किरण खेर को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड दिया गया था। इस फिल्म के नॉमिनेशन के दौरान भरे गए फॉर्म में कहा गया था कि किरण खेर ने अपनी आवाज खुद डब की है। डबिंग आर्टिस्ट और एक्ट्रेस रीता कोइराला ने आरोप लगाए कि फिल्म में उन्होंने किरण खेर के लिए बंगाली में डबिंग की थी, जिसको नॉमिनेशन फॉर्म में मेंशन नहीं किया गया था।

65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी में 68 विजेताओं ने सेरेमनी में आने से इनकार किया था

65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी 68 विजेताओं के सेरेमनी में न पहुंचने से विवादों में रही थी। विजेताओं को मिले इन्विटेशन कार्ड में लिखा था कि उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अवॉर्ड दिया जाएगा, लेकिन जब सेरेमनी की रिहर्सल शुरू हुई तो बताया गया कि 107 में से सिर्फ 11 लोगों को ही राष्ट्रपति से अवॉर्ड मिलेगा। अन्य विजेताओं को तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी अवॉर्ड देंगी। इस बात से नाराज होकर 68 विजेताओं ने सेरेमनी में जाने से इनकार कर दिया था। शबाना आजमी के पास सबसे ज्यादा नेशनल अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड

अब तक सबसे ज्यादा नेशनल अवॉर्ड हासिल करने का रिकॉर्ड एक्ट्रेस शबाना आजमी के पास है। उन्हें 5 बार फिल्म अंकुर, अर्थ, कांधार, पार, गॉडमदर के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला है।

स्मिता पाटिल ने नेशनल अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास

स्मिता पाटिल को 1977 की फिल्म ‘भूमिका’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला था। उस समय उनकी उम्र महज 25 साल थी। ऐसे में सबसे कम उम्र में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड आज भी उन्हीं के पास है।

नेशनल अवॉर्ड के इतिहास से जुड़ी ये बातें भी पढ़िए-

  • 1970 में बेस्ट नॉन फीचर फिल्म कैटेगरी में किसी फिल्म को योग्य नहीं पाया गया, जिसके चलते किसी भी फिल्म को इस कैटेगरी में अवॉर्ड नहीं मिला।
  • 54वें नेशनल अवॉर्ड में 5 कैटेगरी में अवॉर्ड दिए नहीं गए। ज्यूरी का मानना था कि उन्हें 5 कैटेगरी के लिए सूटेबल फिल्में ही नहीं मिलीं।
  • साल 2000 तक मसाला फिल्मों को नेशनल अवॉर्ड नहीं दिए जाते थे, यही वजह रही कि अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर फिल्म जंजीर को कोई अवॉर्ड नहीं दिया गया था।
  • साल 2004 के लिए सैफ अली खान को फिल्म हम तुम के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था। जबकि उसी साल शाहरुख खान की फिल्म स्वदेश रिलीज हुई थी। ऐसे में कई लोगों ने अवॉर्ड पर सवाल खड़े किए थे। एक अवॉर्ड सेरेमनी में शाहरुख ने खुद कहा था कि सैफ की जगह उन्हें स्वदेश के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलना चाहिए थे।
  • अमिताभ बच्चन, कमल हासन और मोहनलाल के पास 4-4 बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड हैं।
  • ए.आर.रहमान के पास 6 बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन और एक साउड डायरेक्शन का नेशनल अवॉर्ड है।
  • पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर और शशि कपूर एकमात्र पिता-पुत्र हैं, जिन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।