भाजपा का दावा-फॉर्म 6 में बदलाव नहीं, सिर्फ अटैचमेंट जोड़ा:कहा- राहुल भ्रम फैला रहे; कल CJI ने कहा था- फॉर्म-6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी

भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि फॉर्म 6 में चुनाव आयोग ने कोई बदलाव नहीं किया, सिर्फ अटैचमेंट जोड़ा है।

उन्होंने कहा कि 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि SIR के लिए फॉर्म 6 काफी नहीं है इसलिए जरूरी है इसमें चुनाव आयोग कोई और कागजात भी जारी करे।

उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट कहती है ये फॉर्म 6 के साथ जो डॉक्युमेंट चुनाव आयोग ने दिया है उसपर हमें कोई आपत्ति नहीं है। BJP ने राहुल गांधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।

राहुल ने कहा था- ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी बदलाव किया

कोर्ट की टिप्पणी के बाद नेता विपक्ष राहुल गांधी ने X पर लिखा था- अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया। हालांकि, चुनाव आयोग ने राहुल के दावे को गलत बताया। चुनाव आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 के बिहार SIR आदेश के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।

BJP बोली- चुनाव आयोग ने SIR पर साथ फैसला लिया

भाजपा ने कहा कि विपक्ष कह रहा है कि चुनाव आयोग ने साथ SIR पर फैसला नहीं लिया है, लेकिन ये गलत है।

26 सितंबर को चुनाव आयोग ने कहा था कि SIR को लेकर फैसला एक साथ लिया गया है। और उस दिन फोटो भी जारी की गई थी जिसमें कहा गया था तीनों आयुक्त साथ हैं।

सुप्रीम कोर्ट बोला- चुनाव आयोग ने कानून तोड़ा तो फैसले रोक देंगे

कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि अगर आयोग के फैसले कानून के खिलाफ या बिना सहमति के लिए गए पाए गए, तो उन्हें रद्द किया जा सकता है।

आयोग के मुताबिक, बिहार में SIR का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस आदेश को बरकरार रखा था। आयोग ने 26 सितंबर की प्रेस रिलीज में कहा था कि SIR से जुड़े मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 की घोषणा को सही माना था।

बता दें कि मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरा जाता है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं में आरोप है कि आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना SIR से जुड़े करीब 14 फैसले लिए।

सुप्रीम कोर्ट की 4 बड़ी बातें: कार्रवाई के पहले जवाब जरूरी

1. अखबार की खबर के आधार पर आदेश नहीं दे सकते: CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोई खबर 100% सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। इसलिए सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर CEC को सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। पहले चुनाव आयोग का जवाब और रिकॉर्ड देखना होगा।

2. फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। यानी तीन सदस्यीय आयोग में किसी एक सदस्य का अकेले फैसला पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता।

3. अभी यह नहीं मान सकते कि सारे फैसले CEC ने अकेले लिए: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले रिकॉर्ड देखना होगा। सिर्फ आरोप के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि सभी फैसले CEC ने अकेले लिए थे।

4. रिकॉर्ड से एकतरफा फैसला साबित हुआ तो कार्रवाई संभव: सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर रिकॉर्ड से पता चलता है कि कोई फैसला जरूरी प्रक्रिया के बिना लिया गया था, तो उस पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है।