भारत 114 और राफेल खरीदेगा, स्वदेशी हथियार लगेंगे:पिछली डील 62 की थी, अभी 36 ऑपरेशनल हैं, 4 साल में 26 और मिलेंगे

भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना आगे बढ़ रही है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर इस वित्त वर्ष के अंत तक फैसला हो सकता है।

अभी कंपनियों से मिले प्रस्तावों की जांच की जा रही है। भारत इस डील में ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहता है। योजना के मुताबिक, ज्यादातर राफेल विमान भारत में असेंबल किए जाएंगे।

इनमें भारत में बने हथियार और दूसरे सिस्टम लगाए जाएंगे। डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि फ्रांस की कंपनी पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियार लगाने पर सहमत हो गई है।

भारत के पास अभी 36 राफेल हैं, जो ऑपरेशन हैं। अप्रैल 2025 में नौ सेना के लिए 26 राफेल-M खरीदने का सौदा हुआ है। इनकी डिलीवरी 2030 तक पूरी होने की उम्मीद है। यानी 4 साल बाद देश की सेनाओं के पास 62 राफेल हो जाएंगे।

राफेल की खरीद कैसे होगी?

यह खरीद ‘बाय एंड मेक’ मॉडल के तहत होगी। इसके तहत राफेल बनाने वाली कंपनी के साथ मिलकर भारत में विमानों की असेंबली और उत्पादन से जुड़े काम किए जाएंगे।

रक्षा मंत्रालय को मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, इस साल के अंत तक इस प्रक्रिया में कोई निष्कर्ष निकल सकता है।

राफेल मरीन में लगेंगे भारतीय हथियार

भारत पहले ही राफेल मरीन विमान खरीद चुका है। अब फ्रांस की कंपनी इन विमानों में भारतीय हथियार लगाने के लिए तैयार है।

इससे भारत के बनाए हथियारों को राफेल के साथ इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी। नई खरीद में भी भारतीय हथियारों और सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है।

2027 में तेजस Mk2 की पहली उड़ान

डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि तेजस Mk2 की पहली उड़ान 2027 के मध्य में होने की योजना है। पहले इसके प्रोटोटाइप तैयार होंगे और फिर भारतीय वायुसेना उनका परीक्षण करेगी।

वायुसेना ने शुरुआत में करीब 120 तेजस Mk2 विमानों की जरूरत बताई थी। इनकी संख्या पर अंतिम फैसला प्रोटोटाइप के परीक्षण के बाद किया जाएगा।

तेजस Mk2 में निजी कंपनियों की भी भूमिका

तेजस Mk2 को विकसित करने की मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL की होगी। इसे फेज वाइज तरीके से विकसित किया जाएगा और जरूरत के हिसाब से इसमें नए बदलाव किए जाएंगे।

इस काम में निजी कंपनियां और MSME सेक्टर भी शामिल होंगे। निजी कंपनियां सब-असेंबली के साथ फ्यूजलेज जैसे बड़े हिस्से बनाने में मदद कर रही हैं। कुछ हिस्सों के लिए निजी क्षेत्र की प्रोडक्शन लाइन भी शुरू की गई है।

AMCA पर भारत का फोकस

भारत ने फिलहाल किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। अभी भारत अपने AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर फोकस कर रहा है।

AMCA के लिए शॉर्टलिस्ट की गई कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। कंपनियों ने प्रोजेक्ट की जटिलता और इस क्षेत्र में पहली बार काम करने की वजह से ज्यादा समय मांगा है।

सरकार उन्हें कुछ और समय देने जा रही है। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, फिलहाल भारत का फोकस AMCA प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर है।