पाकिस्तान और तुर्किये जल्द अपनी सेनाएं सऊदी अरब में तैनात करेंगे। रियाद में सोमवार को हुई मक्का रक्षा समझौते की आपात बैठक में हूती विद्रोहियों के खिलाफ तीनों देशों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।
हूतियों ने यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब के आसपास कई अहम इलाकों पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है। यह इलाका सऊदी अरब के बेहद करीब है। ऐसे में यहां हूतियों की बढ़ती मौजूदगी से सऊदी अरब की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है।
इससे पहले भी सऊदी ने पाकिस्तान से सैन्य मदद मांगी थी। हालांकि, पाकिस्तान ने सितंबर में मदद देने से इनकार कर दिया था। यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने तब कहा था कि उसकी सेना किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी।
हूती विद्रोहियों ने लाल-सागर में कब्जा बढ़ाया
यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में अहम द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। यमन सरकार के मुताबिक हूतियों ने ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर अपने लड़ाके तैनात किए हैं। ये द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में हैं।
इससे पहले पिछले हफ्ते हूतियों ने लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदेब में मौजूद मायून द्वीप पर भी कब्जा किया था। इन दोनों जगहों पर सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना का नियंत्रण था।
हूतियों के इन द्वीपों पर कब्जे से लाल सागर के समुद्री रास्ते पर उनका दबदबा और मजबूत हो गया है। बाब अल-मंदेब एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए शॉर्टकट रास्ता है। यहां से गुजरने के बाद जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं।
बाब अल-मंदेब के पास हूतियों से इलाके छीनने का दावा
यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है।
यमनी सुरक्षा बलों ने इस दौरान बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास मोखा द्वीप सहित कई अहम इलाकों से हूती विद्रोहियों को पीछे हटाने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान में अमेरिका खुफिया जानकारी और सैन्य योजना बनाने में मदद कर रहा है।
यमन में हूतियों का करीब एक-तिहाई इलाके पर नियंत्रण है। यहां देश की करीब 80% आबादी रहती है। यही वजह है कि हूतियों का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद उनका देश की आबादी और अहम शहरों पर बड़ा प्रभाव है।
सऊदी अरब जल्द हूतियों पर हमला कर सकता है
सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को यमन में उतार सकता है। इसका मकसद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं –
- पहला विकल्प: बाब अल-मंदेब के आसपास सीमित हमला करके समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने की कोशिश की जाएगी।
- दूसरा विकल्प: यमन के कई इलाकों में एक साथ ऑपरेशन चलाया जा सकता है। इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं।
इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है।
मक्का पैक्ट लागू- एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा
रियाद में सोमवार को हुई बैठक के साथ मक्का रक्षा समझौता औपचारिक रूप से लागू हो गया। इसके तहत एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
बैठक में तीनों देशों के वरिष्ठ रक्षा और सैन्य अधिकारी शामिल हुए। तुर्किये से विदेश मंत्री हाकान फिदान और रक्षा मंत्री याशार ग्यूलर, जबकि सऊदी अरब से विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान मौजूद रहे।
पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री इशाक डार, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ शामिल हुए। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद भी बैठक में मौजूद रहे, जिन्हें मक्का रक्षा समझौते का महासचिव नियुक्त किया गया है।