सेंसेक्स में 1000 अंक की गिरावट:81,100 के स्तर पर आया, निफ्टी भी 200 अंक फिसला; 2 दिन में 2,000 पॉइंट गिरा

शेयर बाजार में आज यानी 21 जनवरी को 1,000 अंक की गिरावट है। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,000 अंक गिरकर 81,124 के निचले स्तर पर आ गया था। अभी ये 600 (0.72%) अंक से ज्यादा गिरकर 81,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

वहीं निफ्टी में भी करीब 200 (0.80%) अंक की गिरावट है। ये 25,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 5 में तेजी और 25 में गिरावट है। बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी और IT शेयर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली है।

दो दिन में बाजार 2000 से ज्यादा पॉइंट गिर चुका है। कल भी सेंसेक्स 1065 में अंक की गिरावट रही थी। मार्केट एक्सपर्ट्स बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद को मान रहे हैं। इसके अलावा तीसरी तिमाही में रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के मुनाफे में कमी भी इसका कारण माना जा रहा है।

बाजार में गिरावट के 4 बड़े कारण

  • ट्रेड वॉर का खतरा: बाजार में आई गिरावट की वजह बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता है। ट्रम्प ग्रीनलैंड को उसके संसाधनों के लिए अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं। यूरोप इसका विरोध कर रहा है। अमेरिका और यूरोप के बीच पैदा हुए नए भू-राजनीतिक तनाव के बाद ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन यूरोपीय सहयोगी देशों से होने वाले आयात पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे हैं। इस स्थिति पर चर्चा करने और जवाबी कार्रवाई पर फैसला लेने के लिए यूरोपीय संघ (EU) के नेता गुरुवार को ब्रुसेल्स में एक इमरजेंसी समिट करने जा रहे हैं।
  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला :कल 20 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई टैरिफ (आयात शुल्क) नीतियों की वैधता पर सुनवाई हुई। बाजार से जुड़ी रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट के रुख से यह संकेत मिल रहे हैं कि ट्रम्प प्रशासन को व्यापारिक कड़े फैसले लेने की छूट मिल सकती है। इससे भारत के IT और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट ओरिएंटेड सेक्टर्स में आज भारी बिकवाली हुई है, क्योंकि इन कंपनियों की बड़ी कमाई अमेरिका से आती है।
  • रुपए की रिकॉर्ड कमजोरी और FII की लगातार बिकवाली: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 91.10 के ऑल-टाइम लो (रिकॉर्ड निचले स्तर) पर ट्रेड कर रहा है। जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का डॉलर में मिलने वाला मुनाफा घट जाता है। NSDL के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में ₹29,000 करोड़ से ज्यादा निकाल चुके थे, जो सिलसिला आज भी जारी है।
  • रिलायंस और अन्य प्राइवेट कंपनियों के कमजोर रिजल्ट: अभी तीसरी तिमाही (Q3FY26) के नतीजों का सीजन चल रहा है। बाजार के हैवीवेट शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और कुछ प्रमुख प्राइवेट बैंकों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों की वजह से इन कंपनियों के ‘ऑपरेटिंग मार्जिन’ में गिरावट आई है। रिलायंस और बैंकिंग शेयरों में आई इस गिरावट ने सेंसेक्स को नीचे धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई है।

ग्लोबल मार्केट में गिरावट

  • एशियाई बाजारों में कोरिया का कोस्पी 0.26% नीचे 4,873 पर और जापान का निक्केई इंडेक्स 0.56% गिरकर 52,693 पर कारोबार कर रहा है।
  • हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.13% गिरकर 26,453 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.16% बढ़कर 4,120 पर कारोबार कर रहा है ।
  • 20 जनवरी को अमेरिका का डाउ जोन्स 1.76% नीचे 48,488 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डेक कंपोजिट में 2.39% और S&P 500 में 2.06% की गिरावट रही।

20 जनवरी को FII ने ₹2,191 करोड़ के शेयर्स बेचे

  • 20 जनवरी को FII ने 2,191 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। वहीं DII ने 2,755 करोड़ रुपए के शेयर्स खरीदे हैं।
  • दिसंबर 2025 में FIIs ने कुल ₹34,350 करोड़ के शेयर्स बेचे थे। इस दौरान बाजार को संभाल रहे DIIs ने ₹79,620 करोड़ के शेयर खरीदे थे।

शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO का दूसरा दिन

शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO में निवेश करने का आज दूसरा दिन है। यह 22 जनवरी तक बोली लगाने के लिए खुला रहेगा। इस IPO में प्राइस बैंड ₹118 से ₹124 प्रति शेयर है, और रिटेल इन्वेस्टर मिनिमम 120 शेयर्स के एक लॉट पर बिड लगा सकते हैं, जिससे न्यूनतम निवेश ₹14,880 होगा। कुल इश्यू साइज ₹1,907 करोड़ है, जिसमें ₹1,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹907 करोड़ का ऑफर फॉर सेल शामिल है।

कल बाजार में गिरावट रही थी

मंगलवार 20 जनवरी को सेंसेक्स 1065 अंक (1.28%) गिरकर 82,180 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 353 अंक (1.38%) की गिरावट रही। ये 25,233 के स्तर पर आ गया।

मार्केट एक्सपर्ट्स बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद को मान रहे हैं। इसके अलावा तीसरी तिमाही में रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के मुनाफे में कमी भी इसका कारण माना जा रहा है।

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