राहुल गांधी की 28 फरवरी को बरनाला में रैली:विस चुनाव की तैयारी; मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर फोकस, इसके पीछे की चार वजह जानिए

राहुल गांधी 28 फरवरी को बरनाला में रैली करने जा रहे हैं। यह रैली मनरेगा और अमेरिका-भारत ट्रेड के खिलाफ है। इस रैली को साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। रैली को कामयाब बनाने के लिए कांग्रेस कोई कसर नहीं छोड़ने के मूड में है।

गुटबाजी के शब्द से ऊपर पूरी पार्टी इस दौरान एकजुट दिखेगी। पार्टी की तरफ से रैली के लिए राजपुरा के विधायक हरदयाल कंबोज को इंचार्ज लगाया गया है। वहीं, आज भी रैली को लेकर कांग्रेस की मीटिंग है। आइए जानते हैं कि कांग्रेस की बरनाला रैली के पीछे चार वजह क्या है।

1.किसानों और मजदूरों पर फोकस

बरनाला मालवा क्षेत्र में आता है, जो पंजाब का सबसे बड़ा कृषि क्षेत्र है। यहां किसानों की संख्या बहुत अधिक है और मनरेगा (MGNREGA) जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों पर निर्भरता ज्यादा है। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को बदलकर वीबीजी राम जी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण) करने के खिलाफ कांग्रेस का पूरा अभियान “MGNREGA बचाओ संघर्ष” है। बरनाला जैसे किसान-प्रधान इलाके में यह मुद्दा बहुत गूंजता है, और रैली से राज्यभर के किसानों को एकजुट करने का संदेश जाता है।

2. मालवा की 69 सीटों पर नजर

यह रैली कांग्रेस की 2027 चुनावी तैयारी का औपचारिक आगाज मानी जा रही है। पार्टी इसे चुनावी नैरेटिव सेट करने का मौका मान रही है। केंद्र (BJP) और राज्य (AAP) सरकारों के खिलाफ है। कुल 117 सीटों में से 69 सीटें इसी एरिया से आती हैं। वहीं, यह भी साफ है कि जो मालवा जीतता है, वही सरकार बनाता है।

3. आम आदमी पार्टी के गढ़ में सेंध

संगरूर और बरनाला को पहले आम आदमी पार्टी का गढ़ माना जाता था। संगरूर लोकसभा हलके में ही बरनाला भी आता है। यहां जब पार्टी ने 2014 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा तो भगवंत मान सांसद बने। 2017 में बरनाला से आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह मीत हेयर जीते। 2019 लोकसभा में दोबारा फिर से भगवंत मान सांसद चुने गए।

जबकि 2022 में गुरमीत सिंह मीत हेयर यहां से जीतकर विधायक बने। लेकिन 2024 में जैसे उन्होंने संगरूर से लोकसभा चुनाव जीता तो इस सीट पर उपचुनाव हुआ। इस दौरान पार्टी में गुटबाजी हो गई। ऐसे में आम आदमी पार्टी के कुलदीप सिंह काला ढिल्लों जीते थे, जबकि AAP के हरिंदर सिंह धालीवाल 2557 वोटों से हारे। जबकि AAP के बागी गुरदीप सिंह बाठ (AAP से बागी, इंडिपेंडेंट) को 16,899 वोट मिले थे। जबकि अन्य किसी भी उपचुनाव में पार्टी नहीं जीती।

4. गुटबाजी की जगह एकता दिखाएगी

इस रैली के बहाने पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म करने की कोशिश की जाएगी। सारे नेता एक मंच पर दिखेंगे। इसकी कोशिश कुछ दिन पहले चंडीगढ़ में पंजाब प्रभारी द्वारा 2027 चुनाव की तैयारियों को लेकर हुई मीटिंग में दिखी, जहां बाजवा ने अपने घर पर डिनर रखा, जिसमें सारे नेता मौजूद रहे। वहीं, इससे पहले दिल्ली में राहुल गांधी और खरगे भी पार्टी के सीनियर नेताओं से मीटिंग कर फीडबैक ले चुके हैं। सूत्रों का मानना है कि रैली उसी समय तय हो गई थी।

बीजेपी अमित शाह की रैली की तैयारी में

कांग्रेस ही नहीं बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी भी चुनाव की तैयारी में है। शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल की अगुवाई में पहले फेज में 40 रैलियां करने का फैसला लिया है। इसकी शुरूआत उन्होंने गुरदासपुर के कादियां से की है।

जबकि बीजेपी के प्रधान व अन्य नेता मनरेगा स्कीम के बहाने रैलियां कर रहे है। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी रैली की तैयारी चल रही हैं। हालांकि अभी तक तारीख फाइनल नहीं हुई। आम आदमी पार्टी का रैलियाें का दौर जारी है। पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल इनमें मौजूद रहते है। सेहत बीमा योजना शुरू कर दी गई। जिसमें दस लाख का बीमा दिया जा रहा है। जबकि अब बजट में महिलाओं को हजार रुपए की गारंटी पूरी करने की कोशिश की है।

92 सीटें जीतकर AAP ने सरकार बनाई

2022 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो आम आदमी पार्टी (AAP) ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इस दौरान कांग्रेस को 18 सीटें, शिरोमणि अकाली दल को 3 सीटें, भारतीय जनता पार्टी 2 सीटें, बहुजन समाज पार्टी (BSP) 1 सीट और निर्दलीय को एक सीट मिली थी।

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