पेट्रोल-डीजल 10-12 रुपए तक महंगे हो सकते हैं:सोना ₹30 हजार बढ़कर ₹1.90 लाख तक जा सकता है; अमेरिका ईरान जंग का असर

अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। अगर जंग लंबी चली और महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ बंद हुआ तो कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। इसका असर भारत के तेल, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है।

1. पेट्रोल डीजल: दिल्ली में पेट्रोल 95 रुपए लीटर से बढ़कर 105 रुपए तक पहुंच सकता है। वहीं डीजल 88 से बढ़कर 96 रुपए तक जा सकता है। इसकी वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है। इसमें से करीब 50% कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते मंगाता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई घट जाएगी और कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा हैं।

पहले हुए चार बड़े युद्ध में भी बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम

2. सोना चांदी: कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपए तक जा सकता है। चांदी 2.67 लाख रुपए किलो है जो बढ़कर 3.50 लाख तक पहुंच सकती है। युद्ध के समय निवेशक ‘सोने’ को सुरक्षित मानते हैं।

3. शेयर बाजार: मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार शेयर बाजार में 1-1.5% की गिरावट आ सकती है। यानी, सोमवार को सेंसेक्स 1300 अंक और निफ्टी 300 अंक तक गिर सकता है। युद्ध जैसे तनाव के समय निवेशक बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित जगह निवेश करते हैं।

अब होर्मुज स्ट्रेट को जानें…

होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं।

भारत के कुल ‘नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट’ का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी रास्ते से सप्लाई होता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग का सामान शामिल है।

हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है।

होर्मुज बंद हुआ तो ईरान को भी नुकसान होगा

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ईरान की अपनी इकोनॉमी भी तबाह हो सकती है क्योंकि वह खुद अपना तेल एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है।

अगर सप्लाई बाधित होती है, तो चीन के साथ ईरान के रिश्ते बिगड़ सकते हैं। डेटा के मुताबिक, 2025 में ईरान ने इस रास्ते से 2018 के बाद सबसे ज्यादा तेल ट्रांसपोर्ट किया है।

सऊदी अरब के पास ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’

होर्मुज स्ट्रेट के विकल्प के तौर पर सऊदी अरब के पास ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ है। यह 746 मील लंबी पाइपलाइन देश के एक छोर से दूसरे छोर (रेड सी टर्मिनल) तक जाती है।

इसके जरिए रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा सकता है। भारत और अन्य एशियाई देश इस तरह के वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षित भंडारों पर नजर बनाए हुए हैं।

भारत दूसरे देशों से बढ़ा रहा तेल का इम्पोर्ट

सरकार इस संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायर्स से तेल की खरीदारी बढ़ा रहा है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर भारत अपने ‘स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) से भी तेल निकाल सकता है।