नागौर में 25 जनवरी को मिले 10 टन विस्फोटक मामले में एनआईए ने जांच पूरी कर ली है। अब एनआईए कोर्ट में इसका केस चलाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में बुधार को एनआईए की टीम कलेक्ट्रेट पहुंची और इसकी प्रक्रिया शुरू की।
बताया जा रहा है कि आरोपी सुलेमान खान समेत चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की तैयारी कर ली है।
थांवला थाना क्षेत्र के हरसौर में 24 जनवरी को 187 कट्टों (बोरियों) में 9,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट रखा मिला था। मौके से सुलेमान खान (50) को गिरफ्तार किया गया था। वह हरसौर का रहने वाला है और उस पर पहले से 3 केस दर्ज हैं।
पूछताछ के बाद SIT ने लाइसेंसशुदा मैगजीन संचालक भरत कुमार (नागौर), देवराज मेड़तिया (बुटाटी, नागौर) और महेंद्र पाल सिंह (कड़ेला, नागौर), बंसीलाल बंजारा (बस्सी, चित्तौड़गढ़), को गिरफ्तार किया है।
छापा मारकर करीब 10 टन अमोनियम नाइट्रेट, 8750 डेटोनेटर और 18000 मीटर फ्यूज वायर बरामद किया था। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले की जांच गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए को सौंपी गई थी।
चार लोगों की टीम पहुंची नागौर
मंगलवार देर शाम एनआईए की चार सदस्यीय टीम गोपनीय तरीके सेनागौर जिला मुख्यालय पहुंची। बुधवार सुबह से ही टीम कलेक्ट्रेट कार्यालय में जमी रही।
दिनभर चली इस कवायद में टीम ने जिला मजिस्ट्रेट सेविस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए दस्तावेज प्रक्रिया में जुटी रही।
कलेक्ट्रेट से अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने केबाद ही एनआईए इस मामले के सभी सबूत, एफएसएल रिपोर्ट और आरोपियों के बयान के साथ एनआईए अदालत मेंचार्जशीट पेश करेगी।
एसआईटी की जांच में भी हुए थे खुलासे
एसआईटी की जांच में सामने आया था कि आरोपी देवराज मेडतिया ने लाइसेंस सरेंडर करने के बाद नर्सिंगकर्मी बनकर पर्दे के पीछे से सप्लाई चेन चलाई। वहीं चित्तौड़गढ़ निवासी बंसीलाल बंजारा, महेंद्र पाल और भरत अपने लाइसेंस का दुरुपयोग कर सुलेमान को अवैध तरीके से बारूद बेच रहे थे।
सुलेमान इन सप्लायरों से कम दाम में बारूद खरीदकर उसे आगे अवैध रूप से बेचने का काम करता था। जिला मजिस्ट्रेट से मंजूरी मिलते ही एनआईए साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट के साथ अदालत में चार्जशीट पेश करेगी।
ये था नेटवर्क: देवराज बना नर्सिंगकर्मी, सुलेमान था मास्टरमाइंड
आरोपी देवराज मेड़तिया ने 2 साल पहले लाइसेंस सरेंडरकर दिया था और कुचेरा में नर्सिंगकर्मीबन गया। लेकिन, वह पर्दे के पीछे सेसप्लाई चेन चला रहा था।
चित्तौड़गढ़ निवासी बंसीलाल बंजारा (3000 टनक्षमता की मैगजीन वाला) सहित महेंद्रपाल और भरत अपने लाइसेंस का दुरुपयोग कर सुलेमान को अवैध तरीकेसे बारूद बेच रहे थे।
सुलेमान खान इन सप्लायरों से कम दाम में बारूद लेकर आगे बेचता था।
दरअसल, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत किसी भी आरोपी पर कोर्ट में ट्रायल शुरू करनेसे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी को सरकार या सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) कीअनुमति अनिवार्य है। एनआईए ने बारूद की प्रकृति और खतरे का आकलन किया।
सबूतों के आधार पर अब जिला मजिस्ट्रेट से केस चलाने की परमिशन ली जा रही है। मंजूरी मिलते ही एनआईए कोर्ट में कानूनी रूप से अभियोग पत्र दायर कर सकेगी।