नगर निगम कमिश्नर को पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग के आदेशों की अनदेखी करना महंगा पड़ गया है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने निगम कमिश्नर को शोकॉज नोटिस में कहा है कि आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए?
आयोग ने कहा है कि बार-बार कहने के बावजूद रिपोर्ट न देना सीधे तौर पर उनके आदेशों की अवहेलना है। अगली तारीख तक अगर जवाब नहीं दिया तो आयोग एक्स पार्टी डिसिजन देकर आपके खिलाफ कार्रवाई के लिए हायर अथॉरिटी को ऑर्डर जारी कर देगा।
दरअसल 27 फरवरी 2025 में रोहित सभरवाल ने शहर की सड़कों पर बने गड्ढों के कारण हो रही दुर्घटनाओं के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग को एक शिकायत दी थी। आयोग इस मामले की सुनवाई कर रहा है और बार-बार नगर निगम कमिश्नर से इसकी रिपोर्ट तलब की जा रही थी।
आयोग ने 10 जुलाई 2025 को निगम कमिश्नर को इस केस में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। उसके बाद आयोग ने कई रिमाइंडर भेजे, लेकिन निगम कमिश्नर ने कोई रिपोर्ट पेश नहीं की। अफसरों की इस लापरवाही को देखते हुए अब आयोग ने कमिश्नर को शोकॉज नोटिस जारी किया है।
मानवाधिकार आयोग के नोटिस की अहम बातें
- जानबूझकर आदेशों की अनदेखी: आयोग के चेयरमैन जस्टिस संत प्रकाश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निगम कमिश्नर को अपनी बात रखने के पर्याप्त मौके दिए गए थे। इसके बावजूद रिपोर्ट न देना यह दर्शाता है कि आदेशों की अवहेलना जानबूझकर की जा रही है।
- धारा 16 के तहत कार्रवाई: आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण कानून की धारा 16 के तहत यह शोकॉज नोटिस जारी किया है। इस धारा के तहत नोटिस तब जारी किया जाता है जब आयोग किसी को बार बार पक्ष रखने का मौका देता है और वो जवाब नहीं देता है।
- एकतरफा फैसले की चेतावनी: आयोग ने इस नोटिस में साफ लिखा है कि अगर अगली सुनवाई तक जवाब नहीं आया, तो आयोग एकतरफा (Ex-parte) कर्रवाई करेगा और अपना फैसला सुना देगा।
- हायर अथॉरिटी को जानकारी: आयोग ने इस बार नगर निगम कमिश्नर को जो नोटिस जारी किया है। उसकी एक कॉपी पंजाब के लोकल बॉडी सेक्रेटरी को भी भेजी गई है, ताकि शासन स्तर पर भी इस लापरवाही की जानकारी रहे।
- अगली सुनवाई 18 मई को होगी: आयोग ने इस मामले की अगली तारीख 18 मई 2026 तय की है। अब निगम कमिश्नर को इस तारीख से पहले आयोग को यह बताना होगा कि उन्होंने रिपोर्ट दाखिल क्यों नहीं की। अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो कमिश्नर को बड़ी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।रोहित सभरवाल, आरटीआई एक्टिविस्ट।
रोहित सभरवाल की शिकायत की 4 बड़ी बातें…
1. जगराओं पुल पर हादसा, वकील की मौत: रोहित सभरवाल ने अपनी शिकायत में बताया था कि जगराओं पुल के पास सड़क पर बने एक गड्ढे की वजह से भयानक एक्सीडेंट हुआ। इसमें एक वकील की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर निगम ने समय पर ‘पैच वर्क’ किया होता, तो आज वो वकील जिंदा होते।
2. अफसर देते हैं झूठा जवाब: शिकायत में कहा गया है कि जब भी कोई नागरिक खराब सड़कों की शिकायत करता है, तो निगम के अफसर कागजों पर उसे ‘ठीक’ दिखा देते हैं। वे बहाना बनाते हैं कि गड्ढे भर दिए गए हैं और शिकायत की फाइल बंद कर देते हैं, जबकि जमीन पर हालात जस के तस बने रहते हैं।
3. टू-व्हीलर वालों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ बनी सड़कें: सभरवाल ने तब आयोग को बताया था कि लुधियाना की सड़कों पर अब इतने गड्ढे हो गए हैं कि इन्हें गिनना मुश्किल है। ये गड्ढे खासकर बाइक और स्कूटर चलाने वालों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। खुलेआम हादसों को न्योता दिया जा रहा है, लेकिन निगम प्रशासन गहरी नींद में सोया है।
4. जिम्मेदारी तय कर हो सख्त एक्शन: सभरवाल ने मांग की थी कि केवल सड़कों की मरम्मत से काम नहीं चलेगा। उन लापरवाह अफसरों की पहचान की जाए जिनकी ड्यूटी इन सड़कों को ठीक रखने की थी। उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाए।