सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए ये उपाय भी हो रहे
राज्य में सड़क हादसों को कम करने के लिए करीब 800 जगहों पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाया जाएगा। 10 हजार किमी लंबे एनएच-एसएच पर ये स्थान खतरनाक के तौर पर चिह्नित हैं।
अब इन जगहों पर ट्रैफिक की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। आईटीएमएस का सबसे मुख्य फायदा यह होगा कि व्यस्त सड़कों पर यातायात के अनुसार सिग्नल खुद ब खुद बदलेगा। परिवहन विभाग की मानें तो चौक-चौराहों और उच्च जोखिम वाले स्थानों पर कॉरिडोर पर आईटीएमएस लगाने के लिए काम शुरू हुआ है। इस परियोजना के संबंध में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में 28 अप्रैल को एक बैठक होनी है।
परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि आईटीएमएस के लागू होने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। सड़क हादसे कम होंगे। तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण रहेगा। विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसके अलावा लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने आम जनता से सावधानी बरतने और फुट ओवरब्रिज का उपयोग करने की अपील की। अवैध बालू ढोने वाले ट्रक और ट्रैक्टर को भी आईटीएमएस से ट्रैक किया जाएगा।
इसमें एआई आधारित ई-चालान, यातायात नियंत्रण, घटना पहचान, निगरानी, चेहरे की पहचान प्रणाली शामिल है। इसके जरिए एनएच-एसएच, प्रमुख शहरों और चयनित टोल प्लाजा पर ई-वे बिल सत्यापन, खनन सामग्री ले जाने वाले वाहनों की ट्रैकिंग व प्रभावी निगरानी होगी। .राज्य में 1000 ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त किया जा रहा है। .26 हजार से अधिक जेब्रा क्रॉसिंग बनाई जाएगी। .नेशनल और स्टेट हाइवे पर सीसीटीवी कैमरे से मॉनिटरिंग। .नेशनल व स्टेट हाइवे पर ई-रिक्शा को परिचालन पर रोक लगेगी
अवैध बालू ढोने वाले वाहनों की भी ट्रैकिंग होगी
हर जिले में निगरानी केंद्र होगा इस परियोजना के तहत सड़क यातायात को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक सिस्टम तैयार किया जाएगा। हर जिले में यातायात प्रबंधन और अवलोकन केंद्र बनाए जाएंगे। सॉफ्टवेयर, डाटा सेंटर, बैकअप सिस्टम, नेटवर्क और बिजली व्यवस्था का विकास होगा। जरूरी मानव संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू और सुरक्षित बनी रहे।