कभी अमिताभ बच्चन के बचपन का करते थे रोल, अब इस सेक्टर में बनाई पहचान; उभरते कलाकारों के लिए करेंगे ये काम

अभिनेता रवि वलेचा 80 के दशक की कई फिल्मों में जूनियर अमिताभ बच्चन का रोल करने के लिए मशहूर थे। उन्होंने फिल्मों से शुरुआत तो की, मगर बड़े होने पर उन्होंने एक अलग रास्ता चुना। उनकी जिंदगी कई मोड़ से गुजरी है। हर मोड़ पर उन्होंने कामयाबी हासिल की।

300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

    • रवि ने सिर्फ चार साल की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था।
    • वह अपनी पीढ़ी के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले बाल कलाकार में से एक बन गए और उन्होंने हिंदी, तमिल और तेलुगु समेत कई भाषाओं और इंडस्ट्रीज की 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
    • हालांकि एक्टिंग उनकी जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा थी।
    • फिल्मों से दूर होने के बाद, रवि ने खाने-पीने की चीजों में अपनी दिलचस्पी को आगे बढ़ाया।
    • अब अपना कामयाब करियर बनाया है।
      रवि की पहली फिल्म कौन सी थी?
      सिनेमा में उनका सफर ‘फकीरा’ फिल्म के सेट पर अभिनेता शशि कपूर के साथ हुई एक मुलाकात से शुरू हुआ था।
      फिल्म में उन्होंने शबाना आजमी के चार साल के बेटे का किरदार निभाया। छह साल की उम्र तक, रवि ‘चीता मेरा यार’ में काम कर चुके थे। हालांकि, यह फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई।

      कैसे मिला जूनियर अमिताभ का खिताब?
      जैसे-जैसे उनका करियर आगे बढ़ा, वे कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाने के लिए खास तौर पर पहचाने जाने लगे। उनकी शक्ल-सूरत और सुपरस्टार के साथ लगातार काम करने की वजह से उन्हें ‘जूनियर अमिताभ बच्चन’ का निकनेम मिला।

      रवि की कितनी होती थी कमाई?
      एक चाइल्ड एक्टर के तौर पर उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ उन्हें काफी अच्छी कमाई भी हुई। 1980 के दशक में अपने करियर के पीक पर रवि को कथित तौर पर हर दिन 3000 से 3500 रुपये मिलते थे। यह रकम आज के हिसाब से महंगाई को देखते हुए लगभग 75,000 से 90,000 रुपये के बराबर होती। रवि के मुताबिक बिना बार-बार टेक लिए सीन करने की उनकी काबिलियत एक और बड़ी वजह थी जिसकी वजह से डायरेक्टर उनके साथ काम करना पसंद करते थे।

      रवि का क्यों खोया बचपन?
      रवि ने एक्सप्लोर वन से बातचीत में बताया ‘मैंने बहुत कुछ खो दिया। जिंदगी में कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। मैंने नाम, शोहरत और पैसा कमाया। मगर मैंने अपना बचपन खो दिया क्योंकि मैं 4 साल की उम्र से 18 साल की उम्र तक काम कर रहा था।’

      लीड एक्टर के तौर पर लॉन्च नहीं हुए रवि
      एक चाइल्ड एक्टर के तौर पर 14 साल बिताने के बाद, रवि ने आखिरकार लाइमलाइट से दूर होने का फैसला किया। उनका कहना है ‘यह एक सोच-समझकर लिया गया ब्रेक था। मैंने मनमोहन देसाई की कई फिल्मों में काम किया था, जिनमें से आखिरी ‘गिरफ्तार’ (1985) थी। वह मुझे बहुत पसंद करते थे। इसलिए इस फिल्म के बाद उन्होंने मुझसे लाइमलाइट से दूर रहने और अपनी पर्सनैलिटी पर काम करने के लिए कहा और कहा कि वह मुझे लीड स्टार के तौर पर लॉन्च करेंगे। दुर्भाग्य से इसी दौरान उनका निधन हो गया और उसके बाद मुझे कभी लॉन्च नहीं किया गया।’

      रवि ने अलग चुना करियर
      लीड रोल में आने की संभावना खत्म होने के बाद, रवि ने एक बिल्कुल अलग करियर बनाने का फैसला किया।
      बचपन में एक्टिंग की वजह से शिक्षा न मिल पाने के कारण, उन्होंने आखिरकार कुलीनरी आर्ट्स (खाना पकाने की कला) में अपनी दिलचस्पी के चलते मुंबई में पढ़ाई की।