करोड़पति कारोबारी का बेटा कानपुर जेल में गुमसुम:घर में एसी में रहने वाला 5 दिन से करवटें बदल रहा; पत्नी की रिहाई पर खुश हुआ

कानपुर में करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के आरोप में उनका बेटा सुब्रत 5 दिन से जेलमें बंद है। घर में सुख-सुविधाओं के बीच रहने वाले सुब्रत की जेल में हालत खराब है। जेल अधीक्षक राजेश पांडेय ने बताया कि अब तक घर-परिवार का कोई सदस्य भी उससे मिलने नहीं पहुंचा।

जेल अफसरों के मुताबिक, पहले दिन सुब्रत काफी तनाव में दिखा। वह पूरे दिन गुमसुम बैठा रहा। किसी भी बंदी से ज्यादा बातचीत नहीं की। रात में उमस और गर्मी की वजह से काफी बेचैन रहा।

जेल प्रशासन ने खाने के लिए पूछा, तो उसने मना कर दिया। पूरी रात कुछ नहीं खाया। अगले दिन उसे नाश्ते में दलिया, गुड़ और चाय दी गई। हालांकि, अब वह धीरे-धीरे दूसरे बंदियों से बातचीत करने लगा है।

सुब्रत को फिलहाल मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। यहां नए बंदियों की शुरुआती निगरानी और स्वास्थ्य जांच की जाती है। 14 दिन बाद जेल नियमों के मुताबिक उसकी बैरक निर्धारित की जाएगी।

शालू की रिहाई की खबर सुनकर सुब्रत खुश हुआ

जेल अफसरों के मुताबिक, सुब्रत जेल में बंद शालू के बारे में लगातार पूछता था। उससे मिलने की इच्छा भी जताई थी। 28 सितंबर को शालू के जेल से रिहा होने की बात पता चली, तो सुब्रत काफी खुश दिखा।

वहीं, 28 सितंबर की रात करीब 1 बजे शालू जेल से रिहा होकर लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित अपने घर पहुंची। परिवार के मुताबिक, घर पहुंचते ही वह सबसे पहले अपने बेटे श्रीजय के पास गई। उस समय बेटा सो रहा था। शालू ने उसके माथे को चूमा और करीब 10 मिनट तक उसे निहारती रही।

करीब 21 दिन बाद बेटे को सामने देखकर शालू की आंखों से आंसू बहने लगे। शालू अपनी मां के गले लगकर भी काफी देर तक रोती रही। बेटी को रोता देखकर पिता नरेश अरोड़ा भी अपने आंसू नहीं रोक सके।

सुबह मां को देखते ही लिपट गया श्रीजय

पिता नरेश अरोड़ा ने बताया- 29 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे श्रीजय की नींद खुली, तो सामने मां शालू को देखकर वह बेहद खुश हो गया। उनके गले से लिपट गया। इसके बाद श्रीजय पूरे दिन मां के साथ ही रहा।

एक पल के लिए भी उन्हें अपनी आंखों से दूर नहीं होने दे रहा था। शालू ने अपने हाथ से बेटे को खाना खिलाया। इसके अलावा मंगलवार को पूरे दिन रिश्तेदार और परिचित शालू से मिलने के लिए घर भी आते रहे।

24 सितंबर को जेल भेजा गया था सुब्रत

24 सितंबर को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने विनीत मिनोचा हत्याकांड का खुलासा करते हुए उनके बेटे सुब्रत मिनोचा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस पूछताछ में सुब्रत ने बताया था कि उसके पिता के कई महिलाओं से संबंध थे।

वह उन पर काफी पैसा खर्च करते थे। सुब्रत का कहना था कि जब वह पिता से पैसे मांगता था तो वे उसे पैसे देने से मना कर देते थे। उसे डर था कि उसके पिता किसी महिला से शादी कर उसे घर न ले आएं। इससे संपत्ति में एक और हिस्सेदार बन सकता था।

पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने पूछताछ में कहा था कि उसे पिता की हत्या का कोई मलाल नहीं है। हालांकि, उसे इस बात का दुख है कि उसके पिता को दर्दनाक तरीके से मारा गया।

5 सितंबर को कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या हुई थी

इंदिरा नगर में रतन ऑर्बिट के फ्लैट C-104 निवासी विनीत मिनोचा की 5 सितंबर को हत्या हुई थी। दवा कारोबारी को 17 चाकू मारे गए थे। 24 सिंतबर को पुलिस ने बेटे सुब्रत को पिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सुब्रत ने मीडिया के सामने कहा था- पिता के कई महिलाओं से संबंध थे, इसी वजह से मां पुनीता उनके साथ नहीं रहती थीं।

सुब्रत के मुताबिक, उसे डर था कि कोई महिला उसके घर आकर ये दावा न कर दे कि वह विनीत के बच्चे की मां बनने वाली है। इसलिए उसने खुद अपने पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के जरिए पिता विनीत मिनोचा की हत्या कराई थी।

कारोबारी की हत्या की शुरुआती जांच में पुलिस ने शालू को हत्यारोपी मानते हुए जेल भेज दिया था। लेकिन, बाद में पुलिस की जांच में शालू निर्दोष साबित हुई थी। इसके बाद शुक्रवार (25 सितंबर) को पुलिस ने शालू के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई कर शालू को जेल से तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था।

सिलसिलेवार पढ़िए, सुब्रत ने पत्नी को पिता की हत्या में कैसे फंसाया?

  • DCP वेस्ट एसएम कासिम आबिदी इस पूरे मामले पर बताते हैं कि- सुब्रत अपने पिता विनीत मिनोचा से नफरत तो लंबे समय से करता था। लेकिन, उन्हें मारने की प्लानिंग वो पिछले 1-2 महीने से करने लगा था। वो जानता था कि पापा को रास्ते से हटाने के बाद उनके भाई यानी कि सुब्रत के चाचा पुनीत उसके पीछे आएंगे। भाई की मौत की सच्चाई जानने की पूरी कोशिश करेंगे। हो सकता है, प्रॉपर्टी को लेकर भी झगड़ा पैदा हो जाए।
  • इसलिए सुब्रत चाहता था कि एक तीर से दो निशाने लगे। पापा की हत्या और चाचा को कातिल बना दिया जाए। उसने अपना यही प्लान विशाल से बताया। विशाल सुब्रत की दुकान में नौकरी करता था, जिसे 7 महीने पहले विनीत ने निकाल दिया था।
  • प्लान करते वक्त दोनों यह भी जानते थे कि पुनीत की शहर में अच्छी पकड़ है। वह खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए सारे जतन करेगा। इसलिए करीब 25 दिन पहले साजिश में बदलाव किया गया।
  • सुब्रत ने अब अपनी ही पत्नी को साजिश के मास्टरमाइंड की तरह पेश करने का फैसला किया। सबूत क्रिएट करने के लिए हत्या से करीब 20 दिन पहले पत्नी शालू को लेकर परेड चौराहा पहुंचा। यहां उसको विशाल मिला। तीनों कार में एक साथ बड़ा चौराहा स्थित जेड स्क्वायर मॉल में शॉपिंग करने गए। सुब्रत खुद कार में बैठा रहा, जबकि शालू और विशाल को मॉल से शॉपिंग करने भेज दिया।
  • जिससे लोगों के सामने विशाल शालू के साथ दिखे। पुलिस जब बाद में मोबाइल लोकेशन देखे, तब विशाल के साथ शालू की लोकेशन सामने आए। बाकी की दोनों लोकेशन पर पत्नी को साथ रखा, खुद कार में ही बैठा रहा। पब्लिक के सामने भी विशाल और शालू को ही भेजा।