एशियन गेम्स के सिल्वर से ओलंपिक गोल्ड तक का लक्ष्य:ऐश्वर्य बोले-जीत और हार दोनों से सीखते हैं, आशी ने कहा- प्रेशर में सेल्फ-बिलीफ सबसे जरूरी

एशियन गेम्स-2026 में शूटिंग के 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में भारत के लिए रजत पदक जीतकर मध्यप्रदेश के स्टार शूटर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर और आशी चौकसे भोपाल लौटे। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी तैयारियों, प्रतियोगिता के दबाव, जापान के मौसम और ट्रेनिंग के दौरान आई चुनौतियों को साझा किया। उनका अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रदर्शन के साथ ओलंपिक कोटा हासिल करना है।

ऐश्वर्य: देश के लिए मेडल जीतना गर्व की बात

ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने कहा कि एशियन गेम्स में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतकर काफी खुशी हुई। इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की थी। मेडल जीतने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपने भैया को फोन कर बात की। परिवार से बात करने के बाद खुशी का अहसास और बढ़ गया।

ओलंपिक में वर्ल्ड मेडल लक्ष्य, अभी वर्ल्ड चैंपियनशिप पर फोकस

ऐश्वर्य ने कहा कि उनका लक्ष्य ओलंपिक में वर्ल्ड मेडल जीतना है। फिलहाल अगले महीने होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप सबसे बड़ा लक्ष्य है, क्योंकि इसमें ओलंपिक कोटा भी मिलेगा। उनके मुताबिक एशियन गेम्स का मेडल खुशी देने वाला है, लेकिन खिलाड़ी के लिए अगली चुनौती पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।

पिछली बार शानदार प्रदर्शन, इस बार सिल्वर से मिली सीख

पिछले एशियन गेम्स के प्रदर्शन से तुलना पर ऐश्वर्य ने कहा कि पिछली बार पूरे गेम्स में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। इस बार सिल्वर मेडल मिला। हालांकि वे इसे निराशा के तौर पर नहीं देखते। उन्होंने कहा कि खेल में जीत और हार दोनों से सीख मिलती है और यही प्रक्रिया खिलाड़ी को लगातार बेहतर बनाती है।

रैंकिंग का पता बाद में चलता है

फाइनल के दौरान मेडल पक्का होने के क्षण को लेकर ऐश्वर्य ने बताया कि शूटिंग के दौरान खिलाड़ियों का पूरा ध्यान अपने प्रदर्शन पर रहता है। उस समय रैंकिंग की स्थिति हमेशा पता नहीं चलती। पीछे आने के बाद परिणाम और रैंकिंग की जानकारी मिलती है और तभी पता चलता है कि कौन सा मेडल मिला है।

भोपाल की इंडोर रेंज से मिला फायदा

ऐश्वर्य ने बताया कि 50 मीटर शूटिंग रेंज सामान्य तौर पर ओपन होती है, जबकि इंडोर फाइनल रेंज देश में कम हैं। मध्यप्रदेश की इंडोर फाइनल रेंज में उन्होंने काफी ट्रेनिंग की है। इससे एशियन गेम्स में वहां के वातावरण में खेलने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शूटिंग के लिए अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है।

आशी: मेडल के साथ रिलैक्सेशन, लेकिन रुकने का समय नहीं

आशी चौकसे ने कहा कि एशियन गेम्स का मेडल लेकर भोपाल पहुंचना अच्छा लग रहा है। लंबे समय से चल रही मेहनत के बाद मेडल मिलने से रिलैक्सेशन महसूस हो रहा है। हालांकि अब रुकने का समय नहीं है। आगे कई बड़े मुकाबले हैं और फोकस उन पर है।

प्रेशर आएगा ही, ब्रीदिंग और सेल्फ-बिलीफ जरूरी

आशी ने बताया कि शूटिंग में दबाव के दौरान ब्रीदिंग, फिजिकल एस्पेक्ट और स्टेबिलिटी पर ध्यान दिया जाता है। बड़े मुकाबलों में प्रेशर स्वाभाविक है, लेकिन उसे संभालना जरूरी है। उनके मुताबिक ब्रीदिंग के साथ सेल्फ-बिलीफ सबसे महत्वपूर्ण है। खुद पर भरोसा हो तो दबाव के बावजूद खिलाड़ी मुकाबले में डटा रह सकता है।

जापान जाने से पहले भोपाल में किया कैंप

आशी ने बताया कि एशियन गेम्स की तैयारी कई साल से चल रही थी। जापान जाने से पहले भोपाल में कैंप लगाए गए थे। उस समय भोपाल का मौसम जापान जैसा था, जिससे वहां के वातावरण में ट्रेनिंग करने का फायदा मिला। शूटिंग में तकनीकी पहलू ज्यादा होने के कारण तैयारी लगातार चलती रहती है।

दो घंटे की ट्रैवलिंग से रिकवरी का समय कम हुआ

आशी के मुताबिक जापान में उनका वेन्यू काफी दूर था और वहां पहुंचने में करीब दो घंटे लगते थे। मुकाबले सुबह होते थे, इसलिए यात्रा के बाद मैच और रिकवरी दोनों चुनौती बने। उन्होंने बताया कि भारतीय दल 16 तारीख को जापान पहुंच गया था, जबकि उनका मुकाबला 26 तारीख को था। इसके बावजूद मुकाबलों के दौरान ट्रैवलिंग की वजह से रिकवरी के लिए समय कम मिला।

30-35 देशों में खेल चुकीं, हर जगह अलग चुनौती

आशी ने बताया कि वे करीब 30 से 35 देशों में खेल चुकी हैं। अलग-अलग देशों में मौसम और खान-पान बदलता है। वेजिटेरियन होने के कारण भोजन में बदलाव भी चुनौती रहता है। उनके अनुसार हर इंटरनेशनल गेम्स की अपनी चुनौतियां होती हैं और खिलाड़ी को उसी के मुताबिक तैयारी करनी पड़ती है।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में ओलंपिक कोटा अगला लक्ष्य

आशी ने कहा कि अब उनका फोकस वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है। इसमें ओलंपिक कोटा हासिल करने का मौका मिलेगा। इसके बाद पूरे साल होने वाले मुकाबले भी ओलंपिक की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि मेन गोल ओलंपिक है और उससे पहले ओलंपिक कोटा हासिल करना अगला लक्ष्य है।

चीन के खिलाड़ियों से मातृभाषा को लेकर सीख

चीन की शूटिंग टीम के बारे में आशी ने कहा कि उनके खिलाड़ियों में अपने देश के प्रति यूनिटी और डेडिकेशन दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि चीन के खिलाड़ी आमतौर पर इंटरव्यू अपनी भाषा में देते हैं। आशी के मुताबिक इससे अपनी मातृभाषा में बात करने और उसे महत्व देने की सीख मिलती है।