पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर बिजली बिलों के 2,382.40 करोड़ रुपए बकाया हैं। सरकारी विभागों की ओर से बिजली बिलों का भुगतान नहीं किए जाने और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) पर बढ़ते वित्तीय बोझ का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है।
हाईकोर्ट ने मंगलवार को इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए पंजाब के मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव को स्पष्ट करना होगा कि सरकारी विभागों के बिजली बिलों का भुगतान लंबित क्यों है और बिजली निगम को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेने की नौबत क्यों आ रही है।
यह बकाया राशि जुलाई 2026 के अंत तक की बताई गई है। मामले में दायर जनहित याचिका में पंजाब सरकार से अपने विभागों की ओर बकाया बिजली बिलों की पूरी राशि का भुगतान करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकारी विभागों पर बिजली बिलों की इतनी बड़ी रकम बकाया होने का मुद्दा गंभीर है।
इसका असर बिजली निगम की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट से सरकार को बकाया राशि का भुगतान करने और बिजली निगम को रकम वसूलने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
सुनवाई योग्य होने पर बाद में विचार
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, इस सवाल पर उचित समय पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए मुद्दे जनहित से जुड़े हुए हैं। इसलिए राज्य सरकार को लगाए गए आरोपों पर तथ्यों के आधार पर अपना जवाब देना होगा।
हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव से हलफनामा दाखिल कर बकाया बिजली बिलों और PSPCL की वित्तीय स्थिति से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सरकार को अदालत के सामने यह बताना होगा कि उसके विभिन्न विभागों पर बिजली बिलों की इतनी बड़ी राशि क्यों लंबित है और इस बकाया रकम के भुगतान के लिए क्या स्थिति है।
जुलाई 2026 तक 2,382.40 करोड़ बकाया
जसकीरत सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर जनहित याचिका में बताया गया है कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर 2,382.40 करोड़ रुपए के बिजली बिल बकाया हैं। यह आंकड़ा जुलाई 2026 के अंत तक का है। याचिका में मांग की गई है कि सरकार केवल मूल बकाया राशि ही नहीं, बल्कि उस पर लागू सरचार्ज और अन्य खर्चों का भी भुगतान करे।
याचिका का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों से बिजली बिलों की बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करना है। इसमें कहा गया है कि जब सरकारी विभाग ही बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो बिजली निगम के सामने बकाया राशि वसूलने का सवाल खड़ा होता है। इसी वजह से अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।
बकाया वसूलने के निर्देश देने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से PSPCL को सरकारी विभागों से बकाया बिजली बिल वसूलने के लिए निर्देश देने की मांग की है। याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि बिजली बिलों का भुगतान नहीं करने वाले विभागों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
याचिका में मांग की गई है कि जो सरकारी विभाग बिजली बिलों का भुगतान नहीं करते, उनके बिजली कनेक्शन काटने का विकल्प भी अपनाया जाए। इसके लिए कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार कदम उठाने की मांग की गई है।
PSPCL पर कर्ज का बोझ सवालों के घेरे में
इस मामले में सरकारी विभागों पर बकाया बिजली बिलों के साथ PSPCL की वित्तीय स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिका में सवाल किया गया है कि जब सरकारी विभागों से बिजली बिलों की बड़ी रकम वसूलनी बाकी है, तो बिजली निगम को कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से इस संबंध में जवाब मांगा है।