‘हम प्रयागराज से घर आ रहे थे। सोमवार को सुबह 11:40 बजे पापा ने फोन किया और पूछा कि कहां पहुंची हो। मैंने उन्हें अपनी लोकेशन बताई। इसके बाद उन्होंने कहा कि तुम्हें लेने स्टेशन आऊंगा। तुम्हारी पसंद का खाना बनवाकर रखा है।
करीब एक घंटे बाद मुझे सूचना मिली कि PNG गैस ब्लास्ट में पापा की मौत हो गई है। यह सुनते ही मैं अंदर से टूट गई। मैं लॉ की स्टूडेंट हूं और प्रयागराज में रहकर पढ़ाई कर रही हूं। पापा मुझे जज बनाना चाहते थे।’
मुजफ्फरपुर में ये बातें श्रेया (20) ने कहीं। उनके पिता श्रीनिवास सिंह की गैस पाइपलाइन ब्लास्ट में मौत हो गई। हादसे में उनका सिर धड़ से अलग हो गया था।
वहीं, श्रीनिवास के भाई राजेश का कहना है कि यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। घटना मुजफ्फरपुर के गोबरसही की है।
मृतक की 2 बेटियां और एक बेटा है
मृतक श्रीनिवास (52) परिवार के साथ करीब 40 साल से गोबरसही में रह रहे थे। वे निजी कोचिंग संस्थान भी चलाते थे। मुजफ्फरपुर में केमिस्ट्री के टीचर के रूप में वे चर्चित थे।
मुजफ्फरपुर के अलावा वैशाली और डुमरी में भी उनकी कोचिंग चलती थी। बड़ी संख्या में छात्र उनसे शिक्षा लेते थे।
श्रीनिवास के 3 बच्चे हैं। श्रेया (20), समृद्धि (18) और आयुष (14)। पत्नी निभा देवी (45) हाउस वाइफ हैं। सोमवार को आयुष की स्कूल की फीस जमा करने के लिए श्रीनिवास घर से निकले थे, तभी उनके साथ हादसा हुआ। फीस की रसीद उनके पॉकेट से मिली थी।
‘पापा को घूमने का शौक था, बुलेट बाइक लेना चाहते थे’
बेटे आयुष ने कहा कि सुबह पापा हमारे साथ थे। सब कुछ ठीक था। उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हारे स्कूल से फीस जमा कर आता हूं। हमें अंदाजा नहीं था कि हमारी उनसे आखिरी मुलाकात होगी। पापा ने अपने लिए कई सपने देख रखे थे।
पापा को घूमने का शौक था। वे बुलेट बाइक खरीदना चाहते थे, लेकिन वे हमारी इच्छा पूरी करते रह गए। उनके अपने सपने अधूरे रह गए।
‘सोचा था घर पर पापा के साथ खूब सारी बातें करूंगी’
बेटी श्रेया कहती हैं कि दिवाली और छठ की छुटि्टयों में घर आ रही थी। मेरी ट्रेन मुजफ्फरपुर जंक्शन पर हादसे के 4 घंटे के बाद शाम 4 बजे पहुंची थी। पापा मुझे लेने के लिए आने वाले थे, पर उनके साथ तो हादसा हो गया।
पापा से आखिरी बात हुई थी तब मैंने सोचा था कि घर जाऊंगा, पापा से मिलूंगी। उनके साथ खूब सारी बातें करूंगी। साथ बैठकर खाना खाऊंगी, लेकिन अब पापा हमारे साछ नहीं रहे।
‘गैस रिसाव के बाद भी खुदाई का काम नहीं रोका गया’
मृतक श्रीनिवास के भाई राजेश कुमार सिंह ने बताया कि घटना से करीब एक घंटे पहले गैस का रिसाव हो रहा था। इसकी सूचना संबंधित लोगों को दी गई थी।
नाला निर्माण के लिए जेसीबी मशीन से खुदाई की जा रही थी। खुदाई के दौरान PNG पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई, लेकिन गैस रिसाव के बावजूद काम नहीं रोका गया। न ही सड़क पर बैरिकेडिंग की गई। इसी दौरान ब्लास्ट हुआ। घर से कुछ ही दूरी पर भाई थे, धमाके में उनकी जान चली गई।
‘यह हादसा नहीं, हत्या है’
श्रीनिवास के भाई ने इसे इरादतन हत्या जैसा मामला बताया है। निर्माण कार्य से जुड़ी एजेंसियों और संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण विभाग के तहत नाला निर्माण का काम कराया जा रहा था, जबकि जमीन के नीचे PNG गैस पाइपलाइन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की थी।
दोनों विभागों और निर्माण कार्य से जुड़ी एजेंसी के बीच समन्वय होना चाहिए था। पाइपलाइन के आसपास खुदाई से पहले उसकी स्थिति की जानकारी लेना और सुरक्षा के इंतजाम करना जरूरी था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? समय पर सड़क बंद कर दी जाती तो यह हादसा नहीं होता।
‘ऐसा धमाका हुआ, जैसे कि बम फटा हो’
जहां गैस रिसाव हो रहा था वहां से 2 घर बाद वाले मकान में अमित कुमार रहते हैं। अमित ने कहा कि मैं किचन में हाथ धो रहा था। अचानक ऐसा धमाका हुआ, जैसे मानों कोई बड़ा बम फटा हो।
घर की खिड़कियां-दरवाजे गिरने लगे। पिता जी के पैर में चोट लगी। उन्हें मैं अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने उन्हें 18 टांके लगाए हैं।
‘ऐसा लगा जैसे कि छत की दीवार गिर रही हो’
घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर रहने वाले अविनाश कुमार ने कहा कि घटना के वक्त मैं अपने घर में ही था। अचानक इतनी तेज आवाज हुई, लगा कि घर की छत टूटकर गिर रही हो।
मैं घटनास्थल से 200 मीटर दूर था, फिर भी आवाज बहुत तेज की थी। मैं घर से बाहर निकला तो देखा पूरी कॉलोनी के लोग सड़क पर आ चुके हैं। किसी को समझ नहीं आ रहा था आखिर क्या हुआ।
सभी एक-दूसरे से पूछ रहे थे, ये कैसी आवाज है। शुरुआत में कुछ लोगों को ट्रांसफार्मर फटने की आशंका हुई। इसके बाद मैं और आसपास के कुछ लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। वहां पहुंचे तो पता चला कि पीएनजी गैस से ब्लास्ट हुआ।