आबकारी एवं कराधान विभाग में करोड़ों रुपए के शराब घोटाले और नियमों को ताक पर रखकर डिफॉल्टर फर्म को ठेके देने की पोल खोलने वाले टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा को आखिरकार पदोन्नति का तोहफा मिल गया है।
झज्जर में कार्यरत दिनेश मेहरा को पदोन्नत कर सहायक आबकारी एवं कराधान अधिकारी बना दिया गया है। हरियाणा सरकार की आबकारी एवं कराधान आयुक्त व सचिव आशिमा बराड़ की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, दिनेश मेहरा को 25 मई 2026 से नॉशनल बेसिस पर AETO पद पर पदोन्नत करते हुए तुरंत प्रभाव से पदभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
85 करोड़ के शराब घोटाले को उजागर किया था
टैक्स इंस्पेक्टर दिनेश मेहरा ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को शिकायत भेजकर विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की साठगांठ का पर्दाफाश किया था।
मेसर्स जोरबा वाइन फर्म पर फतेहाबाद के ठेकों की वर्ष 2018-19 में 34 लाख 6 हजार 800 रुपये लाइसेंस फीस और 2019-20 में 25 करोड़ रुपये बकाया थे। इसी फर्म पर हिसार के ठेकों की वर्ष 2019-20 तक करीब 11.55 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस भी बकाया थी।
इन नियमों को ताक पर रखा था
एक्साइज एक्ट 1914 के अनुसार, डिफॉल्टर घोषित फर्म अगले साल की नीलामी में भाग नहीं ले सकती। इसके बावजूद तत्कालीन DETC वीके शास्त्री की कथित मिलीभगत से जोरबा वाइन फर्म को फतेहाबाद में बिना आवश्यक कागजात 2018-19 में 21 करोड़ रुपये और 2019-20 में 38 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए। इसके अलावा 2019-20 में हिसार में 26 करोड़ का कारोबार सौंपा गया।
ACB की जांच में FIR की सिफारिश, अटकी फाइल
दिनेश मेहरा की शिकायतों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) हिसार ने गहन जांच की। 6 फरवरी 2025 को SP ACB हिसार ने अंतिम जांच रिपोर्ट में तत्कालीन DETC वीके शास्त्री और शराब ठेकेदार तरुण कुमार मेहता के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की।
20 मार्च 2025 को ADGP ACB पंचकूला (पत्र क्रमांक 4840/1-3/ACB (H)) ने मुख्य सचिव कार्यालय के विजिलेंस विभाग से FIR दर्ज करने की औपचारिक अनुमति मांगी थी।
विजिलेंस विभाग ने दिनेश मेहरा द्वारा दायर RTI (21 अप्रैल 2026) के जवाब में 27 जुलाई 2026 को बताया कि मामले की फाइल पर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लंबित है। विभाग ने माना कि आबकारी आयुक्त से मांगी गई टिप्पणी न मिलने के कारण निर्णय में देरी हो रही है।