अखिलेश यादव के एक और करीबी अजय चौधरी उर्फ संजू नागर के ठिकानों पर बागपत में आयकर के छापे

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी नोएडा के बड़े व्यापारी अजय चौधरी उर्फ संजू नागर के ठिकानों पर मंगलवार को तड़के आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की है। टीमें यहां पर सुबह पांच बजे तीन गाडिय़ों में सवार होकर पहुंची। बागपत में टीमें यहां पर महरमपुर गांव के बाहर फार्म हाउस में मौजूद हैं।

आयकर विभाग की टीम ने फार्म हाउस में प्रवेश करते ही गेट को बंद कर लिया। बागपत के गांव महरमपुर में अजय चौधरी नोएडा में बिल्डर हैं जबकि उनकी अन्य फर्म एसीई ग्रुप भी है। एसीई ग्रुप के अजय चौधरी उर्फ संजू को सपा प्रमुख का करीबी बताया जाता है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक और करीबी एसीई ग्रुप के चेयरमैन अजय चौधरी उर्फ संजू के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी जारी रही है। इनके बागपत के साथ दिल्ली, नोएडा व आगरा के प्रतिष्ठानों यानी कुल 40 जगहों पर छापा मारा गया है। अजय चौधरी को संजू नागर के नाम से भी जाना जाता है। वह एनसीआर के बड़े बिल्डर्स में से एक हैं।

बागपत के गांव महरामपुर निवासी अजय चौधरी उर्फ संजू नागर नोएडा में रहते हैं। अजय चौधरी एसीई ग्रुप के चेयरमैन हैं। मंगलवार की सुबह पांच बजे सात सदस्यीय आयकर विभाग की टीम ने अजय चौधरी के फार्म हाउस पर छापा मारा। अजय के परिवार में बड़े भाई सतीश व मां हैं। फिलहाल गांव में परिवार का कोई सदस्य नहीं है। आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजीव प्रसाद की अगुवाई में टीम आई है। टीम ने अभी जांच शुरू नहीं की है। इससे पहले अखिलेश यादव के एक और बेहद करीबी समाजवादी इत्र के निर्माता पुष्पराज जैन के कन्नौज, कानपुर और मुम्बई के ठिकानों पर आयकर विभाग की टीमों ने चार दिन तक पड़ताल की। इसी बीच पुष्पराज जैन को हिरासत में भी लिया गया है।

नौ साल पहले कराया था गांव में माता का जागरण, आए थे वीआइपी

ग्रामीणों की माने, तो अजय ने करीब नौ साल पहले गांव में माता का जागरण कराया था। जागरण में लग्जरी कारों से वीआइपी शामिल हुए थे। अजय को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का करीबी बताया जा रहा है। कुछ सपाईयों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अजय चौधरी की अखिलेश यादव के नजदीक होने का कई नेताओं ने सपा की सरकार में फायदा उठाया था। ग्रामीणों ने बताया कि अजय दीपावली पर गांव में आया था। अजय गांव में आने के दौरान गांव के लोगों से कम ही मिलता था।