पानीपत-जालंधर सिक्सलेन प्रोजेक्ट में अधूरी सुविधाएं, 60 ब्लैक स्पाट, बंद लाइटें, फिर भी वसूला टैक्स

पानीपत-जालंधर सिक्सलेन 291 किलोमीटर का प्रोजेक्ट को पूरा करने और करनाल, अंबाला और लुधियाना में तीन जगह टोल प्लाजा लगाने की राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत (एनएचएआइ) ने ही सोमा आइसोलक्स कंपनी को जिम्मेदारी दी। दस साल तक वाहन चालकों को अधूरी सुविधाओं के बावजूद तीनों टोल पर टैक्स देना पड़ा। इस दौरान कंपनी ने छह हजार करोड़ रुपये आमदनी की, लेकिन हरियाणा-पंजाब के 60 ब्लैक स्पाट पर काम नहीं किया। हाईवे के दोनों ओर सर्विस लेन पर स्ट्रीट लाइट लगाई जानी थी, जो अब लगानी शुरू की गई हैं, अभी यह जल नहीं पाई हैं।

पानीपत और करनाल के टोल 60 किलोमीटर से भी कम दायरे में हैं, जिसको लेकर विवाद उठता रहा है। सुविधाएं न होने के बावजूद टोल टैक्स वसूली का मामला लगातार दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। करनाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद संजय भाटिया ने भी 60 किलोमीटर के दायरे में उनके क्षेत्र में दो टोल होने का मामला उठाया है, जो नियमों के खिलाफ है। सांसद ने कहा कि काम बंद होने के बावजूद टोल वसूली होती रही। एनएचएआइ के अधिकारी सुविधाएं न मिलने पर सोमा आइसोलक्स को कई नोटिस जारी कर चुके थे। बाद में टेंडर को ही रद करना पड़ा। अब किसी अन्य कंपनी को तीनों टोल की जिम्मेदारी दी गई है। सोमा कंपनी को 2024 तक टैक्स वसूल करना था।

दस साल में वसूले छह हजार करोड़ 

करनाल के बसताड़ा, अंबाला के घग्गर और लुधियाना के लाडोवाल में अलग-अलग तीन टोल पर टोल टैक्स लिया जा रहा है। प्रतिमाह करीब पचास करोड़ रुपये की आमदनी होती थी। सन 2011 से लेकर 2021 तक सोमा आइसोलक्स ने यह टोल वसूल किया है। सन 2009 में जारी टेंडर के अनुसार हाईवे पर 4300 स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी थीं, लेकिन एक भी नहीं लगाई गई। इसके अलावा सड़क मरम्म्त में क्वालिटी भी सही नहीं पाई गई। साथ ही बार-बार हादसे हो रहे थे, जिसके बाद सर्वे करने के बाद हरियाणा पंजाब में 60 ब्लैक स्पाट चिन्हित किए गए। इतना ही नहीं ड्रेनेज सिस्टम को लेकर भी एनएचएआइ ने कंपनी को नोटिस जारी किया था कि बरसात में सर्विस लेन पर पानी आ जाता है।

सुविधाओं के अलावा भी एनएचएआइ और सोमा कंपनी के बीच में 550 करोड़ रुपये का हिस्सा न मिलने पर विवाद खड़ा हो गया था। सोलह प्रतिशत आमदनी का हिस्सा एनएचएआइ को देना था, जो हर साल एक प्रतिशत बढऩा था, जो पिछले साल तक 32 प्रतिशत हो गया था। पांच साल तक एनएचएआइ को हिस्सा ही नहीं मिला, जिसको लेकर रिकवरी निकाली गई थी। टेंडर रद होने के बाद सोमा आइसोलक्स ट्रिब्यूनल में जा चुकी है।

60 किलोमीटर के दायरे में कितने टोल, डाटा खंगाल रहे अधिकारी 

सांसद संजय भाटिया द्वारा लोकसभा में मामला उठाने के बाद सड़क एवं परिवहन मंत्रालय में हलचल हो गई है। सांसद ने कहा था कि उनके संसदीय क्षेत्र में दो टोल पड़ते हैं, जो 60 किलोमीटर से कम दायरे में हैं। इसी पर अब मंत्रालय के अधिकारी डाटा खंगालने में जुट गए हैं कि 60 किलोमीटर के दायरे में कितने टोल हैं।