दिल्ली में अब खड़े खड़े यूं ही कबाड़ नहीं होंगे पकड़े गए वाहन

अवैध शराब के आरोप में पकड़ी जाने वाली कारों सहित सभी वाहन अब खड़े खड़े यूं की कबाड़ नहीं होंगे। आबकारी विभाग योजना बना रहा है कि इनकी नीलामी की जगह इन्हें अंतिम इंश्योरेंस पॉलिसी की रकम के आधार पर बेच दिया जाए। इन्हें बेचने के लिए कीमत में छूट दी जाए। जिसमें पहला मौका वाहन मालिक को दिया जाए। ऐसा किया जाने से लाखों की कारें कबाड़ नहीं होंगी। सरकार काे राजस्व मिलेगा और राष्ट्रीय हानि होने से भी बचाई जा सकेगी।

जानकारी के अनुसार आबकारी द्वारा विभाग प्रति वर्ष एक हजार के करीब वाहन पकड़े जाते हैंं। इनमें अन्य वाहन तो होते ही हैं पिछले कुछ सालों में कारों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। इसका कारण कई बार अज्ञानता भी होता है। नियमों की जानकारी नहीं होने या जानबूझ कर भी लोग हरियाणा से आते समय एक से अधिक शराब की बोतल लाते पकड़े जाते हैं। क्योंकि दूसरे राज्यों से दिल्ली में आने पर एक बोतल शराब ही लाई जा सकती है। हरियाणा में शराब पर आबकारी ड्यूटी बहुत कम है। ऐसे में दिल्ली में शराब के जिस ब्रांड की बोतल 4000 रुपये की है वह बोतल हरियाणा में 2200 से 2400 तक में मिलती है। दाम में इतना ज्यादा अंतर होने पर अगर तस्करों को अलग कर दें तो अन्य लोग भी लालच में शराब लाते हैं और पकड़े जाते हैं।

दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में प्रावधान है कि यदि एक बोलत से अधिक शराब लाते कोई व्यक्ति पकड़ा जाता है तो उस पर मुकदमा तो हाेगा ही साथ ही वह वाहन भी जब्त होगा जिसमें शराब की एक भी अवैध बोतल तक पकड़ी जाती है। वाहन को पकड़े जाने पर उसकी नीलाम करने का ही प्रावधान है। गत वर्ष नीलाम किए गए वाहनों में कई महंगी कारें भी नीलाम हुईं। जो कबाड़ के भाव बिकीं। दिल्ली सरकार को भी इससे कोई खास राजस्व नहीं मिला। क्योंकि उन कारों में ढांचे के अलावा कुछ बचा नहीं था। जबकि जिस समय ये कारें पकड़ी गई थीं वे अच्छी हालत में थीं। इन परिस्थितियों को देखते हुए आबकारी विभाग ने इस तरह की योजना बना रहा है कि जब्त की गईं कारों को कबाड़ नहीं होने दिया जाए।

वहीं, विभाग का मानना है कि यदि कार को उसी के मालिक को 50 से 60 फीसद छूट देकर कार दी जाएगी तो वह उसे ले लेगा। यदि वह उसे नहीं लेता है तो फिर अन्य लोगों को कार खरीदने का मौका दिया जाएगा।