जैसलमेर में ट्रेन की चपेट में आए 6 ऊंट, मौत:2 ऊंट इंजन के पहियों में फंसे रहे, 20 मिनट ट्रैक पर खड़ी रही ट्रेन

जैसलमेर जिले के लाठी गांव के पास रेलवे ट्रैक पर रविवार देर रात पोकरण जा रही लीलण एक्सप्रेस की चपेट में आने से 6 ऊंटों की मौत हो गई।

हादसे के बाद 2 ऊंट ट्रेन के इंजन के नीचे फंस गए, जिन्हें निकालने में रेलवे कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

लाठी पुलिस थाने के सहायक उपनिरीक्षक पदमचंद गोयल ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची।

फिलहाल मौके पर शांति व्यवस्था बनी हुई है। मामले की जानकारी लाठी रेलवे स्टेशन को भी दे दी गई है।

रात में ट्रैक पार करते समय हुआ हादसा

गोरक्षक रणवीर सिंह, लाठी के अनुसार रविवार रात करीब 1 बजे ऊंटों का एक झुंड लाठी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। उसी समय जैसलमेर से चली लीलण एक्सप्रेस वहां पहुंच गई।

ट्रेन की तेज आवाज और हेडलाइट की रोशनी से ऊंट घबरा गए और इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान ऊंट ट्रेन की चपेट में आ गए।

इनमें से 5 ऊंटों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक घायल ऊंट ने बाद में दम तोड़ दिया।

टक्कर इतनी तेज थी कि दो ऊंट ट्रेन के इंजन से टकराकर नीचे की तरफ घसीटते हुए चले गए और इंजन के पहियों और निचले हिस्से में बुरी तरह फंस गए।

टक्कर के कारण ऊंटों के इससे उनके शरीर पर गहरी चोटें आईं और कई जगहों पर मांस फट गया।

घटना होते ही लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया, ताकि आगे और नुकसान न हो। ट्रेन रुकने के बाद चालक और रेलवे कर्मचारी नीचे उतरे और इंजन के नीचे फंसे ऊंटों को निकाला।

इस काम में करीब 20 मिनट का समय लगा। तब तक ट्रेन ट्रैक पर ही खड़ी रही और यात्रियों को इंतजार करना पड़ा।

सुबह मौके पर पहुंचे ग्रामीण और वन्यजीव प्रेमी

घटना की सूचना मिलने पर सुबह रेलवे जमादार रेंवतराम चौधरी, वन्यजीव प्रेमी मुकेश भील और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने ट्रैक पर पड़े ऊंटों के अवशेषों को पटरी से दूर करवाया।

सूचना पर लाठी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये ऊंट सनावड़ा निवासी साजन खां के बताए जा रहे हैं।

बार-बार हादसों पर उठे सवाल

लाठी और आसपास का इलाका पशु बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में ऊंट पालन किया जाता है। पोकरण-जैसलमेर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 के समानांतर गुजरने वाला यह रेलवे ट्रैक अब मवेशियों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ बनता जा रहा है।

  • सूनसान इलाका: ट्रैक के आसपास घना जंगल होने के कारण मवेशी यहां चरने आते हैं।
  • सुरक्षा का अभाव: बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद रेलवे या स्थानीय प्रशासन ने ट्रैक के आसपास फेंसिंग या मवेशियों को रोकने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार हादसे होने के बावजूद रेलवे या प्रशासन की ओर से ट्रैक के आसपास फेंसिंग या सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। उन्होंने राज्यपशु ऊंटों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

फिलहाल, पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार की है।

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