हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद आज नई दिल्ली में कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक हुई। इस बैठक में क्रॉस वोट करने वाले 5 विधायकों को नहीं बुलाया गया, हालांकि इनके अलावा बैठक में विनेश फोगाट और विधायक पूजा चौधरी भी शामिल नहीं हुई।
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा- बैठक में क्रॉस वोटिंग पर भी चर्चा हुई, इसे लेकर 3 अप्रैल को चंडीगढ़ में पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी की बैठक बुलाई गई है। पार्टी इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है, इस पर एक्शन जरूर होगा। सब तय हो चुका है।
2 पॉइंट में पढ़िए मीटिंग में क्या हुआ…
- 30 विधायक शामिल हुए: दिल्ली में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 30 विधायक शामिल हुए। बैठक में पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भी शामिल होने की उम्मीद थी। हालांकि दोनों नेता बैठक में शामिल नहीं हुए। मीटिंग के बाद प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा…. हमारे प्रभारी बीके हरि प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आंखों से वोट देखा है। ये आरोप झूठे नहीं हैं। क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को इस्तीफा देना चाहिए
- दो गुटों में बंटे विधायक: क्रॉस वोटिंग करने वाले पांचों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विधायक दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट ये चाहता है कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जबकि दूसरा गुट की मांग है कि जिन चार विधायकों के वोट रद्द हुए उनके नाम भी सार्वजनिक किए जाए।
3 विधायकों ने ही दिया जवाब, दो बागी
हरियाणा कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में पांच विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नरायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी, साढ़ौरा से रेनू बाला और रतिया से जरनैल सिंह ने नोटिस का जवाब दे दिया है। तीनों ने ही पार्टी लाइन में रहते हुए कर्मवीर बौद्ध को वोट देने की बात कही।
हालांकि, तीनों विधायकों के जवाब से पार्टी संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। वहीं, पुन्हाना से विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने कमेटी को जवाब न देकर कांग्रेस से बगावत के संकेत दिए हैं।
इस्तीफे की चर्चा, उपचुनाव की आहट
नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी और पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास के इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं। कहा जा रहा है कि ये दोनों विधायक अपनों के लिए ही सीटें छोड़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो इन सीटों पर उपचुनाव होंगे, जहां कांग्रेस अपने ही नए चेहरों पर दांव लगा सकती है। दूसरी तरफ भाजपा भी अपना दावा करेगी। चर्चा है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भाजपा भी अपना पैठ मजबूत करने की दिशा में दांव खेल सकती है।
अनुशासन कमेटी की रिपोर्ट में सख्त रुख
अनुशासन कार्यवाही समिति ने अपनी रिपोर्ट 28 मार्च को दिल्ली हाईकमान को भेज दी थी। कमेटी ने साफ कहा कि 2 विधायकों ने नोटिस का जवाब न देकर गंभीर अनुशासनहीनता की है। समिति ने सभी तथ्यों का हवाला देते हुए कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है, जिससे संकेत मिलते हैं कि पार्टी सख्त कदम उठा सकती है।
निष्कासन के बाद क्या विकल्प
अगर पांचों विधायकों को पार्टी से निकाला जाता है, तो उनके सामने सीमित विकल्प रह जाएंगे। वे निर्दलीय के रूप में काम जारी रख सकते हैं या किसी अन्य दल में शामिल होने की राह चुन सकते हैं। हालांकि, दल-बदल कानून के चलते उन्हें विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा हो सकता है। ऐसे में उनका अगला राजनीतिक कदम बेहद अहम माना जा रहा है।