साइको किलर शिल्पी के जेल में 3 दिन:प्रेमी का नाम लेकर चिल्लाती– मुझे नीतीश से मिलना है, बैरक में रात भर जागी, खाना भी नहीं खाया

मोतिहारी में अपने एक्स बॉयफ्रेंड के लिए डबल मर्डर के आरोप में गिरफ्तार की गई शिल्पी के जेल में तीन दिन हो गए हैं। जेल की सलाखों के पीछे बंद शिल्पी से मिलने न तो उसका परिवार आ रहा, न ही उसका बॉयफ्रेंड।

जेल वॉर्डन सूत्रों के अनुसार वो अक्सर चीख पड़ती है। बार-बार नीतीश नाम के लड़के को बुलाती है, जोर-जोर से कहती है कि मुझे उससे मिलना है। मुझे जेल के बाहर जाना है, मैं यहां से बाहर कैसे जा सकती हूं।

बैरक में बंद अन्य महिलाएं उसे समझाती हैं, वह काफी चिड़चिड़ापन दिखा रही है। जेल अधिकारियों के अनुसार उसे महिला बैरक में रखा गया है, आम कैदियों की तरह ही खाना दिया जा रहा है। शिल्पी ने डबल मर्डर क्यों किया? जेल के अंदर उसका हर दिन कैसे गुजर रहा है? उसके घर वाले और बॉयफ्रेंड उससे मिलने क्यों नहीं जा रहे? भास्कर ने जेल सूत्रों और उसके बॉयफ्रेंड से बात की…

सबसे पहले जानिए पूरा मामला क्या था…

पूर्वी चंपारण की BA सेकेंड ईयर की छात्रा शिल्पी पर 5 साल की बच्ची अंशिका की हत्या का आरोप है। उसने पुलिस के सामने कबूल किया है कि वो अपने लवर को पाने के लिए 2 हत्या कर चुकी है।

सबसे पहले उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड के दादा की मई 2025 में हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने मासूम को मार डाला। प्यार में जो भी बाधा बन रहा था, उसे वो मौत के घाट उतार दे रही थी।

हत्या को हादसा बनाकर लगातार वो पुलिस के साथ-साथ लोगों को भी गुमराह करती रही। वहीं, अंशिका की हत्या के बाद कुछ लोगों का कहना था कि शिल्पी ने बच्ची के खून से अपने माथे और गले पर खून का तिलक लगाया और महायज्ञ में शामिल हुई।

अब जानिए जेल में तीन दिन से कैसे रह रही है शिल्पी

पीले सूट वाली कहकर बुलाई गई तो चौंक गई…

जेल की एक वार्डन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 31 मार्च की शाम 6 बजे शिल्पी को जेल के अंदर लाया गया था। इस दौरान जेल परिसर में कैदी महिलाएं अपने-अपने काम से लौटकर लाइन में हाजिरी दे रही थीं। तभी एक महिला वार्डन ने उसे पीले शूट वाली कहकर बुलाया तो वो चौंक गई।

शिल्पी ने पीछे मुड़कर देखा। कुछ पल के लिए वह रूक गई, जैसे समझ ही नहीं पाई कि किसे बुलाया जा रहा है। इशारा मिलते ही वह बिना कुछ बोले लाइन के आखिरी छोर पर जाकर खड़ी हो गई।

जब उसका नंबर आया और नाम पूछा गया, तो वह करीब दो मिनट तक चुप रही। फिर धीमी आवाज में बोली- शिल्पी कुमारी…

इसके बाद वॉर्डन ने उसे महिला बैरक की ओर भेज दिया। कुछ देर तक वह वॉर्डन को देखती रही, फिर चुपचाप अपने बैरक की ओर बढ़ गई।

पहली बातचीत में ही दिखा गुस्सा

बैरक में पहुंचते ही एक महिला कैदी ने उससे नॉर्मल तरीके से पूछ लिया, किस मामले में आई हो? इस सवाल पर शिल्पी ने तीखी नजरों से उसे देखा और झल्लाकर कहा- अपने काम से मतलब रखो।

उसकी आवाज में इतना सख्त लहजा था कि बैरक में मौजूद बाकी महिलाएं भी खामोश हो गईं। किसी ने फिर उससे बात करने की हिम्मत नहीं की। इसके बाद वह एक दो बार चिल्लाई भी, कि मुझे यहां से बाहर जाना है। कोई नीतीश से मिलवा सकता है क्या?

4 की जगह 2 रोटी से भरा पेट

पहले दिन रात करीब 9 बजे उसके बैरक में खाना पहुंचा। शिल्पी ने थाली को देखा और मुंह घूमा दिया। पहले तो उसने खाना खाने से ही मना कर दिया, उसके बाद वहां मौजूद महिलाओं ने समझाया तो आधा-अधूरा खाना खाया।

रातभर बेचैन दिखी, कभी बुदबुदाती तो कभी टहलने लगती

पहली रात को खाना खत्म करने के बाद शिल्पी करीब एक घंटे तक चुपचाप बैठी रही। बैरक की बाकी महिला बंदी आपस में बातचीत कर रही थीं। वह कभी उनको देखती तो कभी आंख बंद कर लेती।

रात 11 बजे से 12 बजे तक वह बैरक की लोहे की रॉड पकड़कर खड़ी रही। चेहरे पर न कोई भाव था, न कोई आंसू। कभी-कभी वह टहलने लगती थी, बस धीरे-धीरे बोलती नीतीश… नीतीश…। शिल्पी रात करीब 12 बजे तक जागती रही, वॉर्डंस ने भी उसे सोने के लिए कहा, लेकिन वह उनकी बातों को अनसुनी करती गई।

दूसरा दिन- धूप, सन्नाटा और मीठे से सुकून

सुबह करीब 6 बजे वह बैरक से बाहर निकली। ब्रश करने के बाद कुछ देर धूप में चुपचाप बैठी रही। चेहरे पर न कोई भाव, न कोई बातचीत।

इसके बाद सुबह 8 बजे वह नहाकर तैयार हो गई। जेल प्रशासन की ओर से मिले कपड़े पहनकर वह नाश्ते के लिए पहुंची। वहां उसे चना और गुड़ दिया गया। उसने नाश्ता कर लिया। जेल अधिकारी के अनुसार वह बार-बार जेल से बाहर जाने का तरीका पूछ रही है।

पूरे दिन अजनबी की तरह घूमती रही

जहां एक ओर बाकी महिला बंदी अपने-अपने काम में व्यस्त हो गईं, वहीं शिल्पी नए माहौल में खुद को अलग-थलग महसूस कर रही थी। वह एक पेड़ के नीचे बैठकर चुपचाप दूसरों को काम करते देखती रही।

जेल में सुबह से दोपहर तक भजन-कीर्तन की धुन गूंजती रहती है। शिल्पी भी इन्हीं धुनों को धीरे-धीरे दोहराती रही।

हालांकि, इस दौरान उसने किसी से बातचीत नहीं की। वह अपने ही अंदर खोई रही, जैसे बाहर की दुनिया से उसका कोई लेना-देना नहीं हो।

अब जानिए जेल का रुटीन क्या होता है?

जेल में दोपहर 1 बजे सभी बंदी एक साथ खाना खाते हैं। इसके बाद फिर अपने-अपने काम में लग जाते हैं। दोपहर 3:30 बजे बैरक बंद होती है और सभी की गिनती होती है।

शाम 5 बजे बैरक फिर खुलती है और चाय दी जाती है। ठीक एक घंटे बाद 6 बजे दोबारा गिनती कर बैरक बंद कर दी जाती है। रात में खाना मिलने के बाद महिलाएं सो जाती हैं।

3 दिन शिल्पी ने इसी तरह से काटे। कभी वो टहलती, तो कभी खाना खाकर बेड पर सो जाती। हालांकि, इन तीन दिनों में उसकी जुबान पर सिर्फ नीतीश और भगवान के नाम ही सुनने को मिले।

हनुमान जयंती पर किया हनुमान चालीसा का पाठ

एक जेल अधिकारी ने बताया कि यहां पूजा-पाठ का माहौल रहता है। महिलाएं नियमित रूप से रामायण पढ़ती हैं और सुंदरकांड का पाठ करती हैं। हनुमान जयंती पर ज्यादातर महिलाओं ने व्रत रखा था, जेल के माइक पर हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था।

शिल्पी भी हनुमान चालीसा का पाठ करती रही। तीन दिन में वो धीरे–धीरे जेल के अनुसार ढल रही है।

तीन दिन में एक भी मुलाकात नहीं

जेल अधिकारियों के अनुसार, आमतौर पर बंदियों के परिजन उनके लिए कपड़े और जरूरी सामान लेकर आते हैं। लेकिन शिल्पी से इन तीन दिनों में कोई मिलने नहीं पहुंचा। वह पूरी तरह जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए सामान पर ही निर्भर है।

जेल में कई NGO भी महिलाओं के लिए कपड़े और अन्य जरूरी सामान दान करते हैं। इन्हीं में से मिले सूट और साड़ियों का इस्तेमाल बंदियां करती हैं। शिल्पी भी फिलहाल वही कपड़े पहन रही है।

परिवार और अपनों से दूरी ने उसकी खामोशी को और गहरा कर दिया है जहां शब्द कम हैं, लेकिन भीतर की हलचल साफ महसूस होती है।

एक्स बॉयफ्रेंड ने कहा- सरस्वती पूजा में हुई थी पहली मुलाकात

एक्स बॉयफ्रेंड नीतीश ने बताया कि हम दोनों की पहली मुलाकात 2024 के सरस्वती पूजा के दौरान हुई थी। मेरे घर के बाहर सरस्वती मां की मूर्ति बैठाई गई थी। मैं अपने घर के बाहर मूर्ति के पास बैठा था, तभी वो लाल रंग की साड़ी पहने मेरे सामने आई।

पहले उसने मां के दर्शन किए, इसके बाद उसकी नजर मुझ पर पड़ी। इस दौरान मैं शिल्पी को देख रहा था। हम दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ। मुझे वो एक नजर में पसंद आ गई। हालांकि, भीड़ ज्यादा होने की वजह से हम दोनों सिर्फ एक दूसरे को देखे और फिर वो मेरे हाथ से प्रसाद लेकर अपने घर चली गई।

दूसरे दिन मूर्ति विसर्जन था। इस दौरान भी वो सज-धज कर मेरे पास आई और मुझे देखकर स्माइल किया। इसके बाद हमने एक-दूसरे का नंबर एक्सचेंज किया। शुरूआत में हम दोनों के बीच सिर्फ चैटिंग होती थी। एक ही गांव में रहने की वजह से कभी मुलाकात नहीं हो पाती थी।

धीरे-धीरे वो मुझे कॉल करने लगी। घंटों हमारी कॉल पर बात होने लगी। इसके बाद वो गांव में ही मुझसे मिलने की जिद करने लगी। मैंने उसे कई बार समझाया था कि गांव में मिलना सही नहीं है, लेकिन वो मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थी।

शिल्पी अपनी जिद को मनवाना जानती थी

नीतीश ने बताया कि शिल्पी जिद्दी लड़की थी। उसे किसी का डर और खौफ नहीं था। उसकी जिद्द पर मैं 1-2 बार उससे मिलने उसके घर चला गया था। वहीं, जब मेरे परिवार वाले बाहर जाते थे तो 2-3 बार वो मेरे घर मुझसे मिलने आई थी। एक दिन मेरे दादा जी को हमारे रिलेशन के बारे में पता चल गया था, इसपर उन्होंने मुझे और शिल्पी को खूब पीटा था।

दादा ने हम दोनों से कहा, तुमलोग अब कभी ऐसे अकेले में नहीं मिलोगे। इस रिलेशन का कोई मतलब नहीं है। सब खत्म कर दो। इसी वजह से वो मेरे दादा जी पर नाराज थी और उसने मेरे दादा की दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी।

धीरे-धीरे बदलने लगा व्यवहार

नीतीश के अनुसार, समय बीतने के साथ शिल्पी के व्यवहार और गतिविधियों में बदलाव आने लगा था। उसने बताया कि गांव में आगजनी, मारपीट जैसी घटनाओं में उसका नाम सामने आने लगा था।

शिल्पी के व्यवहार में बदलाव आ गए थे। वो मुझसे तो बहुत प्यार से बात करती थी, लेकिन गांववालों के साथ अक्सर लड़ाई-झगड़े और मारपीट करती थी। ये सब जानने के बाद मुझे उसके साथ सेफ फील नहीं होता था, इसकी वजह से मैंने भी उससे दूरी बनानी शुरू कर दी।

2025 में करना चाहता था ब्रेकअप

नीतीश ने आगे बताया कि 2025 के जुलाई में मैं उससे ब्रेकअप करना चाहता था। मैंने उससे इस मामले को लेकर कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन वो हर बार इस बात को टाल देती थी।

जैसे ही मैं उससे अलग होने के लिए कहता वो मुझे अपने पास बैठा कर और प्यार भरी बातें करना शुरू कर देती थी। वो हमेशा कहती थी, मुझे तुमसे दूर नहीं होना है।

इसी सब वजह से उससे दूर होने के लिए मैंने गांव छोड़ दिया। मैंने 12वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद शहर की तरफ चला गया। मैंने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया था। गांव से निकलने के बाद मैंने उसे नहीं देखा था। हालांकि, उसके कई कारनामे सुने थे। मेरे परिवार वाले बताते थे कि वो अजीब हरकत करती है।

डर के कारण बनाई दूरी

नीतीश ने स्पष्ट कहा कि शिल्पी के बदलते व्यवहार और संदिग्ध गतिविधियों के कारण मैंने उससे दूरी बना ली। यह फैसला अपनी सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया था।

अंशिका की हत्या हुई, तब पुलिस ने गहन जांच शुरू की। इसी जांच में शिल्पी की भूमिका सामने आई और उसे मुख्य अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार किया गया।

शिल्पी बात करने में नॉर्मल और सिंपल लड़की लगती थी। लेकिन उसके अंदर इतनी सारी बातें चल रही थी, जिसकी जानकारी मुझे नहीं थी। वो मुझे ये सारी बातें शेयर नहीं करती थी। कहती थी मैं पूरे गांववालों को खुद ही हैंडल कर लूंगी।