खंडवा में चहेते टीचर को असिस्टेंट कमिश्नर बनाने नोटशीट चलाई:रिटायर असिस्टेंट कमिश्नर ने कलेक्टर तक की चलने नहीं दी, फिर तीसरे को मिला चार्ज

खंडवा जनजातीय कार्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर पद से रिटायर हुए संतोष शुक्ला विवादों में घिर गए है। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद उनके ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले आदेशों को प्रभारी मंत्री ने निरस्त करवा दिया है। शुक्ला के कार्यकाल में हुए कामों की जांच के लिए आईएएस अफसर के नेतृत्व में एक कमेटी तक बना दी गई है। अब खास बात यह है कि, संतोष शुक्ला ने खुद का रिटायरमेंट प्लान तक तैयार कर लिया था।

विभागीय सूत्र बताते है कि, रिटायरमेंट के आखिरी सप्ताह में असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला ने ना केवल थोकबंद ट्रांसफर और पोस्टिंग आर्डर निकाले। बल्कि रिटायरमेंट के बाद अपनी जगह किस अधिकारी को देनी है, यह तक तय कर लिया था। संतोष शुक्ला ने अपने चहेते टीचर को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए बकायादा नोटशीट तक चलाई। जिला पंचायत से होकर यह फाइल कलेक्टर के पास पहुंची तो कलेक्टर ने नोटशीट में दर्ज नाम की जगह विभाग में सेकंड पॉजीशीन पर पदस्थ अफसर का नाम दर्ज करा दिया और उसी अफसर को चार्ज देने की अनुशंसा कर दी।

कलेक्टर ने अपनी पसंद रखी, मंत्री की शरण में पहुंचा शुक्ला

दरअसल, संतोष शुक्ला ने जिस टीचर का नाम आगे बढ़ाया था, वह विभाग में सीनियरटी के लेवल पर सांतवे नंबर पर आता है। वहीं कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने सहायक संचालक के पद पर पदस्थ नीरज पाराशर को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज देने की अनुशंसा कर दी। पाराशर और शुक्ला दोनों के बीच पहले से आपसी खींचतान चल रही थी। शुक्ला नहीं चाहते था कि नीरज पाराशर को चार्ज मिले।

शुक्ला को डर था कि पाराशर उसकी करतूतों को उजागर कर देगा। ऐसे में शुक्ला ने विभाग के मंत्री विजय शाह की शरण ली हालांकि मंत्री ने ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कलेक्टर को विवाद सुलझाने की बात कहीं। इसी विवाद की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पाराशर की जगह डिप्टी कलेक्टर बजरंग बहादुर को चार्ज दे दिया। इस तरह तीसरे व्यक्ति को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिया गया।

चहेता टीचर 3 स्कूलों का प्राचार्य, बीडीओ का भी प्रभार

मजे की बात यह है कि, संतोष शुक्ला ने जिस टीचर नारायणसिंह को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाए जाने के लिए अनुशंसा की थी, वह 3 स्कूलों का प्राचार्य है। इसके अलावा उसके पास विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीडीओ) का अतिरिक्त प्रभार है। नारायणसिंह वर्तमान में प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आशापुर, प्राचार्य माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर रजूर, प्राचार्य माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर आशापुर व विकासखंड शिक्षा अधिकारी खालवा हैं। यानी एक सामान्य व्याख्याता को 3 बड़े स्कूलों में प्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही बीडीओ का चार्ज अलग से। अब सवाल उठता है कि, एक व्यक्ति भला 4-4 पद कैसे संभाल सकता है।

जिसे चार्ज मिला, वो जांच अधिकारी रह चुके

अंततः डिप्टी कलेक्टर और सिटी मजिस्ट्रेट बजरंगसिंह बहादुर को प्रभारी सहायक आयुक्त बनाया गया हैं। इस नाम पर मंत्री विजय शाह ने भी सहमति दी थी। लेकिन बजरंग बहादुर पूर्व में भी जनजातीय कार्य विभाग की शिकायतों के लिए बनी जांच कमेटी का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके द्वारा की गई जांच अभी तक पेंडिंग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि, जांच अधिकारी को ही सहायक आयुक्त का प्रभार कैसे दे दिया गया।

प्रभारी मंत्री ने निरस्त कराए ट्रांसफर-पोस्टिंग के आदेश, असिस्टेंट कमिश्नर पर ऑनलाइन रिश्वत लेने के आरोप

खंडवा जिले के जनजातीय कार्य विभाग में रिटायरमेंट से पहले किए गए ट्रांसफर-पोस्टिंग के विवाद ने बड़ा मोड़ ले लिया है। प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के हस्तक्षेप के बाद सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला द्वारा जारी सभी 61 आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। इन आदेशों को लेकर नियमों की अनदेखी और लेनदेन के गंभीर आरोप सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच के लिए टीम भी गठित कर दी गई है। शिकायतों में ट्रांसफर के बदले पैसे लेने, अवैध वसूली और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। रिटायर हो चुके अधिकारी ने हालांकि सभी आदेशों को नियमों के तहत बताया है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई होगी।