सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने राजनीतिक सफर की शुरुआत जेल जाने के बाद की। वजह लालू यादव थे। जेल से बाहर आने के बाद राजद ज्वाइन किया।
लालू यादव से जिद कर पहली बार मंत्री बने। इनके पिता शकुनी चौधरी जदयू के बड़े नेता रहे हैं। उन्होंने 2000 में नीतीश को पहली बार CM बनवाने में बड़ी भूमिका निभाई। अब 26 साल बाद नीतीश ने वह कर्ज चुकाया है।
पढ़िए सम्राट चौधरी की 4 रोचक कहानियां। 3 पॉइंट में जानें, क्यों सम्राट नीतीश की पहली पसंद बने।
सबसे पहले जानिए वह कर्ज, जिसे उतारने के लिए नीतीश ने सम्राट को सीएम बनाया
नीतीश कुमार ने सम्राट को सीएम बनवाकर शकुनी चौधरी का 26 साल पुराना कर्ज उतारा है। बात 2000 की है। नीतीश कुमार पहली बार सीएम बने थे। इस पद पर 7 दिन ही रहे। बहुमत नहीं जुटने के चलते इस्तीफा देना पड़ा।
नीतीश को पहली बार सीएम बनाने में शकुनी का अहम रोल था। 1994 में नीतीश ने लालू यादव के खिलाफ विद्रोह कर समता पार्टी बनाई थी। शकुनी उन चंद बड़े नेताओं में थे, जिन्होंने नीतीश का साथ दिया था।
90 के दशक में जब लालू यादव का राजनीतिक प्रभाव चरम पर था तब शकुनी चौधरी ने मुंगेर और खगड़िया जैसे इलाकों में लाठी और राजनीति दोनों स्तरों पर समाजवादियों को संगठित किया। उनके समर्थन के बिना नीतीश के लिए पूरे बिहार में पैठ बनाना मुश्किल था।
शकुनी ने कुशवाहा समाज के वोट बैंक को नीतीश के लिए लामबंद रखा। इसके चलते अक्टूबर 2005 के चुनाव में नीतीश को बड़ी जीत मिली। जदयू के 88 और बीजेपी के 55 नेता विधायक बने। नीतीश पूर्ण बहुमत वाली सरकार के सीएम बने। यहीं से कोइरी-कुशवाहा का फॉर्मूला बिहार में चलने लगा था।
शकुनी चौधरी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में लव-कुश समीकरण बनाने का जिक्र किया। बेटे के सीएम बनने को लेकर उन्होंने कहा, ‘यह ईश्वर की कृपा है। पूरी लड़ाई हम लड़े। लव-कुश बनाए, समता पार्टी बनाए, हम पार्टी बनाए, लेकिन सफलता नहीं मिली। आज अमित शाह, नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की कृपा से सम्राट आगे बढ़ गए। हर मेहनत रंग लाती है। जो मेहनत करेगा वही आगे बढ़ेगा।’
अब जानिए सम्राट चौधरी की 4 कहानी, लालू ने जेल में डाला बाद में मंत्री बनाया
1- लालू यादव ने जेल में डाला तो शुरू की राजनीति
बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के अनुसार, 1995 में एक राजनीतिक मामले में सम्राट चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 89 दिन जेल में रहना पड़ा।
28 जून 2025 को ANI के साथ बातचीत में सम्राट चौधरी ने इस घटना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि लालू यादव ने जेल भेजा, इसके चलते ही वह राजनीति में आए।
सम्राट ने कहा, ‘1995 में यदि लालू यादव (तत्कालीन मुख्यमंत्री) ने मेरे परिवार के 22 लोगों को जेल में नहीं डाला होता तो मैं राजनीति में नहीं आता। दूर-दूर तक राजनीति में नहीं आता। मैं तीन साल तक केस लड़ता रहा। मैंने एक मच्छर भी नहीं मारा होगा। मुझ पर लालू ने मर्डर के 17 केस डाले, शुद्ध पॉलिटिकल।’
2- लालू यादव से जिद कर 19 साल में मंत्री बने
सम्राट को लालू यादव ने जेल में डलवाया था। जेल से बाहर आए तो उन्होंने राजद से ही अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। 1999 में राबड़ी की सरकार में पहली बार मंत्री बने थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस वक्त उनकी उम्र 19 साल थी।
राजद के पुराने नेता से मिली जानकारी के अनुसार सम्राट ने मंत्री बनने के लिए राजद सुप्रीमो लालू यादव से जिद की थी। कहा था कि मंत्री बनना है। लालू ने पूछा कि अपने पिता से बात करके आए हो तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। लालू ने सम्राट को कृषि मंत्री बनवा दिया था। हालांकि उनकी उम्र को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद राज्यपाल सूरजभान ने उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था।
इस विवाद की रिपोर्ट इंडिया टुडे की दिसंबर 1999 अंक में प्रकाशित हुई थी। इसमें लिखा है, ‘सम्राट चौधरी को राज्यपाल ने उस दिन बर्खास्त किया जब मंत्री अपना जन्मदिन मना रहे थे। राज्यपाल ने मजाक में कहा था कि मुझे दुख है कि मैं मंत्री को उनके जन्मदिन के दिन बर्खास्त कर रहा हूं। सम्राट चौधरी ने राज्यपाल के फैसले को गलत बताते हुए दावा किया कि CM राबड़ी देवी ने उन्हें पद से हटने के लिए नहीं कहा है।’
3- पापा से किया वादा- मुख्यमंत्री बनकर दिखाऊंगा
सम्राट के पिता शकुनी चौधरी का राजनीतिक जीवन संघर्ष से भरा रहा है। शुरुआत में शकुनी चौधरी लालू यादव के करीबी थे। बाद में अलग हुए और नीतीश के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई। नीतीश ने जब JDU बनाई तब भी उनके साथ रहे। इस दौरान उनका सीधा मुकाबला लालू यादव और उनकी पार्टी से था।
शकुनी चौधरी बिहार सरकार में मंत्री पद तक पहुंचे थे। बेटे सम्राट के सीएम बनने पर उन्होंने उस वादे का जिक्र किया जो अब पूरा हुआ है। शकुनी ने कहा, ‘वर्षों पहले एक दिन सम्राट ने मुझसे कहा था पापा, आप मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन मैं बनकर दिखाऊंगा। आज उनका कहना सच हुआ।’
4- नीतीश ने पाला बदला तो मुरेठा बांधा
2022 में नीतीश BJP का साथ छोड़कर महागठबंधन में गए तो सम्राट ने कुर्सी से हटाने की कसम खाकर मुरेठा बांध लिया। बोले कि इसे तभी खोलेंगे जब नीतीश को सत्ता से हटा देंगे। 2024 में नीतीश फिर से NDA में शामिल हुए तो सम्राट ने मुरेठा हटाया।
3 जुलाई 2024 को उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी में डुबकी लगाई और मुरेठा सिर से हटा दिया। कहा, ‘अयोध्या नगरी में आकर सरयू नदी में स्नान कर, ये मुरेठा जो मैंने 22-23 महीने से बांध रखा था, अब भगवान राम के चरणों में समर्पित करूंगा।’
सम्राट ने कहा- ‘हमारा कमिटमेंट नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने का था। यह संकल्प 28 जनवरी को पूरा हुआ। महागठबंधन से हटकर वो हमारे साथ आकर मुख्यमंत्री बने। हमने इसका स्वागत किया था। 28 जनवरी को बिहार में एनडीए की सरकार बनी।’
अब जानिए CM पद के लिए नीतीश-शाह की पसंद क्यों बनें सम्राट
1- लव-कुश समीकरण को साथ रखना
जदयू की ताकत लव-कुश समीकरण है। यहां लव-कुश का मतलब कुर्मी और कुशवाहा जाति से है। यह वोट बैंक नीतीश के साथ रहा है। 2005 से नीतीश कुमार को सीएम बनाए रखने में इस समीकरण का अहम रोल रहा है।
अब नीतीश के इस वोट बैंक को साधने के लिए सम्राट को आगे किया गया है। मैसेज है कि सत्ता के केंद्र में पार्टी जरूर (जदयू से भाजपा) बदल गई, लेकिन सीएम की कुर्सी लव-कुश समाज के नेता के पास ही जा रही है। इसे 2030 के चुनाव को भुनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
बिहार जातिगत गणना 2023 के मुताबिक राज्य में कुर्मी-कोइरी जाति की संख्या 7.07% है। कोइरी की संख्या 4.2% तो कुर्मी की अबादी 2.87% है। ओबीसी में सबसे बड़ी जाति यादव (अबादी 14.26%) है।
बिहार में पिछड़ा वर्ग (OBC) के जातियों की कुल आबादी में हिस्सेदारी 27.12% है। ओबीसी और ईबीसी को जोड़ दें तो ये आबादी का लगभग 63% हैं।
ईबीसी को नीतीश ने अपनी ताकत बना लिया
बिहार की कुल आबादी में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लोग 36.01% हैं। ईबीसी कॉन्सेप्ट नीतीश कुमार का दिया हुआ है। इन्होंने ओबीसी को दो भाग ओबीसी और ईबीसी में बांटा था। ईबीसी वोट बैंक नीतीश कुमार के साथ जुड़ा माना जाता रहा है।
लव-कुश समीकरण में कुर्मी और कोइरी के साथ दांगी, धानुक, अमात व गंगोता जैसी कई और जातियां शामिल हैं। 2023 में धानुक समाज की कुल आबादी 27,96,605 थी। यह बिहार की जनसंख्या का लगभग 2.13% है।
दांगी समाज की आबादी 3,36,629 है। यह जनसंख्या का लगभग 0.2575% है। इसी तरह गंगोता समाज की आबादी 6,48,493 (0.4961%) है।
2- दो साल से लगातार काम कर नीतीश का भरोसा जीता
जनवरी 2024 में सम्राट को डिप्टी सीएम पद मिला। इसके बाद दो साल लगातार काम कर नीतीश का भरोसा जीता। उनके साथ परछाई की तरह रहे। भाजपा की ओर से अकेला चेहरा हैं जो नीतीश के फ्रेम में बने रहे। 2025 के चुनाव में NDA की जीत के बाद सम्राट फिर से डिप्टी सीएम बनाए गए। 24 दिनों की समृद्धि यात्रा के दौरान सम्राट नीतीश कुमार के साथ रहे।
समृद्धि यात्रा में नीतीश ने बता दिया था सम्राट हैं पसंद
18 मार्च 2026 को जमुई में नीतीश ने साफ संकेत दे दिया था कि वह सम्राट को अगला सीएम बनते देख रहे हैं। भाषण के आखिर में CM नीतीश कुमार ने कहा, ‘ये लोग कितना काम कर रहे हैं। आगे भी यही सब देखेंगे।’
इसके बाद नीतीश मंच पर मौजूद सम्राट चौधरी की ओर बढ़े और उनके कंधे पर हाथ रखा। सम्राट हाथ जोड़े खड़े रहे। इससे पहले 13 मार्च 2026 को सहरसा में नीतीश ने लोगों से कहा कि हाथ उठाकर सभी का नमन कीजिए। इसके बाद वे खुद सम्राट चौधरी के पास पहुंचे। कंधे पर हाथ रखा और लोगों से कहा कि इन्हें बताइए कि काम हो रहा है।