कूनो बना चीतों का ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर:3 माह में 4 मादा चीता बनी मां, प्रबंधन ने बदली रणनीति- जंगल में प्रजनन को माना टास्क

करीब 70 साल बाद देश में लौटे चीते अब कूनो को पूरी तरह से न सिर्फ अपना चुके हैं, बल्कि तेजी से बढ़ भी रहे हैं। अप्रैल 2026 तक कूनो में चीतों की संख्या 54 तो देश में 57 पर पहुंच गई है, जिनमें 37 से ज्यादा शावक भारत में ही जन्मे हैं।

फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच ज्वाला, निर्वा, आशा और गामिनी सहित चार मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया। लगातार हो रही ब्रीडिंग ने कूनो को रेस्क्यू सेंटर से आगे बढ़ाकर देश का पहला सक्रिय चीता ब्रीडिंग हब बना दिया है।

जहां के जंगल ही नहीं खेतों में भी चीता घूमते हुए लोगों को सहर्ष ही दिख जाते हैं। इसी का नतीजा है कि कूनो नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिसके चलते पर्यटक आधारित काम धंधों में भी इजाफा हुआ है।

बता दें कि चीता प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में 2023 के दौरान संक्रमण और अन्य कारणों से कुछ चीतों की मौत के बाद उठे सवालों के बीच अब प्रोजेक्ट ने रिकवरी दिखाई है। कूनो नेशनल पार्क के सीसीएफ इसे बेहतर मॉनिटरिंग, अनुकूल पर्यावरण और रणनीति का परिणाम मान रहे हैं।

इस मामले में विशेषज्ञों के अनुसार कूनो की भौगोलिक परिस्थितियां, घास के मैदान और पर्याप्त शिकार चीतों के लिए अनुकूल साबित हुए हैं। मादा चीतों का लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का संकेत है कि वे तनावमुक्त हैं और इस क्षेत्र को अब अपना बेहतर प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं।

तीन महीने में 4 बार ब्रीडिंग, तेजी से बढ़ा कुनबा

फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच चार मादा चीतों ने शावकों को जन्म दिया। इससे पहले भी 2024 और 2025 में कई बार ब्रीडिंग हुई। लगातार हो रही वृद्धि इस बात का संकेत है कि कूनो का वातावरण अब चीतों के लिए स्थिर और अनुकूल हो चुका है