नरसिंहपुर का प्राचीन श्रीनरसिंह मंदिर भक्ति और कला का बेजोड़ नमूना है। कभी गड़रियाखेड़ा कहे जाने वाले इस शहर का नाम इसी मंदिर की वजह से नरसिंहपुर पड़ा। करीब 225 साल पहले एक जाट सरदार ने इस मंदिर को बनवाया था। साल 1785 में यहां भगवान नरसिंह की मूर्ति की स्थापना की गई थी।
इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी पांच मंजिला इमारत है। मंदिर के गर्भगृह के नीचे दो मंजिलें और ऊपर दो मंजिलें बनी हुई हैं। नीचे की मंजिलों में तहखाना है, जहां एक खंभे पर मूर्तियां टिकी हैं।
माना जाता है कि भगवान नरसिंह खंभे को फाड़कर प्रकट हुए थे, इसलिए इस ‘नरसिंह स्तंभ’ का बहुत महत्व है। इस तहखाने को साल में सिर्फ एक बार नरसिंह जयंती पर दर्शन के लिए खोला जाता है।
गर्मी में भी रहता है ठंडा
मंदिर का तलघर किसी अजूबे से कम नहीं है। बाहर चाहे कितनी भी चिलचिलाती गर्मी हो, यहां का तापमान बाहर से 8 से 10 डिग्री कम रहता है। मई-जून की दोपहर में भी यहां काफी ठंडक महसूस होती है, जो पुराने समय की इंजीनियरिंग का कमाल है।
हाथी पर बैठकर भी हो जाते हैं दर्शन
मंदिर को इस तरह बनाया गया है कि मुख्य दरवाजे से ही भगवान साफ दिखाई देते हैं। कहा जाता है कि पुराने समय में कोई व्यक्ति जमीन पर बैठा हो या हाथी पर सवार हो, उसे भगवान के दर्शन करने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। मंदिर के पीछे एक तालाब भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां तक एक गुप्त सुरंग बनी हुई थी।
आज मनेगा नरसिंह महोत्सव
आज 30 अप्रैल को नरसिंह जयंती के मौके पर मंदिर में आयोजन हो रहे हैं। सुबह से ही पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। इस खास दिन पर भगवान नरसिंह के दर्शन के लिए पूरे शहर से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।