कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 24 घंटे में दूसरी महिला की मौत हो गई। जेके लोन और मेडिकल कॉलेज के न्यू हॉस्पिटल में अब तक चार मरीजों की मौत हो चुकी है। 8 महिलाओं की हालत गंभीर है।
पिंकी महावर (31) को रविवार रात जेके लोन से मेडिकल कॉलेज के न्यू हॉस्पिटल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (SSB) में रेफर किया गया था। रात 12:30 बजे उसने दम तोड़ दिया।
परिजन का आरोप है कि हालत गंभीर होने के बाद भी दो दिन तक बेहतर इलाज के लिए उसे हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया। जब स्थिति हाथ से जाती दिखी तो जेके लोन हॉस्पिटल प्रशासन ने आनन-फानन में रविवार को उसे रेफर किया।
इससे पहले, जेके लोन हॉस्पिटल में 9 मई को रात करीब 12:30 बजे बूंदी जिले के सुवांसा की रहने वाली प्रिया (22) पत्नी रोहित महावर ने दम तोड़ा था। डॉक्टरों ने हार्ट फेल्योर कारण बताया था।
जेके लोन हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद कोटा के छावनी निवासी आरती चौबदार (33) और सुल्तानपुर के पास किसौरपुरा की रहने वाली पिंकी बेरवाल की हालत गंभीर है। वहीं न्यू हॉस्पिटल में 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है जबकि 6 की किडनी फेल हुई है।
यूरिन आना बंद, BP लो हुआ
कोटा के श्रीरामनगर की रहने वाली पिंकी महावर को 7 मई को दोपहर 3 बजे जेके लोन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। 7 मई को रात करीब 12 बजे सीजेरियन डिलीवरी हुई। उसने बच्ची को जन्म दिया। अगले दिन 8 मई को उसकी तबीयत बिगड़ना शुरू हो गई।
यूरिन आना बंद हो गया और ब्लड प्रेशर (BP) लो हो गया। इसके बाद उसे जेके लोन अस्पताल के ICU में शिफ्ट किया। वहां उसकी तबीयत और बिगड़ती गई। जब पिंकी की हालत गंभीर हो गई, तब उसे न्यू हॉस्पिटल के SSB के लिए रेफर किया।
रविवार रात करीब 8 बजे जेके लोन से एंबुलेंस के जरिए दो डॉक्टर्स की टीम ने पिंकी को भर्ती करवाया। SSB में भी उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन रात 12:30 बजे उसकी मौत हो गई।
मामले को दबाने की कोशिश में लगे रहे
पिंकी महावर के पति चंद्रप्रकाश ने बताया- पिंकी की तबीयत 8 मई को ही बिगड़ गई थी। दो बार ऑपरेशन हुआ, वेंटिलेटर पर लेना पड़ा। बेहोशी की हालत में थी। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन ने ये जहमत नहीं उठाई कि उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया जाए क्योंकि किडनी फेल्योर के मामले जेके लोन और नए अस्पताल में सामने आ रहे हैं।
शनिवार (9 मई) को ही प्रिया महावर और आरती चौबदार को जेके लोन से SSB में शिफ्ट किया गया था। ऐसे में जेके लोन प्रशासन ने पिंकी को हॉस्पिटल के ICU में ही रहने दिया और इसकी भनक तक किसी को नहीं लगने दी कि एक और ऐसा केस हुआ है।
यही नहीं, जब उसे रेफर किया गया तो हॉस्पिटल के मेन गेट के बजाय पिछले दरवाजे से निकाला गया। पिंकी के चार साल का बेटा है। इस डिलीवरी में उसने बच्ची को जन्म दिया था।
पिंकी के परिवार ने कहा कि जब तक उसकी मौत के सही कारण और लापरवाहों पर कार्रवाई नहीं होगी, बॉडी नहीं लेंगे।
आरोप- यूरिन नहीं आ रहा था, किसी ने ध्यान नहीं दिया
पिंकी को सीजेरियन डिलीवरी के बाद गायनिक वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। रात को उसे यूरिन भी आ रहा था। पिंकी की जेठानी संतोष ने बताया कि 8 मई को सुबह करीब 8 बजे उसकी यूरिन की थैली को खाली किया गया। जब दोबारा थैली लगाई गई, उसके बाद से यूरिन आना बंद हो गया था।
राउंड पर डॉक्टर आए तो उन्हें बताया। डॉक्टर ने कहा कि सब सामान्य हो जाएगा। डॉक्टर्स वहां से चले गए। बार-बार हम यही कहते रहे कि इसके यूरिन नहीं आ रहा है और वह पेट में दर्द की शिकायत कर रही है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। दोपहर 3 बजे तक किसी ने कुछ नहीं किया। बस, आते और दवाइयां देते, इंजेक्शन लगा देते।
कहा- बच्चेदानी में खून जम गया, फिर ऑपरेशन किया
पिंकी के पति चंद्रप्रकाश ने बताया कि 8 मई को दोपहर 3 बजे तक भी जब यूरिन नहीं आया, तब पिंकी को ICU में लिया गया। कुछ देर बाद हमें कहा कि पिंकी की बच्चेदानी में खून जम गया है। खून को निकालना पडे़गा।
उसे फिर से ऑपरेशन थिएटर में ले लिया। उसकी बच्चेदानी को निकाल लिया। 15 घंटे के अंदर ही दो बार उसका ऑपरेशन किया। बच्चेदानी को एक डिब्बे में रखकर बेड के पास ही रख दिया। कहा कि इसकी जांच करवाएंगे।
10 मई तक भी वह डिब्बा वहीं पड़ा था। किसी ने कहीं जांच के लिए नहीं भेजा। ऑपरेशन के बाद उसे फिर आईसीयू में भर्ती किया गया।
बार-बार कागजों पर साइन करवाते रहे
पति ने बताया- पिंकी की हालत बहुत खराब थी। वह बेहोशी की हालत में थी। 8 मई की शाम को उसे वेंटिलेटर पर लिया था। हम सबको आईसीयू से बाहर ही रहने को कहा, सिर्फ एक महिला को अंदर जाने दे रहे थे। हम आते-जाते डॉक्टर्स और स्टाफ से पूछते तो वह कहते कि इलाज चल रहा है, लेकिन क्या हो रहा था, ये नहीं बता रहे थे।
9 मई को भी पूरा दिन ऐसे ही निकाल दिया। उसकी कई बार जांच करवाई गई। हमें तो शक हो ही गया था कि जो केस चल रहे हैं, वही किडनी फेल होने का मामला हुआ है। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कुछ नहीं बताया। बस बार-बार कागजों पर साइन करवाते रहे।
10 मई को बताया किडनी काम नहीं कर रही
चंद्रप्रकाश ने बताया कि आईसीयू में परिवार के सदस्यों को जाने नहीं दे रहे थे। 10 मई को मुझे बुलाकर कहा कि पिंकी की किडनी काम नहीं कर रही है। इसके बाद जब रिश्तेदार आए और उन्होंने विरोध जताना शुरू किया।
फिर भी अस्पताल से उसे बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट नहीं कर रहे थे। परिवार के सदस्यों ने कांग्रेस नेता विद्याशंकर गौतम को जानकारी दी। उनके दखल के बाद मरीज को एसएसबी के नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट किया गया।
चंद्रप्रकाश ने बताया- शिफ्ट करने से पहले भी यही कहते रहे कि लिखकर दो कि अगर मरीज को कुछ हो गया तो उसकी जिम्मेदारी डॉक्टर्स की नहीं है। लगातार किडनी फेल के मामले सामने आ रहे हैं।
पेट से निकल रहा था ब्लड
रिश्तेदारों ने बताया कि पिंकी के जहां से नली लगाई गई थी, वहां से लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। उसके खून रिसना कम ही नहीं हो रहा था। चार-पांच बार तो उसे ब्लड चढ़ा दिया गया।
लिवर और किडनी, दोनों फेल
गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रितिका ने बताया- पिंकी की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि उसके लिवर में भी दिक्कत थी। बहुत बुरी हालत थी। उसके शरीर में क्रिएटिनिन लेवल 2.44 एमजी आ रहा था, जबकि नॉर्मल लेवल 0.60 से 1.50 तक माना जाता है।
क्रिएटिनिन का स्तर ज्यादा होने का मतलब है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है और खून में अपशिष्ट जमा हो रहा है, जो किडनी के फेल होने का संकेत है।
बिलीरुबिन का लेवल भी हाई जा रहा है। यह 2.24 एमजी आ रहा है जबकि नॉर्मल रेंज 0 से 0.4 तक ही है। डायरेक्ट बिलीरुबिन लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है। इसके हाई होने का मतलब है कि लीवर काफी डैमेज हो गया है।